Horror Story In Hindi | Horror Kahani Real in Hindi Latest 2021-22

Let`s read a very interesting horror story in Hindi | Short horror story for Kids | Horror short story | Horror Kahani real in Hindi.

Horror Story In Hindi

मेरा नाम हारिस हसन है , मैं  पेशे से  टीचर हूँ ।  मैं बचपन से भूत-प्रेत और आत्मा इन सब चीजों पर कभी विश्वास नहीं करता था लेकिन  वो कहते हैं  न की  जब अपनी पर आती है तो नायकिन करने वाली चीजों पर भी यकीन करना पड़ता है ।

ठीक ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ और आज मैं चाहता हूँ की उस घटने को आपके साथ शेयर करूँ।  बात उस समय की है जब मैं अपने दोस्त श्याम लाल की शादी मैं गया था , रात मैं शादी की सभी रस्मे पूरी हो जाने बाद मैंने अपने दोस्त श्याम लाल से अपने घर वापिस जाने की इज़ाज़त ली तो उसने मुझे घर जाने से मना किया  और  कहा आप रात को रुक जाइये मैं आपका सोने  का इंतजाम कर  देता हूँ ।

horror story in hindi
Horror Story In Hindi

लेकिन मैं अपने  दोस्त को परेशान करना अच्छा नहीं समझा क्योंकि मैं जनता था की शादी के घर में थोड़ी बहुत परेशानी तो होती ही हैं ।इसलिए मैं अपने दोस्त श्याम को परेशान नहीं  होने को कहा और  उसके बाद मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और घर वापिस आने लगा उस वक़्त रात के 12:30 बज रहे थे ।

 सड़क  एकदम खाली था और चारो तरफ सन्नाटा छाया हुआ था दूर दूर तक एक भी आदमी नज़र नहीं आ रहा था , सड़क के किनारे घाना जंगल और पहाड़ भी थे जो अपने आप मैं भी एक डर जैसा माहौल बना रहे थे लेकिन मुझे इन से क्या फर्क पड़ता मैं तो बस मस्ती मैं अपनी बाइक चला रहा था ।

 रास्ते  मैं छोटे-छोटे  गॉव की  बस्तियां थी जिधर से मैं गुजर रहा था । अचानक मेरी नज़र रस्ते के किनारे एक छोटे से बस स्टैंड पर पड़ी जहाँ एक औरत शायद अपने घर जाने के लिए बस का इन्तेजार कर रही थी । वह लाल और सफ़ेद पाढ़ वाले साड़ी पहनी हुई थी और  उसके हाँथ मैं एक बड़ा सा हैण्डबैग था , उसे देखकर  ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी ऑफिस से काम करती होगी।लेकिन मैं मन ही मन ये भी सोंच रहा था की आधी रात को वो यहाँ क्या रही है । मैं जब वहां से गुज़रा तो उसने मुझे रुकने का इशारा किया ,मैंने अपनी बाइक रोक दी ।

बाइक रुकने के साथ वो मेर नजदीक आई और कहने लगी …. क्या आप मुझे थोड़ी  दूर छोड़ दोगे ……? ऐसा कहकर उसने मुझसे लिफ्ट मांगी इसपर   पहले तो मैं मना कर  दिया लेकिन बाद मैं मैंने सोंचा एक अकेली औरत  इतनी रात को  अकेले बीएस का इंतज़ार कर  रही है और दूर दूर तक किसी बस ,ऑटो या किसी दूसरी सवारी गाडी आने की की संभावना भी नहीं है , तो मैंने अपने मन मैं सोंचा की मुझे एक औरत की मदद करनी चाहिए ।

 शायद ऐसा आप भी सोंचते अगर आप मेरी जगह होते तो ।

मैंने न चाहते हुए भी उसे हाँ कह दिया। वह मेरे पीछे बाइक पर बैठ गई और मैंने अपनी बाइक  स्टार्ट की चलने लगा ।रास्ते में मैंने उस औरत से पूछा की आप कहाँ रहती हैं और क्या करती हैं ? उसने मुझे बताया की मैं यहाँ एक ऑफिस मैं काम करती हूँ और मैं पहाड़ के पीछे एक छोटी सी बस्ती हैं वहां रहती हूँ ।

उसके बाद मैं बाइक चलने के साथ-साथ इधर उधर की बाते कर  रहा था और वो बड़े प्यार से मेरे हर सवालो का जवाब दे रही थी  । सच कहो तो मुझे भी उनसे बात करने में अच्छा लग रहा था और मैं इस छोटे से सफर मैं उनसे काफी घुल-मिल गया था ।

थोड़ी दूर और चलने के बाद उसने मुझसे मेरा नाम पता  और क्या करते हैं पूछा , मैं उसको बताने लगा की मेरा नाम हारिस हसन है और मैं एक टीचर हूँ  और सब बात बताते हुए मैं अपनी धुन में बाइक को तेज़ गति से दौड़ा रहा रहा था । रस्ते मैं पहाड़ के पास  अचानक मैं देखता हूँ की जिस औरत से मैं बात कर रहा हूँ वो मेरे बात का कोई जवाब नहीं दे रही है , फिर मैं जब पीछे मुड़कर  उस औरत के तरफ देखा तो देखता हूँ की   वो औरत वहां है ही नहीं। गायब हो गई ।

 अब मैं बहुत डर गया था , मेरे हाँथ-पैर फूल गए थे  मुझे काटो तो खून नहीं।

 आगे एक पहाड़ था मैंने अपनी बाइक की रफ्तार तेज़ कर दी और तेजी से मैं अपने घर आया  ।

 मेरे मन मैं अब एक ही बात चल रही थी की वो औरत कौन थी? क्या वो मेरी बाइक से गिर गई या फिर वो मेरे बाइक से उतर  कर चली गई थी ?

लेकिन ये हो कैसे सकता है बाइक की गति तेज थी इसलिए उतरने का तो कोई चांस ही  पैदा नहीं होता। . ठीक है अगर वो मेरे बाइक से गिरी होती तो चिल्लाती जरूर ?

खैर कुछ दिनों के बाद मैं अपने उस डॉट श्याम लाल के घर दुबारा गया और उसे अपनी पूरी कहानी बताई!

इस पर मुझे उस गांव के आस पास लोगो ने जो बात बताई वो एकदम अपने आप से चौंका देने वाली थी  ।

उस गांव के एक बुर्जुग  आदमी ने बताया की आज से 20 साल पहले एक औरत इस गांव के सदर अस्पताल में नर्स का काम करती थी , एक दिन रात के समय वो अपने घर जा रही थी तब रास्ते में उसका एक्सीडेंट हो गया और वो मर गई थी ।

उस घटना के बाद आज भी उसकी आत्मा भटकती है और राह मैं आने जाने वाले राहगीरों को परेशान  करती हैं और कई बार तो उनका एक्सीडेंट भी करा देती है ।

मैंने मन ही मन में अपने रब का शुक्रिया  किया जिस से मेरी उस भटकती आत्मा से कोई नुकसान नहीं हुआ , शायद ये मेरे अच्छे परिणामो  का फल था ।

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