Gandhi Jayanti Celebration Stories, poems, and images 2021

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Gandhi Jayanti 2021

गांधीजी  को बच्चे बहुत प्यारे थे और बच्चों को अपने प्यारे बापू बहुत प्यारे थे। एक दिन गांधीजी ढेर सारे बच्चों के बीच में बैठे थे। तभी एक बच्चा बोल पड़ा, “बापू, आप कुर्ता क्यों नहीं पहनते ?”

बेटा, मेरे पास कुर्ता खरीदने के लिए पैसे ही कहाँ हैं?” कहकर बापू उस मासूम बच्चे के चेहरे पर आए…परेशानी के भावों को पढ़ने लगे।

” बापू के पास कुर्ता खरीदने को पैसे नहीं हैं। बापू हम सबको, देश को इतना प्यार करते हैं। हमें भी तो बापू के लिए कुछ करना चाहिए। मेरी माँ सिलाई करती है। एक दिन में ढेरों कपड़े सी लेती है। मैं माँ से कहूँगा तो वह जरूर एक कुर्ता बापू के लिए सी देंगी। हाँ, मैं कल ही बापू के लिए एक कुर्ता सिलवाकर लाऊँगा।”

ऐसा सोचकर वह बच्चा दया से भर गया और दुःखी होकर बापू से बोला, “बापू, आप परेशान न हों। मेरी माँ भी गरीब है। वह सिलाई करके घर में खाने-पीने का सामान लाती है। दिन भर में ढेरों कपड़े सी लेती है। मैं माँ से कहूँगा कि बापू के पास कुर्ता नहीं है और सिलवाने को पैसे भी नहीं हैं, तो वह जरूर आपके लिए एक कुर्ता सी देगी।”

बच्चे की मासूम बातों ने गांधीजी के दिल को छू लिया। वे हँसकर बच्चे से बोले, “अच्छा, यह बताओ, तुम्हारी माँ कितने कुर्ते सिल सकती हैं ?”
बच्चा बोला, “बापू, आप जितने कुर्ते चाहें, वह सी देगी। एक-दो-तीन, जितने आप कहोगे उतने।”

बापू बोले, “कुर्ते तो मुझे चाहिए। मेरा परिवार बहुत बड़ा है। तुम्हीं बताओ, क्या यह अच्छा लगेगा कि मैं ही शरीर पर कुर्ता डालूँ और मेरे बाकी परिवार वाले ऐसे ही रहें?”
लड़का बोला, “ठीक है, आपके परिवार में जितने लोग हैं, मैं सबके लिए माँ से कहकर कुर्ते सिलवा दूंगा।”
बापू बोले, “बेटा, मेरे परिवार में 40 करोड़ मेरे भाई-बहन हैं । जब तक मेरे भाई-बहन के पास कुर्ता नहीं होगा, तुम्हीं कहो, मैं कुर्ता कैसे पहन सकता हूँ? या तुम्हारी माँ उन सबके लिए कुर्ते सी सकती हैं ?”

लड़का बापू के इस उत्तर पर चौंक पड़ा और सोचने लगा, 40 करोड़ भाई-बहन बापू के हैं ! समझ में नहीं आया उस मासूम को।

यह सच था कि पूरा देश गांधीजी का परिवार था और वही इस परिवार के मुखिया थे। उन्होंने हर उस दु:ख को अपने ऊपर झेला, जो देश का गरीब इंसान पा रहा था। तभी तो वे ‘राष्ट्रपिता’ कहलाए।

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सत्याग्रह के सिद्धांत

  • सत्याग्रह क्या है ?
  • सत्याग्रह के विचार
  • सत्याग्रह पर गांधी के विचार

गांधीजी सत्याग्रह को अपने जीवन में उतार चुके थे। सत्याग्रह का मूल अभिप्राय अहिंसा में अभेद निष्ठा रखने वाले मनुष्य का सत्य के प्रति आग्रह है। जब सत्य में अहिंसा भी समाहित हो जाती है तो संपूर्ण मानव जाति के साथ ही देश में एक नए सूर्य का उदय होता है।

यह नवसूर्य संपूर्ण मानव जाति को अच्छाई, सत्य एवं शुभ्रता का प्रकाश प्रदान करता है। सत्याग्रह की उच्च महत्त्वाकांक्षा यह है कि किसी भी व्यक्ति को तनिक भी कष्ट न हो। सत्याग्रह में बड़ी-से-बड़ी हिंसक शक्ति को झुकाने का सामर्थ्य होता है।

सत्याग्रह स्वयं ही कष्ट सहने की इच्छा का नाम है गांधीजी मानते थे कि सत्याग्रह विरोधी को नहीं,बल्कि स्वयं कष्ट उठाकर सत्य की रक्षा करना है।

सत्याग्रही हिंसा के स्थान पर अहिंसा को सर्वोपरि मानता है। वह घृणा को प्रेम से, असत्य को सत्य से और हिंसा को आत्मकष्ट के द्वारा जीतने का प्रयास करता है। सत्याग्रही की आत्मा सदैव शुद्ध रहती है। गांधीजी ने सत्याग्रह आंदोलन में अंग्रेजों को यही बताने का प्रयास किया था कि वे दल-बल से ज्यादा दिनों तक भारत को अपने कब्जे में नहीं रख सकते। सत्य और अहिंसा की ताकत एक दिन उन्हें उखाड़कर फेंक देगी। और आखिर गांधीजी की बात जल्दी ही सत्य साबित हो गई। सत्याग्रह का पालन करने वाले व्यक्ति में अतुल बल आ जाता है। अगर सत्य का आग्रह सच्चा है तो इसका प्रयोग पूरे जगत के विरुद्ध किया जा सकता है।

सत्याग्रह के लिए व्यक्ति को स्वयं असत्य, क्रोध, द्वेष आदि से मुक्त होना चाहिए। सत्याग्रही व्यक्ति के मन में भय नहीं होता। गांधीजी ने एक बार कहा भी था “वही राष्ट्र महान है, जो अपने शीश मृत्यु रूपी तकिए पर टिकाते हैं । जो मृत्यु को चुनौती देते हैं, वे भय-मुक्त होते हैं।” सत्याग्रही व्यक्ति कठिन-से-कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार होते हैं। इसलिए वे अधिकतर जीत हासिल करते हैं।

जब भय मन से निकल जाता है तो व्यक्ति निडरता के साथ मैदान में कूद जाता है। सत्याग्रह अन्याय और बुराई के प्रतिकार का एक बहुत शक्तिशाली अस्त्र है। यह एक श्रेष्ठ जीवन-पद्धति भी है। यदि आज के समय में इस जीवन-पद्धति पर चला जाए तो व्यक्ति अनेक कष्टों का सामना करके भी जीवन में आनंद एवं सुख प्राप्त करता है।

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मोती – सी लिखावट

बच्चो, आप सभी अपनी कॉपी में लेखन कार्य अवश्य करते हो। आपकी लिखाई कैसी है? कभी गौर किया हैआपने कि लिखाई भी विद्यार्थियों के जीवन के लिए बहुत महत्त्व रखती है ?
हमारे प्रिय बापूजी गांधीजी की लिखाई ज्यादा साफ नहीं थी। वे जब भी किसी के मोती जैसे बने अक्षरों को देखते थे तो उन्हें टकटकी लगाकर देखते रहते थे।

मोतियों-सी सुंदर, साफ, स्वच्छ एवं पंक्तिबद्ध लिखाई सभी को बेहद आकर्षित करती है।गांधीजी को भी करती थी। वे अपने संपर्क में आने वाले सभी विद्यार्थियों से कहते थे कि प्रतिदिन लेखन कार्य करो। प्रतिदिन लेखन से अभ्यास होता है और लिखावट सुधरती है।

एक दिन जब वे ऐसे ही किसी युवा को उसकी लिखाई के बारे में समझा रहे थे तो युवक तुरंत बोल पड़ा, बापू, आपकी स्वयं की लिखावट तो बहुत खराब है। ऐसे में आप मेरी लिखावट को बुरा बताकर इसे सुधारने के लिए कैसे कह सकते हैं ?’ इस पर बापू ने युवक से कहा, ‘बेटा, सचमुच मेरी लिखावट को पढ़ना सरल नहीं है। इसीलिए तो मैं जब भी किसी की खराब लिखावट देखता हूँ तो मुझे बहुत दुःख होता है। अब तो मेरी लिखावट चाहकर भी मोतियों जैसी नहीं हो सकती।

बचपन की नींव बेहद मजबूत होती है। इसलिए यदि बचपन से ही लिखाई अच्छी नहीं है तो उसे तुरंत ही सुधारने का प्रयास किया जाना चाहिए। मैं चाहता हूँ कि खराब लिखावट के कारण जिन समस्याओं का सामना मुझे करना पड़ रहा है, तुम्हें उन समस्याओं से न जूझना पड़े।
‘ यह सुनकर युवा बेहद शर्मिंदा हुआ ‘ और उसने गांधीजी से वादा किया कि वह अवश्य ही अपनी लिखावट को सुधारेगा।

इस तरह प्रत्येक विद्यार्थी जब बचपन से ही अपने लेखन कार्य पर ध्यान देंगे तो उनकी एकाग्रता शक्ति बढ़ेगी और उन्हें विद्यार्जन करने में भी आनंद आएगा। जब भी आपके किसी कार्य की प्रशंसा की जाती है तो सुनकर अच्छा लगता है न। इसी तरह यदि आपके शिक्षक पूरी कक्षा के सामने आपकी कॉपी दिखाकर सभी बच्चों से कहें कि ‘मुझे हर बच्चे की कॉपी में ऐसी मोतियों-सी लिखावट चाहिए।’ तो यह सुनकर आपको अच्छा लगेगा न । मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है।
तो चलिए, आज से ही अपनी लिखावट को मोतियों जैसी बनाने का प्रयास कर दीजिए।

 

गांधीजी का जीवनदर्शन, बुद्धिमत्ता और उनकी जीवन शैली, ये सब बातें साबित करती हैं कि वे वास्तव में आधुनिक भारत के संत थे। गांधीजी ने अपने व्यक्तित्व से जन-जन को प्रभावित किया था। इसलिए आज देश-विदेश के विभिन्न
स्थानों पर उनकी प्रतिमाएँ हैं, जिन्हें लोगों द्वारा पूजा जाता है। ये प्रतिमाएँ न केवल उनके बारे में जानकारी प्रदान
करती हैं, अपितु देश की ऐतिहासिक संपदा को भी समृद्ध करती हैं।

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