Piyar ki Kahani | Pyar ki Kahani Latest 2021-22

Piyar ki Kahani Latest 2021 -22 | Pyar ki Kahani for Lovers | Mohabbat Ki Kahani with Images |Pyar ki love story | Pyar ki Kahani

Pyar ki Kahani 

कमाल ने अपने वतन में किसी से यह शेर सुन लिया था –
 
वह फूलसर चढ़ा जो चमन से निकल गया,
इज्जत उसे मिली जो वतन से निकल गया !
 
इस शेर ने कमाल के दिल पर कुछ ऐसा असर किया कि मां-बाप से इजाजत लेकर दिल्ली आ गया। उसके बाप ने उसे समझा दिया था कि दिल्ली   तुम्हारे लिए एक अजनबी शहर है इसलिए तुम सीधे मेरे शार्गिद इब्राहीम के पास जाना।
 
वह स्टेशन  से सीधा इब्राहीम भाई के यहां गया । वह उससे मिलकर बहुत खुश हुए। इब्राहीम भाई ने कमाल को अपने घर में रख लिया। वह कमाल का हर तरह ख्याल रखते। कमाल भी एक फैमिली मेम्बर की तरह रहने लगा। इब्राहीम भाईके कई बच्चे थे। सबसे बड़ी लड़की सायमा जिसे घर में सब शिबली कहते थे कॉलेज  में पढ़ रही थी। कमाल बड़ा हँसमुख था, बहुत जल्दी सब में घुल मिल गया।
 
कमाल काम सीखने लगा । कमाल पढ़ा लिखा था, उसे शेरो शायरी का बहुत शौक था। अक्सर तन्हाई में शेर गुनगुनाता था । शिबली इंगलिश मीडियम से पढ़ी थी।से उर्दू नहीं आती थी मगर वह ग़ज़लें सुनने की शौकीन थी। वह अक्सर अपने टेपरिकार्डर पर मेहदी हसन और जगजीत सिंह की रूमानी गजलें सुनती थी। उसे गजलें सुनते सुनते उर्दू से जुनून की हद तक मुहब्बत हो गई।
 
एक दिन वह किसी काम से कमाल के कमरे में आई तो उसने टेबल पर एक खत रखा देखा, वह उर्दू में लिखा था मगर तहरीर ऐसी थी जैसे सफेद कागज़प र प्रिन्ट किया हो। वह अभी खत को गौर से देख रही थी कि कमाल कमरे में आ गया।
उसने शिबली से कहा- “बिना इजाजत दूसरे का खत पढ़ना गुनाह है।” वह सटपटा गई मगर फौरन ही संभल गई और बोली- “कमाल! गुनाह तो जब होता जब हम उर्दू जानते । हमें तो उर्दू आती ही नहीं। हमारे लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर है।” कमाल ने पूछा- “वाकई आप उर्दू नहीं जानतीं ?”
This Story on Pyar ki kahani Written by ; Haaris Hassan
“तो क्या हम आपसे झूट बोल रहे हैं।” शिबली ने जवाब दिया- “वैसे हमें उर्दू सीखने का बहुत शौक है क्योंकि कभी कभी गजलों में ऐसे अल्फाज आ जाते हैं जो हमारे सर से गुजर जाते हैं । हम गजलें बहुत शौक से सुनते हैं । आपने हमारे कमरे से गजलों के कैसिट बजने की हलकी हलकी आवाज सुनी होगी।’
 
– कमाल ने कहा- “हम चुपके चुपके कभी आपके कमरे में गए नहीं इसलिए कैसिट की आवाज़ नहीं सुनी।” “आप हम पर तन्ज कर रहे हैं कमाल साहब! हम चुपके चुपके आपके कमरे में नहीं आए। हमारा एक कैसिट नहीं मिल रहा था, हमने सोचा शायद बेबी ने खेलने के लिए लिया हो और यहां छोड़ दिया हो । वह अक्सर ऐसा ही करती है। हम वही ढून्ढने आए थे कि आपके खत पर नज़र पड़ गई। वैसे हम कई दिनों से आपसे बात करना चाह रहे थे।” कमाल ने मुस्कराकर कहा- “फौरन कह दीजिए वरना आपके पेट में दर्द होने लगेगा।” “पिट में दर्द होने लगेगा, मैं समझी नहीं।” “आप लोगों की फितरत है कि जब तक आप लोग अपनी बात किसी से कह न दें आप लोगों के पेट में दर्द होता रहता है।” शिबलीतनक करबोली- “हर लड़की  की फितरत ऐसी नहीं होती। हम आपसे यह कहना चाह रहे थे क्या ऐसा मुमकिन है कि आप हमें उर्दू पढ़ा दिया करें?”
 
_कमाल ने कहा- “मैं खुद उर्दू नहीं जानता, आपको क्या सिखाऊंगा।” “अब ज्यादा बनने की कोशिश मत
कीजिए। हमने कई बार आपको ग़ज़लें गुनगुनाते सुना है । फिर आपका उर्दू का हैन्ड राइटिंग बहुत अच्छा है जो इस बात का सुबूत है कि आपको उर्दू बहुत अच्छी तरह आती है।”
 
_“आप कहती हैं तो हम मान लेते हैं हमें उर्दू आती है।” तभी शिबली की माँ शबीना बेगम आ गयीं और कमाल से बोलीं- “कमाल! क्या मान लेते हो?” कमाल उनकी बात पर मुस्कराया और बोला- “चाची जान! शिबली कह रही है कि हमें उर्दू पढ़ा दिया करो।” “कमाल बेटे ! इल्म बांटने से कम नहीं होता। शिबली को पढ़ा दिया करो। यह तो इसके अब्बू की जिद थी कि इंगलिश मीडियम से पढ़ाऊंगा इसलिए यह उर्दू न सीख सकी।” यह कहकर शबीना बेगम कमरे से चली गयीं। _उनके जाने के बाद शिबली ने कहा- “अब
आप कहें तो अब्बू जान से भी सिफारिश कर दूँगी | 
 
कमाल ने कहा- “शिबली ! आज के दौर में किसी काम के लिएदो में से एक बात का होना जरूरी है। या तो रिश्वत हो या सिफारिश, फिलहाल हम सिफारिश वाली बात मान लेते फिर कमाल ने शिबली को उर्दू पढ़ाना शुरू कर दिया। वक्तपंख लगा कर उड़ने लगा। दोनों के दिल में मुहब्बत का अंकुर फूट पड़ा। कमाल  जरा शर्मीला था इसलिए अपनी मुहब्बत का इजहार न कर सका मगर शिबली इंगलिश मीडियम से पढ़ी थी। उसने एक दिन पढ़ते पढ़ते अचानक कमाल से कहा- “आप हमारी एक बात का जवाब दे सकते हैं ?”
 
“ज़रूर दे सकते हैं, आप पूछिए तो सही।” कमाल ने भी फ़ौरन जवाब दिया। शिबली ने सर झुका कर मुस्कराते हुए पूछा- “मुहब्बत की जाती है या हो जाती है ?” _ कमाल सोच में पड़ गया कि क्या जवाब दे।
 
 _कमाल को खामोश देखकर शिबली ने फिर कहा- “कमाल साहब !  मैंने आपसे कुछ पूछा था, आपने जवाब नहीं दिया।’ _कमाल ने कहा- “शिबली ! तुमने जो सवाल किया है उसके तीन जवाब हैं। पुराने ज़माने में मुहब्बत हो जाती थी, फिर की जाने लगी, अब मुहब्बत कराई जाती है।” “मैं आपकी बात समझी नहीं कमाल!”
Pyar ki Kahani Based on a True love Story
“देखो शिबली ! लैला मजनू, शीरी फरहाद, हीर रांझा, सोहनी महिवाल, इन लोगों ने मुहब्बत की नहीं, इन्हें एक दूसरे से मुहब्बत हो गई इसीलिए इन मुहब्बत के पुजारियों के अफ़साने आज भी जिन्दा हैं । फिर उसके बाद के दौर में लोग मुहब्बत करने लगे। और आज के दौर में लड़के लड़कियां एक दूसरे से तआरुफ़ कराते हैं और फख्र  से कहते हैं वह मेरा ब्वाय फ्रेन्ड है, फलां लड़की मेरी गर्लफ्रेन्ड है। यानी इस दौर में मुहब्बत कराई जाती है। और जब मुहब्बत कराई जाएगी तो वह वक़्ती मुहब्बत होगी। अब तो आप समझ गई होंगी मिस शिबली!”
 
_”आज के दौर में भीतो लैला मजन जैसी मुहब्बत हो सकती है।’ शिबली ने सन्जीदा होकर कहा।
_ “मुझे तो यकीन नहीं कि आज के दौर में कोई ऐसा मजनूं पैदा हो जो अपनी लैला के दीदार के लिए घन्टों इन्तिज़ार करे । आजका दौर तो वह है कि चाहे लड़का हो या लड़की, बस यह कहता है तू नहीं और सही और नहीं और सही।”
 
– “ये आपका नज़रिया हो सकता है कमाल! हमारा नहीं । वैसे हमें ऐसा महसूस होता है कि हमें आपसे मुहब्बत हो गई है। हम अपने दिल को बहुत समझाने की कोशिश करते हैं। मगर दिल है कि मानता ही नहीं। हम अपनी जान की कसम खाकर कह सकते हैं कमाल ! हमें आपसे मुहब्बत हो गई है।”
 
“तुमने अपनी जान की क़सम खाकर हमें सोचने पर मजबूर कर दिया शिबली! कि हमारे दिल में जो कसक उस दिन उठी थी जब हम पहले दिन तुम्हारे घर आए थे और तुम कॉलेज  से उसी वक्त आई थीं । जुल्फों ने तुम्हारे आधे चेहरे को इस तरह ढक दिया था जिस तरह चांद बदली में छुप गया हो । क्या उस कसक को हम भी मुहब्बत समझ लें ?” शिबली ने कमाल की आंखों में चमक देख कर कहा- “कमाल! इसको ही पहली नज़र की मुहब्बत कहते हैं । शुक्र है आपने कबूल तो किया।” “कबूल न करता तब भी मुहब्बत का इज़हार हो ही जाता । कहते हैं इश्क़ और मुश्क छुपाए से भी नहीं छुपते।”
 
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Piyar ki Kahani Latest 2021 -22 | Pyar ki Kahani for Lovers | Mohabbat Ki Kahani with Images
 
दिन गुज़रते गए। कमाल काम पर से आकर शिबली को पढ़ाता । अब दोनों का दिल पढ़ने में न लगता बल्कि मुहब्बत की दास्तानें पढ़ी जाने लगीं। एक दिन शिबली के वालिद साहब ने कमाल से कहा- “हम चाहते हैं कि तुम अब काम पर जाना बन्द कर दो। हम तुम्हें एक होटल खुलवा देते हैं।” कमाल यह सुनकर बहुत खुश हुआ। उसने कहा- “चचा जान! आप जैसा मुनासिब समझें करें। मैं हाज़िर हूं, मेहनत करने से पीछे नहीं हटूंगा।”
 
कुछ दिन बाद कमाल सीलमपुर में होटल पर बैठने लगा। उसने होटल बड़ी मेहनत से चलाया। उसकी मेहनत रंग लाई और होटल खब चलने लगा। कमाल अब रात को होटल में ही सो जाता इसलिए अब उसकी शिबली से मुलाकात दस पन्द्रह दिन बाद होने लगी।
 
एक दिन जब कमाल घर आया तो शिबली को उदास देखकर परीशान हो गया। उसने शिबली से पूछा- “क्या बात है शिबली! तुम और उदास?” शिबली ने आह भरकर कहा- “जिनके लिए हम उदास रहते हैं वह हमसे उदासी का सबब पूछ रहे हैं । कमाल ! मैं बिल्कुल अकेली हो गई हूं।” कमाल ने शिबली से वादा किया कि वह हर रोज एक बार फ़ोन पर मुलाकात कर लिया करेगा। _कमाल पाबन्दी से रोज़ फ़ोन करने लगा।
एक दिन कमाल ने शिबली को फोन किया। घन्टी बजने पर ऊपर कमरे से शिबली ने फ़ोन उठाया । इत्तिफाक से नीचे शिबली के वालिद साहब ने फोन उठा लिया और मुहब्बत के दीवानों की तमाम बातें सुन लीं। उस दिन कमाल शाम को घर आ गया। शिबली के वालिद साहब गुस्से में तो थे ही, सारा गुस्सा कमाल पर उतार दिया और साफ़ साफ़ लफ्जों में कह दिया- “कल से होटल बन्द कर दो और वापस शामली चले जाओ।” कमाल समझ गया कि आज उसकी मुहब्बत का भान्डा फूट गया। उसने कहा- “चचा जान ! मुझसे कोई गलती हो गई ?” वो गुस्से में तो थे ही, कहने लगे- “आइन्दा इस घर में कदम मत रखना। इस घर के दरवाजे तुम्हारे वास्ते हमेशा के लिए बन्द हो गए।” अब कमाल समझ गया कि हो न हो शिबली से फोन पर होने वाली बातें चचा जान ने सुन ली हैं। दूसरे दिन कमाल अपने घर शामली के लिए रवाना हो गया। उधर शिबली ने घर में बगावत कर दी। अपने डैडीसेकह दिया कि शादी करूंगी तो सिर्फ कमाल से वरना नहीं।
 
इब्राहीम भाई जज्बाती किस्म के इन्सान थे। उन्होंने कहा- “मैं वह दिनदेखने से पहले ही इस दुनिया से चला जाऊंगा।” और उन्होंने कोई जहरीली चीज़ खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। डाक्टरों की कोशिश से उनकी जान बच गई। इस हादसे ने शिबली पर बड़ा असर किया और उसने अपने वालिद साहब की जिन्दगी पर अपनी मुहब्बत कुर्बान कर दी। कमाल शामली में न रुक सका । पुरानी यादें उसे वापस दिल्ली खींच लाई । उसने दिल्ली  आकर शिबली को फोन किया। शिबली ने उससे कहा- “अब मुझे फोन करने की कोशिश न करना और मुझे भूल जाना।” यह सुनकर कमाल को बहुत दुख हुआ। कुछ दिन बाद शिबली की मंगनी  डॉक्टर  असद से हो गई और दोनों तरफ से शादी की तैयारियां होने लगी। तभी किसी तरह डाक्टर असद को कमाल और शिबली की मुहब्बत के बारे में पता चल गया। उन्होंने खूबसूरती से यह कह कर मंगनी खत्म कर दी कि मैं पांच साल के लिए आगे पढ़ाई करने लन्दन जा रहा हूं। मैं पांच साल बाद लौटूंगा या मुझे अच्छी नौकरी मिल गई तो लन्दन में ही रुक जाऊंगा। शिबली के फूफा जान को जब यह बात मालूम हुईतब उन्होंने फौरन शिबली के वालिद साहब से कहा- “आप परीशान न हों, मैं शिबली को अपनी बहू बना लूंगा।” उनका लड़का जिसे प्यार से राना कहते थे, खूबसूरत नौजवानों में शुमार होता था।
 
वैसे राना को भी यह मालूम था कि शिबली कमाल को चाहती थी मगर रानाने अपने बाप के हुक्म के आगे सर झुका दिया और यह रिश्ता मन्जूर कर लिया। चन्द दिन बाद बड़ी धूम धाम से राना की मंगनी हो गई और कुछ दिनबाद हीराना दूल्हा बनकर आया और शिबली को दुल्हन बनाकर अपने घर ले गया।
 
– कमाल शिबली की शादी में शरीक नहो सका मगर उसने अपने एक दोस्त के घर की बालकॉनी  से अपनी मुहब्बत का जनाज़ा उठते देखा । उसके ख़्वाबों का शीशमहल गिरकर चकनाचूर हो गया था।
 
_कमाल ने खुदकुशी करने का इरादा किया मगर उसके दिलसे आवाज़ आई “खुदकुशी तो बुजदिल लोग किया करते हैं बेवकूफ़ इन्सान ! मर्दहरतूफ़ान का मुकाबला करता है। उठ और पुरानी मुहब्बत के ताबूतको हमेशा हमेशा के लिए दफ्न कर दे । अगर तूने मजनूं बनने की कोशिश की तो यह बात याद रख पुराने ज़माने में लोगों ने मजनूं परपत्थर बरसाए थे मगर आज किसको इतनी फुर्सत है कि कोई तुझे पत्थरमार कर यह एहसास दिलाए कि तू मजनूं है , तू मुहब्बत का मारा है । लोग तुझ पर हंसेंगे. कहकहे लगाएंगे।” और कमाल एक नए इरादे के साथ उठ खड़ा हुआ।
 
एक महीने बाद कमाल अपनी खूबसूरत बीवी को लेकर होटल केन्डिल में दाखिल हुआ।  होटल में हलकी मौसी की बज रही थी। कमाल एक खाली मेज़ की तरफ़ बढ़ गया। हर टेबल पर एक मोमबत्तीनुमा लैम्प जल रहा था। बैठने के बाद कमाल की बीवी ने बैरे को खानेका आर्डरदिया । तभी बराबर वाली टेबल पर बैठी औरत ने वेटर को कोल्ड ड्रिंक्स लाने को कहा । होटल में डिम लाइट की वजह से कमाल उस औरत को तो न देख सका मगर कमाल को यह समझने में देर न लगी कि वह आवाज़ शिबली की थी। कमाल ने अपने हवास पर जल्दी क़ाबू पा लिया । खाने खाते हुए कमाल की बीवी ने कहा- “अब आप अपने उस दोस्त के बारे में बताइए जिसने आपसे कहा था उसकी महबूबा बेवफ़ा निकली।”
 
“किसने किससे बेवफ़ाई की यह तो मैं नहीं कह सकता। हां मैं इतना ज़रूर कह सकता हूं कि अगरमेरा कोई दोस्त आज आकर मुझसे कहे कि मैंने लैला, शीरी या सोहनी जैसी लड़की देखी है तो मेरे ख्याल में इससे बड़ा झूट और कोई नहीं हो सकता । अब क़यामत तक न कोई दूसरी लैला पैदा होगी न शीरीं न सोनी। सच्ची मुहब्बत का लफ्ज़ उनके साथ दफ्न हो गया। मैं अपने उस दोस्त की महबूबा को बेवफ़ा नहीं
कह सकता, बावफ़ा भी नहीं कह सकता।” कमाल बिल देकर अपनी बीवी का हाथ पकड़ कर होटल से बाहर निकल गया। शिबली ने कमाल की आवाज़ पहचान ली थी। उसके कानों में कमाल के यह अल्फाज़ गूंजने लगे- “मैं उसे बेवफ़ा भी नहीं कह सकता, और वफ़ा भी नहीं कह सकता।
 
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