Bal Kathayen Bacho ki | Hindi Katha | हजामत

प्यारे बच्चो, आज हम आपके लिए bal kathayen ले कर आये है जिसे पढ़ कर आप सभी हँस-हँस के लोट्पोट हो जाओगे | 

हजामत 

त्तर प्रदेश के एक गाँव की बात है। उस गाँव में एक नाई रहता था। वह बड़ा धूर्त और बातूनी था। वह अपने को चालाक भी खूब समझता था,और अपनी चालाकी से लोगों को खूब बेवकूफ बनाता था । गाँव के जमींदार ने एक बार उसे हजामत करने को बुलाया । नाई आया और हजामत करने से पहले हाथ जोड़ कर पूछा – हजूर मेहतनताना क्या मिलेगा? “जमींदार बोला – “तुम फिक्र मत करो । कुछ देंगे ।” नाई ने हजामत बना दी।जमींदार ने एक सौ रुपये का नोट-निकाल कर दिया – “यह लो तुम्हारी मेहनत ।”

 

नाई बोला – “नहीं महाराज -आपने तो कहा था ‘कुछ’ देंगे।” “ओह ! अच्छा तो यह लो दो सौ रुपये ।” “नहीं महाराज ‘कुछ’ दीजिये।” “अरे कुछ और कितना होता- “आपने ही तो कहा था ‘कुछ’ -देंगे । अब ‘कुछ ही दीजिये ।” “अरे बुद्ध । हमारा मतलब “था कि तुम्हें खुश कर देंगे ।” “नहीं हजूर आपने यह तो नहीं कहा । आपने कहा था कि ‘कुछ’ देंगे । तुम फिक्र मत करो ।

खुश ही करना है तो ‘कुछ दीजिये । -न देना हो तो कह दीजिये भाग जा ।” मगर जमींदार उसे भगा नहीं सकता था । वह जानता था कि यह नाई बड़ा बातूनी और काइयां है । अगर इसे भगा दिया तो सब जगह मेरी चुगलियाँ करता रहेगा कि मैंने इसके पैसे मार लिए, उसे किसी तरह टालने के लिये उसने पांच सौ का नोट निकाला ।
मगर नाई ‘कुछ’ ही लेने पर अड़ा रहा । जमींदार ने पैसे बढ़ाकर सात सौ रुपये कर दिये । फिर भी – नाई ने नहीं लिए । वह तो ‘कुछ’ ही लेगा ।

असल में नाई सोच रहा था कि जमींदार अब फंसा हुआ है । भगा तो सकता नहीं, तंग आकर जब एक हज़ाररुपया देगा तो मान जाऊँगा। पर जमींदार समझ ही नहीं पा रहा था कि ‘कुछ’ क्या होता है । उसने समझ लिया था कि नाई पैसे नहीं चाहता है । कुछ और चाहता है । अब वह सोचने लगा कि इससे पिण्ड कैसे छुड़ाया- जाये ।

 इतने में जमींदार का छोटा – बेटा वहाँआया । पिता को परेशान देखकर उसने कारण पूछा ।
– सारी घटना जानकर वह नाई से- बोला – “पहले थोड़ा गुड़ खा लो और लस्सी पी लो फिर-तुम्हें ‘कुछ भी देंगे ।”वह अंदर गया और थोड़ा गुड़,एक लोटे में लस्सी और हाथ में बकरी की एक मेंगनी लेकर बाहर आया, गुड़ उसने नाई को दे दिया ।

नाई ने गुड़ खाया । और गिलास से लस्सी पीने लगा। जमींदार के बेटे ने लस्सी उसकी गिलास में डालते हुए धीरे से बकरी की मैंगनी उसकी गिलास में गिरा नाई के होठों के बीच मैंगनी आकर फंसी तो वह बोला-“ठहरिये,छोटे साहब! कुछ है।” “बस अब कुछ मिल गया? अब चले जाओ ” लड़का चिल्लाया नाई मेंगनी निकाल कर कहा।– “नहीं हजूर यह तो बकरी की मेंगनी है ।”

– “हम नहीं जानते क्या है ।। अभी तुमने खुद ही कहा था, कि ‘कुछ’ है । तुम ‘कुछ’ माँग रहे थे तुम्हें ‘कुछ मिल गया ।चलो भागोअब ।” जमींदार ने कहा । नाई खूब गिड़गिड़ाया । मगर– उसने एक बात न सुनी और उसे भगा-दिया । 

प्यारे बच्चो, आप सभी को bal kathayen कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ताकि हम आपके लिए इसी तरह की bal kathayen ले कर आ सकें – धन्यवाद 

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