Best hindi stories | बादलो की शहज़ादी – Myriadstory

प्यारे बच्चो , आज मैं आपके लिए best hindi stories की ऐसी कहानी ले कर आया हूँ जिसे पढ़कर आप सभी बच्चो को जापान की सदियों से चली आ रही परम्परा का पता चलेगा। ये कहानी www.myriadstory.com की best hindi stories में से एक है।

बादलो की शहज़ादी 

जापान के बड़े-बूढ़े कहते हैं कि पुराने ज़माने में धरती से बहुत दूर आकाश पर एक बादशाह रहता था, जो आकाश पर टाँकने के लिए सितारे बनाया करता था। उस बादशाह की एक बेटी थी जो बड़ी प्यारी और खूबसूरत थी। वह रेशम कातने वाली शहज़ादी कहलाती थी। शहज़ादी दिन भर रेशम कातती और फिर उस रेशम से कपड़ा बुनती। यह कपड़ा बहुत बारीक, हल्का और मुलायम होता था। बादशाह उस कपड़े को सितारों के बीच लटका देता था। यह वही कपड़ा है जो अब बादलों के रूप में नज़र आता है।

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एक दिन बादशाह ने देखा कि शहज़ादी का रंग पीला पड़ता जा रहा है। उसने शहज़ादी से कहा, “तुमने बहुत मेहनत की है, इसलिए थक गई हो। कल तुम्हें छुट्टी करनी चाहिए ताकि कुछ आराम मिले। जाओ और सारा दिन सितारों से खेलो, लेकिन शीघ्र वापिस आ जाना और मेरा हाथ बँटाना। अभी मुझे बहुत से बादल बनाने हैं।”

शहज़ादी यह सुनकर बहुत खुश हुई। कई बार उसका जी चाहा था कि वह छुट्टी करे और उस नदी की सैर करे जो आकाश गंगा कहलाती है और आकाश के बीचों-बीच बहती है। किंतु कभी उसे इसका अवसर नहीं मिला था।

शहज़ादी ने अपने सबसे अच्छे कपड़े पहने और सितारों के बीच दौड़ती हुई आकाश गंगा के किनारे जा पहुँची। वहाँ क्या देखती है कि नदी के ठीक बीच एक खूबसूरत लड़का अपनी प्यारी-प्यारी गाय को नहला रहा था। लड़के ने शहज़ादी को देखकर कहा, “कौन हो तुम?” शहज़ादी ने उत्तर दिया, “मैं आकाश के बादशाह की बेटी हूँ। लोग मुझे रेशम कातने वाली शहज़ादी कहते हैं।

यह सुनकर लड़के ने कहा, “मैं बादशाह की गायों का चरवाहा हूँ। आकाश गंगा के उस पार रहता हूँ। आओ मैं तुम्हें अपने घर ले चलूँ। हम दोनों वहाँ मिल कर खेलेंगे।”
चरवाहे ने शहज़ादी को गाय की पीठ पर बिठा दिया और उसे नदी पार अपने घर ले गया। वहाँ शहज़ादी चरवाहे के साथ खेलती रही। खेल इतना अच्छा और रोचक था कि शहज़ादी को यह ख्याल ही न रहा कि उसे घर वापिस जाना है। जब शहज़ादी वापिस न आई तो बहुत चिंता हुई। उसने एक पक्षी को भेजा कि शहज़ादी को तलाश करें और उसे वापिस लाये।

पक्षी शहज़ादी को तलाश करता-करता चरवाहे के घर जा पहुँचा। वहाँ शहज़ादी और चरवाहा बहुत मज़े में खेल रहे थे। पक्षी ने शहजादी को घर वापिस चलने के लिए कहा किंतु शहज़ादी खेल में कुछ ऐसी मग्न थी कि उसने पक्षी की बात सुनी ही नहीं। पक्षी वापिस आ गया। आख़िर बादशाह स्वयं गया और शहजादी को वापिस घर लाया। बादशाह शहज़ादी पर बहुत गुस्सा हुआ और बोला, “तुम बहुत बुरी लड़की हो। ज़रा आसमान की तरफ देखो। अभी कितना काम पड़ा है। अब तुम्हें कोई छुट्टी नहीं मिलेगी। तुम्हें हर वक्त यहाँ रहना होगा और बराबर काम करना होगा।”

इसके बाद बादशाह ने आकाश गंगा में सितारों का बहुत-सा पानी डाल दिया। पहले इस नदी में थोड़ा-सा पानी होता था और शहज़ादी इसमें से गुज़र कर चरवाहे के घर जा सकती थी, किंतु अब यह एक बहुत बड़ी नदी बन गई। नदी के एक किनारे पर शहज़ादी थी और दूसरे किनारे पर चरवाहा। ऐसा कोई रास्ता नहीं था कि वो एक-दूसरे के पास आ सकते। शहज़ादी अपने घर में कपड़ा बुनने की मशीन के सामने बैठ गई लेकिन अब वह बहुत उदास थी। उसका दिल चरवाहे से मिलने और उसके साथ खेलने को चाह रहा था। उसने काम नहीं किया। बस बैठी आँसू बहाती रही और आसमान बादलों से खाली होता चला गया।

आखिर एक दिन बादशाह ने शहज़ादी से कहा, “मेरी नन्ही शहज़ादी, मुझे आसमान के लिए बहुत से बादलों की जरूरत है। अगर तुम मेहनत करो और बहुत-सा कपड़ा तैयार कर दो, तो मैं तुम्हें साल में एक बार छुट्टी करने की आज्ञा दे दूंगा। फिर तुम चरवाहे के पास जाकर खेल सकती हो।’

शहज़ादी यह सुनकर खुश हुई और उसी वक्त काम करने बैठ गई। तब से वह बराबर अपना काम करती रहती है। लेकिन साल में एक बार, सातवें महीने की सातवीं रात को, बादशाह शहज़ादी को छुट्टी दे देता है । वह बहुत से पक्षियों को आकाश गंगा पर भेज देता है। यह पक्षी अपने परों से नदी पर एक पुल बना देते हैं और शहज़ादी उस पुल से गुज़र कर नदी पार करती है।

वह नदी पार करके वहाँ जाती है जहाँ चरवाहा उसका इंतज़ार कर रहा होता है। वो एक दिन और एक रात खूब मज़े से खेलते हैं। जापानी बच्चे इसी कारण से सातवें महीने के सातवें दिन छुट्टी करते हैं। इस दिन वो लंबे-लंबे बाँसों को रंग-बिरंगे काग़ज़ों से सजाते हैं और उन्हें आसमान की तरफ लहराते हैं। इस प्रकार वह बादशाह को शहज़ादी के साथ किया हुआ वादा याद दिलाते हैं।

 

प्यारे बच्चो , आप सभी को best hindi stories कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ताकि मैं आपके लिए इसी तरह best hindi stories  आता रहुँ – धन्यवाद 

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