Child story in hindi // गहनों की चोरी { पंचतंत्र की कहानी }

प्यारे बच्चो , आज हम आपके लिए child story in hindi ले कर आये हैं और मुझे पूरी उम्मीद है की आप सभी को child story in hindi बेहद पसंद आएगी | 

गहनों की चोरी

रितवन में लुटेरों की बन आई थी,जानवर परेशान थे. दिनदहाड़े सोने के हार, चेन झपट लिए जाते. अपराधी भाग जाते, पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाती. जानवरों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया था,उन्हीं दिनों की बात है, मिस रैबिट की सगाई हुई थी. उस के मंगेतर ने एक कीमती हार उसे तोहफे में दिया. दूसरे दिन वह उसे कॉलेज में पहन कर चली गई. जिस ने भी देखा, तारीफ किए बिना नहीं रहा. लेकिन
कॉलेज से लौटते समय जब वह ‘जंगल बस’ में चढ़ रही थी, भीड़ में किसी ने उस का हार झपट लिया| 

 

इधर बस चल पड़ी उधर लुटेरा गायब हो गया. मिस रैबिट ने शोर भी मचाया, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी. उस दिन तो हद ही हो गई.
सुंदरवन से मिस्टर और मिसेज लायन आए थे. साथ में थी, राजकुमारी लायना. वे महाराज सिंहदेव के निजी मेहमान थे. पर महाराज को उन के आने की खबर नहीं थी. इसलिए उन की अगवानी के लिए वे स्टेशन नहीं आ पाए |

 

वे ‘वनांचल एक्सप्रेस’ से हरितवन पहुंचे. लेकिन स्टेशन पर ही लुटेरों की चपेट में आ गए. लुटेरों ने राजकुमारी लायना के गले से हीरों जड़ा नेकलेस झटक लिया. मिस्टर लायन देखते ही रह गए. वह बदमाशों को पकड़ पाते, इस से पहले ही वे रफूचक्कर हो गए. राजमहल पहुंचने पर महाराज सिंहदेव को इस बात का पता चला. सुन कर उन की गरदन शर्म से झुक गई. हरितवन के लिए यह बेइज्जती की बात थी|

 

__महाराज गुस्से से लालपीले हो गए. उन्होंने कोतवाल चीता सिंह को बुलवाया. उन्हें राजकुमारी के नेकलेस वाली घटना बताई. वन की चौपट हो रही कानूनव्यवस्था की हालत के लिए बहुत डांटा, साथ ही आदेश दिया कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ा जाए, यदि 15 दिनों में ऐसा नहीं हुआ तो उसे ही सजा दी जाएगी|

 

_महाराज की धमकी से कोतवाल चीतासिंह बहुत डर गए. नौकरी से निकाले जाने का खतरा सिर पर मंडरा रहा था. कोतवाल ने वन में पुलिस गश्त और बढ़ा दी. फिर भी इस तरह की घटनाएं बंद नहीं हुई. न बदमाश पकड़ में आए और न ही नेकलेस बरामद हो पाया. उन्हीं दिनों हरितवन में एक और मामला सामने आया|  वहाँ के तहसीलदार का नाम घटिया भालू था. वह अव्वल दरजे का बेईमान व रिश्वतखोर था. रिश्वत के बिना किसी का कोई काम नहीं करता था. महाराज सिंहदेव को भी इस बात की खबर थी. उन्होंने महामंत्री गजराज से इस बारे में बात की.
गजराज ने घटिया भालू को पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया. कालू बंदर बहुत दिनों से तहसील के चक्कर लगा रहा था.महामंत्री ने गुपचुप तरीके से उसे बुलवाया. उस से उस के काम के बारे में पूछा. उस ने बताया, “हुजूर, मेरे पिता मर गए हैं. मैं उन की जमीन अपने नाम करवाना चाहता हूँ, तहसीलदारजी!

 एक साल से मुझे चक्कर लगवा रहे हैं. इस काम के लिए उन्होंने 5 हजार रुपए की रिश्वत मांगी है. मैं ठहरा एक गरीब बंदर. भला, 5 हजार रुपए कहां से लाऊं.” महामंत्री गजराज ने उस से कहा कि तुम्हारा काम हो जाएगा. गजराज जी बोले , “मैं तुम्हे जैसा करने को कहूँ , वैसा करते जाओ,” इस के बाद उन्होंने उसे एक योजना समझाई. तहसीलदार को रंगे हाथों पकड़वाने का वह एक जाल था. इस के लिए कालू बंदर मान गया|

 

__योजना सफल रही. तहसीलदार घटिया भालू को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड लिया गया. दसरे दिन यह खबर ‘हरिया वन टाइम्स’ में छपी. सब बेहद खुश थे. आखिर, रिश्वतखोर तहसीलदार को पकड़ लिया गया था. सब जानवर चाहते थे कि किसी तरह गहने झपटने वाले बदमाशों को भी पकड़ लिया जाए|

 

_ चीता सिंह के बेटे का नाम ‘ मास्टर टाइगर ‘ था. वह जानता था कि उस के पिता बहुत परेशान हैं. उस ने भी तहसीलदार वाली खबर पढ़ी. उसे लगा कि इसी तरह दूसरे अपराधियों को भी पकड़ा जा सकता है. पर वह पहले रंगे हाथों पकड़े जाने का तरीका जान लेना चाहता था. उस ने पूछा, “पापा, रंगे हाथों किस तरह पकड़ा जाता है |

 

_पिता ने समझाया कि रिश्वत में दिए जाने वाले रुपयों पर पुलिस खास तरह का पाउडर लगा देती है. रिश्वत देने वाला पाउडर लगे रुपए रिश्वत लेने वाले को दे देता है. रिश्वत देते ही वह इशारा करता है. पुलिस वहां पहले से छिपी होती है, जो रिश्वत देने वाले का इशारा मिलते ही रिश्वत लेने वाले को पकड़ लेती है,“पर इसे रंगे हाथों पकड़ना क्यों कहते हैं,” मास्टर टाइगर ने पूछा| पिताजी ने कहा, “वह इसलिए कि उन नोटों पर पाउडर तो लगा हुआ होता ही है. रुपए लेते व रखते समय वह रिश्वत लेने वाले के हाथों व जेब पर भी लग जाता है. जब उस की जेब व हाथों को धुलवाया जाता है तो पाउडर की वजह से पानी लगते ही वे लाल हो जाते हैं. यही रिश्वत लेने का सुबूत होता__ “अगर ऐसी बात है तो पापा आप का मसला भी आसानी से सुलझ सकता है,” मास्टर टाइगर ने चुटकी बजाते हुए कहा. इस के बाद उस ने पिता को एक योजना बताई. सुन कर कोतवाल साहब चौंके ! –टाइगर की बात में दम था. बस, तनिक फेरबदल किया जाना जरूरी था. साथ ही उस के लिए सही मौके की भी जरूरत थी. उसा ने बेटे से कहा कि इस बारे में वह किसी को कुछ न बताए, कुछ ही दिनों में ऐसा मौका भी आ गया. मौका था, हरितवन में हर साल लगने वाला मेला. इस मेले में आसपास के वनों से भी जानवर आते थे. वे सजधज कर डस में हिस्सालेते. नए कपड़े व गहने पहने जाते. नाचगाने की धूम रहती. चारों ओर हंसीखुशी छा जाती|

 

कोतवाल ने दूसरे अफसरों के साथ मीटिंग की. उन्हें मास्टर टाइगर वाली योजना की जानकारी दी. बात सब को पसंद आई. पर वे उस में कुछ बदलाव चाहते थे. उनका कहना था कि लुटेरे बहुत चालाक हैं. उन्हें हर हाल में पकड़ना है. इसलिए एहतियाती तौर पर हमें कैमरे व कंप्यूटर का भी इस्तेमाल करना चाहिए ताकि वे बच न पाएं. उन की राय को भी मान लिया गया. वन में मेले को ले कर बड़ा जोश था. पर एक अनजाना
डर भी था, वही गहनों की छीनाझपटी का. इस के बावजूद मेले में अच्छी भीड़ जुटी थी. हमेशा की तरह जोरशोर से जश्न मनाया गया. उधर लुटेरों के लिए भी यह सुनहरा मौका था|

 

पुलिस ने मेले में ‘क्लोज सर्किट कैमरे’ लगाए. उन से कंट्रोल रूम में सबकुछ देखा जा सकता था. इस वजह से मेले में ज्यादा पुलिस तैनात नहीं की गई. हाँ, मादा पुलिसकर्मियों को सुंदर लेकिन नकली गहने पहनाए गए थे. वे सब सादे कपड़ों में थीं, जैसे मेला देखने आई हों. दिखने में लापरवाह सी लग रहीं थीं पर बेहद चौकन्नी थीं. इन बातों की खबर किसी को भी नहीं थी. बदमाशों को इस से अच्छा मौका और कब मिलता.
उन्होंने मादा पुलिसकर्मियों के गहनों पर हाथ साफ करना शुरू कर दिया. उन गहनों पर हाथ रंगने वाला पाउडर लगा हुआ था. उधर क्लोज सर्किट कैमरों से भी वे बच नहीं पाए |

 

कंट्रोल रूम को उन की हरकतों का पता लग रहा था. कंप्यूटर की मदद से  उन के फोटो निकाल लिए गए. ये थे गहने उड़ाने के खिलाफ पक्के सुबूत. मेले से बाहर जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था. ज्यों ही वे जाने लगे, पुलिस ने उन्हें रोक लिया. तलाशी में उन से गहने बरामद हुए. सब के सामने उन के हाथ धुलवाए गए.पानी लगते ही वे लाल रंग में रंग गए. बदमाशों ने सपने में भी न सोचा था कि वे इस तरह रंगे हाथों पकड़े जाएंगे| _एक साथ सभी लुटेरों को पकड़ लिया गया. लुटेरों का सरदार लालू लकड़बग्घा था. वह शातिर बदमाश था. उस से राजकुमारी लायना का नेकलेस व दूसरे गहने भी बरामद किए गए. इस के बाद हरितवन से लुटेरों का डर खत्म हो गया| कोतवाल चीतासिंह ने राहत की सांस ली. पर यह सब हो पाया, मास्टर टाइगर के मास्टर माइंड की वजह से| 

 

प्यारे बच्चो, आप सभी को ये child story in hindi कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ताकि हम आपके लिए इसी तरह की मज़ेदार child story in hindi ले कर आ सके – धन्यवाद 

 

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