William Shakespeare story || विलियम शेक्सपियर की कहानी

प्यारे बच्चो , आज मैं आपके लिए William Shakespeare story की कहानी बताने जा रहा हूँ की कैसे घोड़ों को देख भाल करने वाला लड़का विश्व-विख्यात नाटककार बन गया। 

विलियम शेक्सपियर

बात इंग्लैंड की है और आज से चार सौ साल पहले की है। जॉन नाम का एक आदमी इंग्लैंड के एक कस्बे में रहता था। उस कस्बे का नाम था स्ट्रैटफर्ड। जॉन वहाँ अनाज और चमड़े का व्यापार करता था। थोड़ी सी आमदनी थी जिससे बड़ी कठिनता से परिवार का गुजारा होता था। 

जॉन की पत्नी का नाम था मैरी. जॉन और मैरी दोनों अनपढ़ थे। उनके आठ बच्चे थे। वह जमाना था जब अधिक बच्चे होना अच्छा समझा जाता था। जॉन के आठ बच्चों में चार लड़के थे और चार लड़कियाँ। जॉन चाहता था कि उसके बच्चे माता पिता के समान अनपढ़ न रहें; किन्तु उसके बच्चों में तीसरे नम्बर पर विलियम नामक लड़के ने ही पढ़ने में रुचि दिखाई। 

विलियम को कस्बे के एक छोटे से स्कूल में भेजा गया। अध्यापक उसे प्यार से विल कहते थे. विल पढ़ने में बहुत अच्छा था लेकिन वह स्कूल में केवल बारह वर्ष की आयु तक ही पढ़ सका क्योंकि जॉन का व्यापार मन्दा हो गया और वह विल की पढ़ाई का खर्च सहन न कर सका।  

अब विल अपने पिता के साथ मिलकर काम करने लगा। इस प्रकार लगभग सात वर्ष तक उसने जॉन के धन्धों में सहयोग दिया और ज्यों त्यों घर का खर्च चलाया। बीस वर्ष की आयु में विल की शादी कर दी गई। उसकी पत्नी का नाम एनी था और वह विल से आठ साल बड़ी थी।

अब विल ने पहली बार अनुभव किया कि उसे कोई नौकरी ढूँढ़नी चाहिए। इसलिए एक दिन वह लन्दन चला गया’ विल चलता फिरता एक थियेटर के सामने पहुँचा , वहाँ लोग अपने घोड़ों पर चढ़कर थियेटर देखने पहुंचा करते थे। 

उन दिनों सिनेमा का आविष्कार तो हुआ नहीं था। विल को थियेटर के बाहर घोड़ों की देखभाल का काम मिल गया। इस प्रकार उसे कुछ रोजी का साधन मिल गया। धीरे-धीरे विल की थियेटर के स्वामी से जान पहचान हुई।  विल को अभिनय का शौक था। थियेटर के स्वामी ने उसे अभिनय करने का अवसर भी दिया।  वह विल की योग्यता से प्रभावित हो गया। 

एक दिन उसने विल को ड्रामा की स्क्रिप्ट देकर कहा इसे पढ़कर ठीक कर लाओ. विल को यह सब बहुत अच्छा लगा उसने काफी मेहनत से स्क्रिप्ट का संशोधन किया। थियेटर के स्वामी ने उसे ऐसे कई स्क्रिप्ट दिये तथा विल ने बड़ी योग्यता से उनका सम्पादन किया। 

एक दिन बिल के अन्दर से आवाज़ आई-“तुम ड्रामा लिख भी तो सकते हो” तब वह सत्ताइस वर्ष का था। उसने एक ड्रामा लिखा जिसका नाम उसने “ हैनरी द फोर्थ ” रखा। इसके बाद तो उसने अंग्रेजी में अनेक नाटक लिखे।  हर वर्ष वह एक नाटक लिख देता। उस नाटक का अभिनय थियेटर कम्पनियाँ करतीं। इस प्रकार नाटककार के रूप में बिल शीघ्र ही सर्वप्रिय हो गया। 

महारानी एलिजाबेथ ने भी उसके नाटकों की बहुत प्रशंसा की विल ने कुल मैतीस नाटक लिखे, वह एक बहुत अच्छा कवि भी थी। उसने दो बहुत लम्बी कविताएं भी लिखी 154 सोनेट (Sonnet) लिखे. सोनेट चौदह पंक्तियों की एक विशेष प्रकार की कविता होती है। उसके नाटकों में
कुछ कामेडीस हैं और कुछ ट्रेजडोज , अब तो इन नाटकों का अनुवाद कई भाषाओं में हो चुका है।

विल के लगभग सभी नाटकों का फिल्मीकरण भी हो चुका है। आपने ‘उसका “हेमलट” नाम का नाटक तो देखा या पढ़ा होगा। अब तो आप समझ गये होंगे कि विल का पूरा नाम था बिलियम शैक्स्पियर। 

प्यारे बच्चो , आप सभी को William Shakespeare story कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ताकि हम आपके लिए इसी तरह की कहानी ले कर दुबारा आ सके – धन्यवाद 

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