Vocational education Meaning in Hindi | Types & Importance

Vocational education

From the Vedic period to the Brahmin and Buddhist period, religion, work, and salvation were recognized as major organs of education. The real development of ‘Earth’ was embedded in professional and technical development. Vocational education was not given much attention during the period of British colonial rule.

वैदिक काल से लेकर ब्राह्मण और बौद्ध काल तक धर्म, काम और मोक्ष को शिक्षा के प्रमुख अंगो के रूप में मान्यता प्रदान की गई थी। ‘अर्थ ‘ का वास्तविक विकास व्यावसायिक और प्राविधिक विकास में ही सन्निहित था। अंग्रेजों की परतंत्रता के काल में Vocational education (व्यवसायिक शिक्षा) पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया। 

Vocational education in India

The British government wanted to encourage the industries of England by not making industrial development here so that it could take the raw materials from here and bring the goods produced from there and sell it in the market here. This led to the second exploitation of India.

अंग्रेजी सरकार यहां औधोगिक विकास ना करके इंग्लैंड के उद्योगों को प्रोत्साहित करना चाहती थी, ताकि वह कच्चा माल यहां से ले जाकर वहां से उत्पादित माल ला सके और यहां के बाजार में उसे बेच सकें। इससे भारत का दूसरा शोषण हो रहा था। 

The government did not want to see India as self-supporting. He feared that if India became strong from the technical point of view, the goods produced in Britain would not be sold in India and it would not be able to get raw materials here either.

सरकार भारत को स्वावलंबी नहीं देखना चाहती थी। उसे भय था कि यदि भारत तकनीकी नजर से सशक्त हो गया तो ब्रिटेन में उत्पादित माल भारत में नहीं बिकेगा और उसे यहां पर कच्चा माल भी नहीं मिल पाएगा। 

Importance of vocational education

As a result, in the absence of vocational education, India had to rely on the technical support of other countries. Self-reliance in the technical field cannot be achieved even by taking loans from all over the world. There is a substantial depreciation of the nation’s currency due to excessive dependence on others. Therefore, the development of vocational education is the first requirement for the advancement of the nation.

परिणामस्वरूप व्यावसायिक शिक्षा के अभाव में भारत को अन्य देशों के प्राविधिक सहयोग पर निर्भर रहना पड़ा। विश्व भर से ऋण लेकर भी तकनीकी क्षेत्र मेंआत्मनिर्भरता प्राप्त नहीं किया जा सकता। दूसरों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण राष्ट्र की मुद्रा का पर्याप्त ह्रास होता है। इसलिए व्यावसायिक शिक्षा का विकास राष्ट्र की उन्नति की पहली आवश्यकता है।

All-around development of a person can also be done by the development of technical and vocational education. His physical, mental, intellectual, spiritual, and economic development is dependent on technical education.

व्यक्ति का सर्वांगीण विकास भी तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के विकास द्वारा ही किया जा सकता है। उसका शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आत्मिक एवं आर्थिक विकास तकनीकी शिक्षा पर आश्रित है।

Vocational education is able to fully illustrate the utility of education and its objectives. In fact, vocational education has evolved to honorable perfection.

व्यावसायिक शिक्षा, शिक्षा की उपयोगिता और उसके उद्देश्यों को पूरी तरह से स्पष्ट करने में सक्षम है। वास्तव में व्यावसायिक शिक्षा का विकास माननीय पूर्णता के लिए हुआ है। 

Vocational Education Objective

  1. All-round development of personality ( व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास )
  2. Preparation for life ( जीवन की तैयारी )
  3. Knowledge correlates with life ( ज्ञान का जीवन से सहसंबंध )
  4. Business and economic development ( व्यावसायिक तथा आर्थिक विकास )
  5. National Development and Vocational Education ( राष्ट्रीय विकास और व्यावसायिक शिक्षा )

All-round development of personality: – A person’s personality is considered complete only when it has the capacity to develop in all areas of life. If a person falls behind in any area of ​​life, then his personality cannot be considered complete. Vocational education provides an opportunity for the individual to develop in every sphere of life. Learning a business builds confidence. It instills the power of self-reliance.

व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास :- व्यक्ति के व्यक्तित्व को तभी पूर्ण माना जाता है, जब उसमें जीवन के सभी क्षेत्रों में विकास करने की क्षमता उत्पन्न हो जाती है। यदि व्यक्ति जीवन के किसी क्षेत्र में पिछड़ जाता है तो उसका व्यक्तित्व पूर्ण नहीं माना जा सकता। व्यावसायिक शिक्षा व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विकसित होने का अवसर प्रदान करती है। किसी व्यवसाय को सीखने पर आत्मविश्वास उत्पन्न होता है। उसमें आत्मनिर्भरता की शक्ति पैदा होती है।

Preparation for life: – Through vocational education, youth get ready for future life. They also acquire the ability, skill, and means to obtain the means to live for themselves and their families.

जीवन की तैयारी :-  व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से युवक भावी जीवन के लिए तैयार होते है। वे अपने तथा अपने परिवार के जीवनयापन के लिए योग्यता, कुशलता और साधन प्राप्त करने की कुशलता भी प्राप्त करते है।

Knowledge correlates with life: – Knowledge that does not become a part of life is meaningless and discarded. When that knowledge becomes a part of life, then it takes practical form. The same knowledge becomes a part of life, which is based on experiences. Knowledge gained from vocational education is a part of life due to its reliance on experiences.

ज्ञान का जीवन से सहसंबंध :- जो ज्ञान जीवन का अंग नहीं बनता, वह निरर्थक और त्याज्य है। जब वह ज्ञान जीवन का अंग बन जाता है, तब वह व्यावहारिक रूप धारण कर लेता है। वही ज्ञान जीवन का अंग बनता है, जो स्वानुभवों पर आधारित होता है। व्यावसायिक शिक्षा से प्राप्त ज्ञान स्वानुभवों पर टिका होने के कारण जीवन का अंग बन जाता है।

Professional and Economic Development: – After getting an education, a person can adopt a business and accumulate amenities to lead a good life, this ability should be generated through education. It is the duty of every educated person to be self-reliant and to upgrade their level.

व्यावसायिक तथा आर्थिक विकास :- शिक्षा प्राप्त करने के उपरान्त कोई व्यक्ति किसी व्यवसाय को अपना सके तथा उत्तम जीवन व्यतीत करने के लिए सुख-सुविधाओं का संचय कर सके, यह सामर्थ्य शिक्षा द्वारा उत्पन्न की जानी चाहिए। स्वावलंबी बनना और अपने स्तर को उन्नत बनाना प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति का कर्त्तव्य है।

National Development and Vocational Education: – Vocational education also generates a view to using the available resources of the nation, natural resources in a judicious manner. If our country produces its own daily use items, then it saves national currency, increases economic prosperity. Vocational education empowers us with this vision.

राष्ट्रीय विकास और व्यावसायिक शिक्षा :- व्यावसायिक शिक्षा राष्ट्र के उपलब्ध साधनो, प्राकृतिक संसाधनों को विवेकपूर्ण विधि से उपयोग में लाने का दृष्टिकोण भी उत्पन्न करती है। यदि हमारा देश दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं को स्वयं तैयार कर लेता है, तो इससे राष्ट्रीय मुद्रा की बचत होती है, आर्थिक समृद्धि बढ़ती है। व्यावसायिक शिक्षा इस दृष्टि से हमें सशक्त बनाती है।

Commercialization of education

Even after 58 years of the country’s independence, our country’s education system remains the same as it was during British rule. Today’s educated youth suffer from the problem of unemployment. Their education is neither benefiting them nor society. The reason for this is that our education has not yet been commercialized. If vocational education is provided at the secondary level, then the problem of unemployment can definitely be solved.

देश की स्वतंत्रता के 58 वर्ष बाद भी हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था वैसी ही बनी हुई है, जैसी वह अंग्रेजी शासन काल में थी। आज के शिक्षित युवक बेरोजगारी की समस्या से ग्रस्त है। उनकी शिक्षा न तो उन्हें और न ही समाज को कोई लाभ पहुँचा रही है। इसका कारण यह है कि अभी तक हमारी शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं किया गया है। यदि माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्था कर दी जाए तो निश्चित ही बेरोजगारी की समस्या का हल निकल सकता है।

The improper labor-related approach in vocational education

The history of the world’s progressive nations testifies that a major reason for the economic development of those countries is due to their reverence for labor and their perseverance. No nation can progress unless it has the intention to do manual labor with a proper attitude towards WoW labor. The said approach is particularly impeded in the development of vocational and technical education. Vocational education cannot progress until an inappropriate approach is overcome.

विश्व के प्रगतिशील राष्ट्रों का इतिहास इस बात का साक्षी है कि उन देशों के आर्थिक विकास का एक बड़ा कारण श्रम के प्रति श्रद्धा और उनका अध्यवसाय भी है। कोई राष्ट्र तब तक उन्नति नहीं कर सकता जब तक वाह श्रम के प्रति समुचित दृष्टिकोण रखकर शारीरिक श्रम करने के लिए उद्धत ना हो। व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा के विकास में उक्त दृष्टिकोण विशेष रूप से बाधक हैं।  जब तक अनुचित दृष्टिकोण दूर नहीं होगा तब तक व्यावसायिक शिक्षा में प्रगति नहीं हो सकती हैं। 

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2 thoughts on “Vocational education Meaning in Hindi | Types & Importance”

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