Kids Story Hindi | Hindi Kahani New | Kids Story in Hindi

प्यारे बच्चो- आज हम आपके लिए Hindi kahani new ले कर आये हैं और मुझे आशा है की आपको ये कहानी बेहद पसंद आएगी | Kids Story Hindi की सीरीज़ में लिखी गई सभी कहानियां काल्पनिक है, यह सिर्फ पाठकों के मनोरंजन हेतु लिखी गई है। 

सच्चा पारखी – Kids Story Hindi 

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सिकंदर महान ने एक बार अपने दरबार में घोषणा की कि ‘जो चित्रकार उसके घोड़े का वैसा ही चित्र बना देगा, उसे राज्य में सब से बड़ा चित्रकार घोषित किया जाएगा और उसे पुरस्कृत भी किया जाएगा. जो चित्रकार सही चित्र नहीं बना पाएगा, उसे अपनी चित्रकला छोड़नी पड़ेगी.

यह घोषणा सुन कर बड़ेबड़े चित्रकार भी डर गए. लेकिन एक युवा चित्रकार हिम्मत कर के राजमहल में पहुंच गया.उस ने पहले तो घोड़े को बहुत ही बारीकी से देखा फिर .चित्र बनाने में जुट गया. आसपास भीड़ जमा हो गई लेकिन चित्रकार अपने काम में जुटा रहा.जब चित्र तैयार हो गया, तब सिकंदर खुद उसे देखने पहुंचा।

चित्र को देख कर वह मन ही मन खुश तो हुआ, मगर उस ने चित्रकार की तारीफ नहीं की, बल्कि चित्र में एकएक कर दोष निकालने शुरू कर दिए.चित्रकार कुछ देर तक सिकंदर की बातें सुनता रहा,लेकिन जब उस की कला की सिकंदर ने खूब आलोचना की तो चित्रकार से रहा नहीं गया. उस ने कहा, “महाराज, यदि आप अपने घोड़े को चित्र के सामने खड़ा कर के गुण और दोष निकालें तो ज्यादा बेहतर रहेगा.”

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सिकंदर ने घोड़े को बुलवाया. घोड़ा उस चित्र को देख कर “बारबार हिनहिनाने लगा. सिकंदर ने चित्रकार से घोड़े के हिनहिनाने का कारण पूछा. चित्रकार बोला, “महाराज, आज्ञा हो तो सच बात बता दूं, लेकिन बुरा न मानिएगा. आप की अपेक्षा यह घोड़ा कला का सच्चा पारखी है. चित्र के घोड़े को अपना साथी समझ कर यह उस के साथ दौड़ने को व्याकुल हो रहा है. यही मेरी कला की सजीवता का प्रमाण है.”

_अब सिकंदर ने चित्र को गौर से देखा. वह कभी घोड़े को देखता तो कभी उस की आंखें चित्र पर ठहर जातीं. उस के होंठों पर मुसकान खेलने लगी. उस ने चित्रकार की पीठ थपथपाते हुए कहा, “तुम ने ठीक कहा, दोनों को आमनेसामने कर के ही पता चला कि चित्र कितना सजीव है. घोड़ा भी इसीलिए भ्रम में पड़ गया है.”

दरअसल, चित्रकार की दो टूक बातें सुन कर सिकंदर खुश हो गया था. इसीलिए वह फिर बोला, “मैं मान गया हूं कि चित्र बहुत अच्छा बना है. दोनों घोड़े एकजैसे लगते हैं. दूर से देखने पर तो दोनों एक ही जाति के जीवित घोड़े जान पड़ते हैं. मैं तुम्हारी परीक्षा लेना चाहता था. दरबार में अनेक चित्रकार हैं लेकिन चित्र बनाने केवल तुम्हीं आए. तुम अपनी निर्भीकता का कितना परिचय दे सकते हो, यही देखना था मुझे.

मैं तुम जैसा ही चित्रकार चाहता था जो सच्ची बात कहने से न डरे. सम्राट की हर आज्ञा को मानना ही व्यक्ति का काम नहीं, उसमें गुणदोष बताना भी जरूरी है.”फिर सिकंदर ने उस चित्रकार को उचित पुरस्कार देकर दरबारी चित्रकार घोषित कर दिया.

एक पैसा – Kids Story Hindi 

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पुरानी बात है। विध्याचल के जंगली प्रदेश में एक भीलों का गांव था। वहां एक भील रहता था। वही उस गांव का मुखिया भी था। धन-धान्य से सम्पन्न होने पर भी वह बहुत लोभी था। न तो अच्छा खाना स्वयं खाता था और न परिवार वालों को खाने देता था। वह सदैव इस चिंता में खोया रहता था, कैसे इस धन को और अधिक बढ़ाया जाए?

एक बार भील जंगल में शिकार के लिए जा रहा था। तभी उसकी अंटी से निकलकर एक पैसा घास में गिर गया। घास बहुत ज्यादा थी। भील ने बहुत कोशिश की, मगर वह गिरे हुए पैसे को फिर न पा सका। लोभी भील एक पैसे के खो जाने से उदास हो गया। मन में कहने लगा-‘आज बहुत नुकसान हो गया। उस एक पैसे से कल दो पैसे, फिर चार, आठ तथा सौ पैसे भी हो सकते थे।

इसके खो जाने से मेरे धन में एक पैसा तो कम हो ही गया। अब क्या करू?’ यह सोचकर वह फिर दूने उत्साह से घास में उस पैसे को खोजने लगा। खोजते-खोजते उसने एक चमकीली मणि को देखा। हाथ में उठाया, तो उसके प्रकाश से आसपास जगमगाहट फैल गई। वह बहुत प्रसन्न हुआ। उसे लगा- ‘ यह निश्चय ही चिंतामणि है। अब इसके पा जाने से मुझे धन की क्या कमी रहेगी?’ उसने सुन रखा था, जिसके पास चिंतामणि होती है, उसे किसी चीज की कमी नहीं रहती।

उसने चिंतामणि को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और घर की ओर चल पड़ा। कुछ दूर पर फिर अचानक उसके मन में एक शंका जागी। सोचने लगा- चिंतामणि तो बड़ी ही दिव्य मणि है। यह बहुत पुण्यों और देवताओं के आशीर्वाद से प्राप्त होती मगर मैंने तो ऐसा कोई पुण्य नहीं किया। न ही देवताओं ने मुझे चिंतामणि पाने का आशीर्वाद दिया। निश्चय ही मेरी मुट्ठी में जो है, वह चितामणि नहीं हो सकती। यह कोई मामूली पत्थर है। भला, मैं इसे घर ले जाकर क्या करूंगा? सब मेरी हंसी उड़ाएंगे।

This Kids Story Hindi  written by ;- Haaris Hassan

मन में यह बात आते ही उसने चितामणि को दूर फेंक दिया और अपने घर लौट आया घर आकर भी उसके मन से चिंतामणि की बात तरी नहीं थी। अब वह मन ही मन अपने को कोस रहा था-‘ कैसा मूर्ख हूं मैं! कम से कम उसे किसी जौहरी को दिखा लेता या किसी जानने वाले से पूछ लेता। क्या पता, वह चिंतामणि ही हो। लगता है, मैंने अपनी मूर्खता के कारण सुख-सम्पत्ति देने वाली चिंतामणि को, पत्थर जानकर फेंक दिया। ‘ बस, वह उठा और फिर उसकी खोज में चल दिया। जहां उसने चिंतामणि को फेंका था, वहीं आकर उसे खोजने लगा।

पूरा दिन बीत गया। चिंतामणि अब वहां कहां थी। वह तो उस लोभी का भाग्य आजमाने आई थी। उसके फेंकते ही वह अंतर्धान हो गई थी। खोजते-खोजते उसे फिर एक चमकीला पत्थर मिला। सूरज की ओर करने पर उस पत्थर के टुकड़े में से सात रंग की किरणें झलक उठती थीं। लालची भील बहुत खुश हुआ। उसे पूरा विश्वास हो गया था कि यह चमकीली चीज जरूर ही कोई बहुमूल्य मणि होगी। उससे ऐसा पत्थर कभी देखा नहीं था। वह उसको उठकर घर ले आया।

घर आकर उसने किसी को यह बात नहीं बताई। उसके मन में तो लोभ छाया हुआ था। वह सोच रहा था ‘ घर-परिवार या गांव में अगर किसी ने यह जान लिया, तो वे मेरे भाग्य से ईर्ष्या करने लगेंगे- और हो सकता है, उसे हथियाने के लिए वे मुझे जिंदा भी न भोल कई दिन तक मन ही मन उस चमकीले पाथर को बेच, बहुत धनी होने की सुखद कल्पना में खोया रहा। आखिर उसने निश्चय किया-गांव को छोड़कर में अकेला दूर जेगल में जाकर रहेगा।

इसे बेचकर सारे सुख के साधन जुटा लूंगा। फिर मुझे किसी की आवश्यकता नहीं रहेगी। धन को छिपाकर भी रख दूँगा। मेरे अलावा इस बारे में कोई कुछ जान ही नहीं दूसरे दिन वह घर और जमा सम्पत्ति को छोड़ उस चमकीले पत्थर के टुकड़े को लेकर दूर जंगल में चला गया। घर से वह किसी विशेष काम का बहाना बनाकर आया था ताकि, असली बात कोई न जान सके।

कई महीने तक वह आधे पेट खाकर ही रहा। वह उस पत्थर को बड़ी हिफाजत से पत्थरों के बीच छिपाकर रखता रहा। आखिर एक दिन वह उसका मूल्य जानने के लिए दूर किसी कस्बे में पैदल चलकर आया एक जौहरी की दुकान पर गया। उसे वह पत्थर दिखाया और उसका मूल्य पूछने लगा।

जौहरी ने उलट-पलटकर पत्थर को देखा। फिर कहा- ” बड़ा सुंदर पत्थर है। इसको काट-छोटकर तोलने के लिए बाट बनाया जा सकता है। इसका मूल्य तो कुछ नहीं है। फिर भी तुम इसे ढूंडकर लाए हो, इसलिए मैं एक पैसा तुम्हें दे सकता हूं “।

सुनकर भील तो जैसे आसमान से जमीन पर गिर पड़ा। उसकी सारी योजनाएं, और कल्पनाएं मिट्टी में मिल गई थी। अब वह लगा के मारे अपने घर भी वापस नहीं जा सकता था, जहां वह जीवन भर की कमाई, उस पत्थर से धन पाने के लोभ में छोड़ आया था। क्या करता, एक पैसा लेकर वह लोट पड़ा। लोभ के कारण चिंतामणि से हाथ धो बैठा और खोए गए पैसे के बदले पाया सिर्फ एक पैसा ही ।

नोट ;- Kids Story Hindi में लिखी गई सभी कहानियाँ काल्पनिक है।  

जादूगर की कहानी – Kids Story Hindi 

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किसी गांव में रत्नदीप नाम का एक लड़का रहता था। उसके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी थी। वह सुंदर-सुंदर लकड़ी के खिलौने बनाकर बाजार में बेचता था। उसी से उसका गुजारा होता था।

एक दिन उसने रास्ते में एक पत्थर पड़ा देखा। उसने उस पत्थर को रास्ते से हटाया, तो देखा कि उसके नीचे एक हीरे जैसा चमकता हुआ नन्हा-सा पत्थर पड़ा है। उसस राशना फूट रही थी। उसने जैसे ही पत्थर को उठाना चाहा, जोर से आवाज आई और एक जादूगर प्रकट हुआ। उसने रत्नदीप से कहा- ” तुम एक दयावान और भले लड़के हो।

इसीलिए मैं तुम्हें यह पत्थर दे रहा हूं। यह पत्थर चमत्कारी है। इस पत्थर से तुम जिस चीज को छुओगे, उस चीज में जान आ जाएगी।” उसने घर जाकर लकड़ियों से बंदर, जिराफ और हवाई जहाज बनाए। फिर उस पत्थर से छुआ। चमत्कारी पत्थर से छूते ही सभी चीजें जीवित हो उठीं। बात राजा तक जा पहुंची।

राजा ने कुछ सैनिकों को रत्नदीप को लाने के लिए भेजा। सैनिक रत्नदीप को राजमहल में ले आए। राजा ने उससे सारी बात जान लीं। राजा ने सोचा ‘ अगर यह पत्थर मुझे मिल जाए, तो कितना अच्छा हो।’ राजा ने उससे कहा- ” तुम यह पत्थर मुझे दे दो। मैं तुम्हें बहुत-सा धन दूंगा।” राजा के बहुत कहने पर भी रत्नदीप नहीं माना, तो राजा ने उसे कारागार में डलवा दिया।

तभी एक जोर का धमाका हुआ। जादूगर प्रकट हुआ। बोला- ” राजन, तुमने यह चमत्कारी पत्थर रत्नदीप से लेना चाहा। शायद तुम्हें यह नहीं पता कि जो इस पत्थर को छीनना चाहेगा, वह खुद ही पत्थरबन जाएगा।” जादूगर की बात सुनकर राजा डर गया और उसने रत्नदीप को छोड़ दिया।

नोट;- Hindi Kahani  new  कहानियों की एक सीरीज़ है ,जिसमे बच्चो के मनोरंजन के लिए काल्पनिक कहानियां लिखी गई है। 

गलती का एहसास – Kids Story Hindi

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इस बार गर्मी की छुट्टियों में मालती ने गाजीपुर जाने का कार्यक्रम बनाया था प्रणव मम्मी के इस इरादे से इतना खुश हुआ कि जिसका ठिकाना नहीं। गाजीपुर में मामाजी की दालमिल है, गंगा के किनारे खूबखुला लंबे-लंबे दालानों और आंगन वाला मकान है। कोई क्रिकेट खेले, तो आंगन में ही चौका-छक्का लगा सकता है।

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चांदनी रातों में गंगा का पानी तारे सा चमकता है। इसके अलावा नाना के समय का बूढ़ा नौकर महादेव है, जो ढेरों कहानियां जानता है। सिर्फ जानता ही नहीं, वह सुनाता भी इस तरह है कि कभी सांस रुक जाती, तो कभी दिल बल्लियों उछलने लगता है। प्रणव ने चिट्ठी लिखकर पूछ भी लिया है कि महादेव जिंदा तो है न! कहानियां भूल तो नहीं गया? और रतन के पास क्रिकेट खेलने का बैट है, या नहीं?

पत्र का उत्तर पाते ही जोर-शोर से उसने तैयारी शुरू कर दी। टिकट संग्रह वाला अपना एलबम, स्कूल के वार्षिक समारोह की तस्वीरें, क्रिकेट की गेंद, बैट बहुत सी चीजें उसे ले जानी थीं, मामा और रतन को दिखलाने के लिए।
पत्रिकाओं में से काट कर आस्ट्रेलियाई और पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों के फोटो भी उसने रख लिये थे। मालती ने उसकी खुशी देखकर चिढ़ाया था, “ वाह रे पागल, गाज़ीपुर जाने में इतना खुश है, जैसे कश्मीर या इंग्लैंड-अमरीका जा रहा है।”

” रहने दो, रहने दो! कश्मीर तो देख ही चुका, और इंग्लैंड-अमरीका में क्या होगा? बस बंबई से भी ऊंचे मकान, बड़े होटल और ढेर सारी मोटरें, यही न? ये फालतू चीजें मुझे अच्छी नहीं लगती। मुझे तो गाजीपुर में मामा के साथ जीप पर घूमने और छोटी गुड़िया को गोद में खिलाने में मजा आता है।

” अरे बुद्ध, तुम तीन साल पहले गये थे। गुड़िया तो अब साढ़े तीन साल की हो गयी होगी। मीना आंटी की रिंकू के बराबर प्रणव और बातें भूल गया। कहने लगा, ” अच्छा मम्मी, तुम्ही एक छोटी गुड़िया क्यों नहीं ले आती हो अस्पताल से? “दाढ़ी बनाते उसके पापा ज़ोर से हंसने लगे और मालती अपनी झेंप छिपाती वहां से हट गयी। पापा ने पूछा- अच्छा
प्रणव, वहां जाकर मुझे भूल जाओगे, या लैटर-बैटर लिखोगे?
” लिखूगा-लिखूगा … जरूर। ” वह बुजुर्गों की तरह सिर हिला कर उन्हें दिलासा देने लगा। गाजीपुर आकर प्रणव की कल्पना सचमुच साकार हो उठी।

सुबह उठते ही कभी खीर, कभी हलुवा, कभी गरमागरम जलेबियां। रतन के साथ खेलना और गप्पे मारना। गुड़िया पर रोब जमाना और हाथ पकड़ कर फिरकी की तरह नचा देना। शाम को मामा के साथ घूमने जाना और रात में तेल मालिश करवाते हुए महादेव से मज़ेदार कहानियां दो हफ्ते पलक झपकते निकल गये।

एक दिन मालती ने रतन को काजू, किशमिश खाते देखा। प्रणव उस समय नहा रहा था। नहा कर आया, तो वह और रतन फिर खेलने लगे। खाना खाने से पहले उसने प्रणव को बुला कर चुपके से पूछा | ” तुम्हें भी मामी ने काजू-किशमिश दिये थे क्या? ” नहीं तो मम्मी। “

यह सुन मालती क्षुब्ध स्वर में कहने लगी, देखो जरा भाभी को। बच्चों में कैसा भेद करती हैं। एक हम लोग है कि पहले मेहमान को खिलाते है। अच्छा, लो, ये पैसे रख लो। भूख लगे, तो कुछ लेकर खा लेना। “

प्रणव खेल छोड़कर आया था, वह दौड़ता चला गया। पहले तो वह पैसे की बात भूल गया। पर फिर एकाएक उसे वह बात याद आ गयी। तो उसने से इसका जिक्र किया। पता लगा कि प्रणव के पास रोज़ पैसे देखकर मामी भी रतन को रोज़ पैसे दे रही थीं। रतन ने कहा-” मुझे लगता है कि अम्मा और बुआ में कुछ कुट्टी हो गयी है। देखो न, बुआ अब उतना हंसी-मजाक भी नहीं करती है, अम्मा से। ” हां, और मामी भी अकसर सिर-दर्द का बहाना करके कमरे में जाकर सो जाती है ” प्रणव दुखी स्वर में बोला।

घर में खेलना और उधम मचाना छोड़कर अब वे बाहर ही बाहर मामा, या महादेव के साथ लगे रहते। धीरे-धीरे छुट्टियां खत्म हुई और जाने का दिन आ गया। सामान बाहर निकल गया, तो मालती खोखली हंसी के साथ औपचारिक ढंग से बोली,” अच्छा भाभी, चलती हूं। इतने दिन रहकर आपके काम का बोझ हमने बढ़ा दिया। आप भी बंबई ” फिर तो हम भी जाकर आप पर बोझ हो जाएंगे।” रतन की अम्मा व्यंग्य से हंस कर बोली। मालती से कोई उत्तर नहीं बन पड़ा, तो उसके मुख पर झंझलाहट तैर आयी।

इसी समय उसके कानों में माउथ ऑर्गन के बजने की आवाज़ आयी। प्रणव सीढ़ियों के पास खड़ा माउथ ऑर्गन बजा कर रतन और गुड़िया को सुना रहा था। ” अरे, तुम्हारे पास माउथ ऑर्गन कहां से आ गया?” मालती ने पूछा। इसी समय रतन की अम्मां ने भी रतन से पूछा, ” ये तुम्हारे हाथ में क्या है रतन?” ” रंगों का डिब्बा अम्मां। प्रणव ने मुझे भेंट में दिया है।” रतन ने बतलाया।

” आप लोग जो खाने के लिए हमें पैसे देती थीं, उन्हें जमा करके मैने माउथऑर्गन खरीदा और प्रणव ने रंगों का डिब्बा। गुडिया के लिए फुदकने वाला मेढक भी खरीदा है, हम लोगों ने।”

बच्चों का चेहरा उल्लास भरी मुस्कान से चमक रहा था। मालती और रतन की अम्मा ने शर्मिदगी भरी निगाहों से एक-दूसरे की तरफ देखा। फिर रतन की अम्मां बोली, ” कुछ भूल हो गयी हो तो माफ करना दीदी।” मालती उसके गले से लिपट गयी, ” नहीं भाभी, मुझसे ही भूल हो गयी थी। आप जरूर आइएगा बंबई। आइए गा न?” दोनों को अपनी-अपनी गलती का एहसास हो गया था।

फूट से विनाश – Kids Story Hindi

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किसी जंगल में दो साँड रहते थे – बड़े हृष्ट-पुष्ट और शक्तिशाली। दोनों ही साथ-साथ रहते और हरी-भरी घास खाकर सुख से जीवन बिता रहे थे। उसी जंगल में एक सिंह रहता था।

एक दिन उस सिंह ने उन साँडों को देखा। उनके मांसल शरीर को देखकर उसके मुँह में पानी भर आया। वह सोचने लगा “इन्हें किस प्रकार मारूँ? यदि एक पर हमला करूँगा, तो दूसरा मुझे सींगों से फाड़ देगा। इसलिए कोई ऐसा उपाय करना चाहिए, जिस से इनमें फूट पड़ जाए। तब मैं एक-एक को मार कर मजे से इनका माँस खा सकूँगा।

एक दिन सायंकाल के समय दोनों साँड पेट भरकर आपस में नकली लड़ाई लड़ रहे थे। कभी एक साँड दूसरे को पीछे धकेल देता तो कभी दूसरा साँड पहले को धकेल देता। इस प्रकार नकली लड़ाई से वे परस्पर विनोद कर रहे थे।

तभी सिंह ने उन्हें देख लिया। जब एक साँड ने दूसरे साँड को पीछे धकेला तो शेर बोला उठा “अरे! तू तो बड़ा कमजोर है। एक ही धक्के से पीछे चला गया है। शेर इस प्रकार कभी एक को प्रोत्साहित करता, कभी दूसरे को । परिणाम यह हुआ कि नकली लड़ाई असली लड़ाई में बदल गई और साँड एक दूसरे की जान के दुश्मन हो गए।

अंत में एक साँड हार कर दूर भाग गया, तभी सिंह ने अच्छा मौका देखकर विजयी साँड पर हमला बोल दिया। साँड थका हुआ तो था ही, वह सिंह का मुकाबला नहीं कर सका। सिंह ने उसे मार डाला और चीर-फाड़ कर खा गया। इसी प्रकार उसने दूसरे साँड को भी एक दिन धर दबोचा और उसे भी मार कर खा गया। इस तरह फूट के कारण दोनों साँड मारे गये।
सच है – फूट से विनाश ही होता है। अतः दूसरों के वचनों में आकर मित्रों से लड़ना नहीं चाहिए।

अपना-अपना काम – Kids Story in Hindi

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किसी गाँव में एक धोबी रहा करता था। उसके पास एक गधा था, जिस पर वह कपड़े लाद कर घर से घाट और घाट से घर पर आता था। उसने पहरा देने के लिए एक कुत्ता भी रखा हुआ था।

धोबी ऐसा दुष्ट था कि वह न तो गधे को चारा देता था और न कुत्ते को रोटी। दोनों ही बेचारे घूम-फिर कर जो कुछ मिलता, उसे ही खाकर सन्तोष कर लेते थे।

एक बार गधा धोबी के घर के बाहर बंधा हुआ था और कुत्ता उसके पास बैठा हुआ था। धोबी के कपड़ों का गट्ठड़ बरामदे में पड़ा था और धोबी कमरे में सो रहा था। इसी समय एक चोर कपड़ों का गट्ठड़ चुराने आया।

गधे ने कुत्ते को कहा – “भौंक कर स्वामीजी को नींद से जगा दो, नहीं तो ये चोर चोरी कर लेगा।
कुत्ता बोला – “जो स्वामी हमारी परवाह नहीं करता, उसकी परवाह हम क्यों करें? चोरी होती है, तो होने दो।

गधे ने स्वामी-भक्ति दिखाने के लिए ठेचू-टेंचू कर धोबी को जगाना चाहा। गधे की आवाज सुनकर चोर भाग गया, पर गधे की आवाज से धोबी की नींद खुल गई। उसे गधे पर बहुत गुस्सा आया और डण्डा लेकर उस ने गधे की खूब पिटाई की। उसके बाद वह सो गया, तब कुत्ते ने गधे से पूछा-“मित्र, तुम्हारी पिटाई क्यों हुई?”

गधा बोला- “क्योंकि तुम्हारा काम मैंने किया। स्वामी को जगाने का काम तुम्हारा था, परन्तु मैंने उसे जगा दिया। इसीलिए कहा है जिस का काम उसी को साज, और करे तो डण्डा बाजे।

 

जासूसी कहानी – Kids story in Hindi

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कॉमन रोड पर फूल वालों के कई स्टाल है। उनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय है विलियम फ्लॉवर कॉर्नर। बारबरा को वहां रोज ही देखा जा सकता है। बारबरा और विलियम एक-दूसरे के कोई नहीं हैं। बारबरा ग्यारह वर्ष की अनाथ लड़की है। माता-पिता कई वर्ष पहले चल बसे थे। तभी से मामा के पास रहती है। मामा के घर में उसके लिए रोटी-कपड़ा तो है, पर स्नेह नहीं मिलता। वह मिलता है बारबरा को विलियम फूल वाले से। विलियम भी अनाथ बारबरा से बहुत स्नेह करता है। जब विलियम किसी काम से कहीं जाता है, तो बारबरा ही स्टाल की देखभाल करती है। हमेशा की तरह उस रोज भी बारबरा दोपहर के समय विलियम के फ्लॉवर स्टाल पर आ पहुंची।

बारबरा को देखकर विलियम ने कहा-“मैं जरूरी काम से जा रहा हूं। जल्दी ही लौट आऊंगा।” विलियम चला गया। पलॉवर स्टाल पर ग्राहक आते-जाते रहे। लगभग सभी बारबरा को पहचानते थे। वह हंसती-मुसकराती, कुशलता से काम संभालती रही। तभी दो व्यक्ति स्टाल पर आए।

एक ने बारबरा को एक गुलदस्ता बनाकर देने को कहा। बारबरा फूलों को सजाने लगी। एकाएक बारबरा के हाथ थम गए। एक व्यक्ति दूसर से कह रहा था-‘इस विलियम को तो सबक सिखाकर ही रहूंगा।’

बारबरा का दिल तेजी से धड़कने लगा-‘तो ये लोग अंकल विलियम के दुश्मन हैं। उन पर हमला करने की सोच रहे हैं।” बारबरा ने कांपते हाथों से उन्हें गुलदस्ता पकड़ा दिया। पैसे चुकाकर दोनों चले, तो बारबरा खुद को न रोक सकी। उसने कुछ सोचा। फिर स्टाल से बाहर आकर उन दोनों आदमियों के पीछे-पीछे चल दी।

उसकी नजरें उन दोनों आदमियों की पीठ पर टिकी थी, जो विलियम के दुश्मन थे। आखिर में दोनों एक मकान में चले गए। बारबरा ने एक तरफ रुककर इधर-उधर देखा, तो उसे कुछ दूर एक सिपाही खड़ा दिखाई दे गया। बारबरा दौड़कर सिपाही के पास जा पहुंची। आंखें मिलते ही दोनों ने एक-दूसरे को पहचान लिया।

वह कांस्टेबल लुईस था जो बारबरा को अच्छी तरह पहचानता था। वह कई बार फूल खरीदने के लिए विलियम के पास आया करता था। बारबरा को अपने घर से इतनी दूर अकेली देखकर लुईस चौक तो बारबरा ने उसे पूरी घटना बता दी।

लुईस ने कहा-“बारबरा, अब तुम चिंता मत करो। ये दोनों चाहे जो भी हों, विलियम का बाल भी बांका नहीं कर पाएंगे।” अभी वह बारबरा से यह कह रहा था कि एक आदमी उस मकान के दरवाजे से बाहर निकला। उसने जल्दी-जल्दी इधर-उधर देखा और फिर अंदर घुस गया। उसे देखते ही लुईस चौंक पड़ा।

वह आदमी उग स्मिथ था, जो कुछ दिन पहले ही सजा काटकर जेल से बाहर आया था। बारबरा ने कहा-“अंकल, यही है वह आदमी, जिसे मैंने विलियम अंकल के बारे में बात करते सुना था।” अब लुईस को यह समझते देर न लगी कि मामला गड़बड़ लुईस ने कहा-“बारवरा, तुम वापस जाकर विलियम को सावधान रहने को कहो। तब तक मैं इन दोनों आदमियों पर नजर रखता हूं।”

बारबरा फ्लॉवर स्टाल की तरफ लौट चली। एक चौराहे पर बारबरा को घोड़ों की टापों की आवाजें सुनाई दी। लोग चिल्ला रहे थे-“बचो, हट जाओ, शायद घोड़ा पागल हो गया है। बारबरा बचने के लिए एक तरफ भागी, तो हड़बड़ी में पैर गड्ढे में फंस गया। वह गिरी और बेहोश हो गई।

कांस्टेबल लुईस ने इस बीच अपने दो और साथियों को बुला लिया था। अब वे उस मकान के आसपास छिपे खड़े थे। वह बदमाशों को रंगे हाथों पकड़ना चाहता था। मकान के बाहर इंतजार करते-करते लुईस को कई घंटे बीत गए। अब तक अंधेरा छा गया था। आखिर प्रतीक्षा की घड़ियां खत्म हुई।

स्मिथ अपने साथी के साथ दरवाजे से बाहर आया। फिर बातें करते हुए दोनों एक तरफ बढ़ चले। लुईस और उसके दोनों साथी सिपाही भी सावधानी से उनका पीछा कर रहे थे। एकाएक लुईस चौंक पड़ा। स्मिथ विलियम के फ्लॉवर स्टाल की तरफ नहीं जा रहा था। लुईस जानता था कि विलियम अपने फ्लॉवर स्टाल के पास ही एक कमरे में रहता था। तो क्या स्मिथ ने अपना प्रोग्राम बदल दिया था या बारबरा को सुनने में कुछ भ्रम हुआ था।

सुनसान रास्तों पर स्मिथ का पीछा करते हुए लुईस व उसके साथी सिपाही शहर की एक गरीव बस्ती में जा पहुंचे। स्मिथ और उसका साथी एक मकान के बाहर रुककर कुछ बातें करने लगे। लुईस ने अपने साथियों को संकेत किया, तो वे पेड़ों की आड़ लेते हुए धीर-धीरे आगे बढ़ चले। तभी उन्होंने स्मिथ के साथी को मकान का दरवाजा खटखटाते हुए देखा। अंदर से किसी ने पुकारा-“कौन?” ‘तुम्हारा पुराना दोस्त। जरा बाहर तो आओ, एक जरूरी बात है।’ स्मिथ के साथी ने कहा।

दरवाजा खुलने की आवाज हुई और एक आदमी खुले दरवाजे में खड़ा दिखाई दिया। “कौन, क्या बात है?”-उसने पूछा। जवाब में स्मिथ उसकी तरफ छुरा लेकर झपटा, पर लुईस ने झपट्टा मारकर स्मिथ का छुरे वाला हाथ मरोड़ दिया। छुरा जमीन पर गिर पड़ा। तब तक सिपाहियों ने स्मिथ के साथी को भी दबोच लिया।

लुईस ने स्मिथ से कहा-“मुझे जरा भी देर हो जाती, तो तुमने इस बेचारे का काम तमाम कर दिया था। “इसी विलियम की गवाही के कारण मैं जेल गया था। मैं आज इसे सबक सिखाने ही आया था, लेकिन…!” “लेकिन बीच में मैंने आकर तुम्हारा प्लान फेल कर दिया, क्यों।”-कहकर लुईस हंस पड़ा।

अब बारबरा से मिलना जरूरी था। लेकिन बारबरा भागते घोड़े की चपेट में आकर घायल हो गई थी। लुईस अस्पताल पहुंचा। वहां फूल वाला विलियम मौजूद था। लुईस ने विलियम को पूरी घटना बता दी। फिर कहा-“स्मिथ को विलियम की गवाही के कारण सजा मिली थी। वह उससे बदला लेना चाहता था। तुम्हारे स्टाल पर फूल खरीदते हुए उसने अपने साथी से विलियम का नाम लिया, तो बारबरा समझी कि वह तुम पर हमला करने की सोच रहा है। पर वह विलियम तुम नहीं, कोई दूसरा ही था। पर इतना तय है कि बारबरा के कहने पर अगर हमने स्मिथ का पीछान किया होता, तो स्मिथ ने दूसर विलियम को जरूर मार डाला होता। इस संयोग के कारण ही दूसर विलियम की जान बची है।’

सुनकर बारबरा हौले-से मुसकरा दी। बोली-“दूसरा आदमी इसीलिए बच गया न कि उसका नाम भी विलियम है। वाह ! ” सुनकर सब हंस पड़े।

प्यारे बच्चो- आपको ये Hindi kahani new कहानी कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ताकि हम आपके लिए इसी तरह की मजेदार कहानियाँ ले कर आ सके | 

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