Romantic Stories in Hindi // मुहब्बत की आग

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मुहब्बत की आग 

यह लड़की कहाँ  चली गई ? ” मैंने झल्ला कर सोचा। डेलस गार्थ जैसे होटल की मेनेजर होना कोई आसान काम न था लेकिन मैं अपनी इस
नौकरी से बहुत खुश थी। तनख्वाह भी अच्छी थी। पैंतीस साल की उम्र में इतनी अच्छी नौकरी कहां मिलती। “जार्ज! डूटी!” मैंने आवाज़ दी। दोनों साथ ही आए।मेरे कहने के बावजूद  डूटी खुले गले का बेहद चुस्त लिबास पहने थी। “हर जगह धूल ही धूल नज़र आ रही है और तुमने ऐश ट्रे साफ़ किये ?” मैंने पूछा। मैं इस होटल को चलाने के लिए सख्त मेहनत कर रही थी और अपने स्टाफ के साथ ज्यादा सख्ती से पेश आना नहीं चाहती थी। लेकिन काम वाकई मेहनत तलब था। फर्नीचर पुराना और कालीन मैला था फिर भी होटल गर्म और आरामदेह था। मैं इस होटल को एक खूबसूरत पनाहगाह बनाना चाहती थी जहां शहर के हंगामों से घबराए लोग आकर अपने जहन और जिस्म को सुकून पहुंचा सकते।

Do you know? This Romantic Stories in Hindi based on a true story…

अचानक कहीं घन्टी बजी। कुछ देर बाद दोबारा बजी। “डूटी कहां हो?” मैंने आवाज दी। जार्ज कोरीडोर की सफाई कर रहा था। घन्टी की आवाज़ रूम नम्बर पांच से आ रही थी जो होटल का सबसे अच्छा औरबड़ा कमरा था। मैं भागती हुई ऊपर पहुंच गई। वह खिड़की के पास बैठा बाहर का नज़ारा कर रहा था। “सर! आपने घन्टी बजाई?” वह बहुत स्मार्ट और हैन्डसम था। “मैं चाय पियूँगा।” उसने पलट कर मेरी
तरफ़ देखा- “वह लड़की कहां है जो अक्सर आती है।

“वह ज़रा मसरूफ़ है, आप हुक्म करें। हमारे यहां घर के बने केक, जाम, शहद और मीठी टिकिया भी हैं, ले आऊं?” उसने हां में सर हिला दिया। मैं नीचे गई और सारी चीजें ट्रे में सजा कर फिर कमरा नम्बर पांच में आई।

– “बता सकती हो यह सड़क कहां जाती है।” उसका लहजा काफी सोबर और खुशगवार था। उसने एटलस में एक बलखाती हुई पीली सड़क पर उंगली रख कर पूछा। “ओह! यह सड़क ।” मैंने कहा- “यह पांच मील दूरलिप्टन तक जाती है। वहां एक दरिया और उसके किनारे एक किला भी है। उसी तरफ़ एक पुरानी खानकाह भी है।” मैं उसे इस तरह बता रही थी जैसे कोई सफ़रनामा सुना रही हूं।

“मैं इन मुकामात पर जाऊंगा।” जैसे वह अपने आप से बोला। “हां सर ! ज़रूर जाएं।” मैंने कहा- “अगर आप उन जगहों पर नगए तो यहां आने का कोई फायदा नहीं। आपने मुश्किल से ही कहीं की सैर की होगी। है ना?”

मुझे यह नहीं कहना चाहिए था लेकिन तीर कमान से निकल चुका था। मेरा काम सिर्फ होटल चलाना था, ग्राहकों को चलाना नहीं। “इसके अलावा भी कुछ चाहिए?” मैंने खालिस कारोबारी लहजे में कहा। “नहीं शुक्रिया मिस….” “मेगी।” मैंने कहा। वह मुस्कराया- “मुझे जेम्स कहते हैं। यह ट्रे ले जाओ।” उसका लहजा अचानक बदल गया था। मैं घबरागई। उसका नाम जेम्स नहीं था इसका तो मुझे पूरा यकीन था लेकिन मुझे इससे कोई मतलब न था। मैं ट्रे लेकर नीचे आ गई। देखते देखते होटल ग्राहकों से भर गया।

होटल एक अजीब जगह है, कभी खाली पड़ा रहता है कभी एकदम से भर जाता है। मैंने देखा डूटी लोगों को सर्व करने में लग गई थी। मैं खाना तैयार करने किचन में चली गई। हमारा बावर्ची दो हफ्ते पहले चला गया था। अब यह काम भी मैंने संभाल लिया था। जार्ज सब्जी काट रहा था। इसी दौरान फोन की घन्टी बजने लगी। मैंने रिसीवर उठा लिया। “मैं एक मुकामी अखबार के दफ्तर से बोल रहा हूं। हमें पता चला है कि मिस्टर जेम्स आपके यहां ठहरे हुए हैं ? “तो मेरा ख्याल सही निकला । वह इंगलैन्ड का मशहूर कुंवारा अरबपति था जिसकी दौलत और तन्हाई के चर्चे आम थे। अख़बार वाले हर वक्त उसके पीछे घूमते रहते थे लेकिन वह यहां क्यों आया था। अगर वह चाहता तो सारा होटल खरीद सकता था। “तुमने कैसे समझ लिया कि वह यहां होगा।

मैंने फोन करनेवाले से पूछा- “इतना बड़ा आदमी भला यहां क्यों आने लगा। किसी बड़े होटल से मालूम करो।” “अब रहने भी दो।’ दूसरी तरफ़ से कहा गया- “सोचो तुम्हारे होटल की मुफ्त में पब्लिसिटी होगी। क्या वह अकेला है या किसी दिलरुबा के साथ । तुम न भी बताओ तो हम पता चला लेंगे।” मैंने रूम नम्बर पांच में ठहरे उस शर्मीले नौजवान के बारे में सोचा जो तन्हाई चाहता था। मेरी नजरों के सामने उसकाउदास चेहरा घूम गया। लगता था उसकी बेपनाह दौलत भी उसे खुशी नहीं दे सकी थी। “हमारे यहां इस नाम का कोई शख्स नहीं ठहरा है। इतना कहकर मैंने फोन रख दिया। मैं किचन में जाने के लिए मुड़ी ही थी कि मेरी नजर उस पर पड़ गई। वह शायद फोनपर हुई बातचीत सुन चुका था। मैं ठिठक गई। “इस राज दारी का बहुत बहुत शुक्रिया।” वह बोला- “क्या मैं यहां रहने तक तुम पर भरोसा कर सकता हूं?”

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“जी सर!” मैं जल्दी से बोली। “मुझे किराए पर कोई कार चाहिए।” वह बोला- मैं अपनीकारमेंनहीं आया। इस तरह मैं महफूज रहता हूं। मैं उन जगहों पर घूमना चाहता हूं जिनका तुमने जिक्र किया था। ” उसी वक़्त कहीं से डूटी की सुरीली हंसी सुनाई दी। “ठीक है सर! मिल जाएगी।” मैंने कहा- “आपको किस वक्त चाहिए?” मैंने पूछा- “मेरा मतलब कार किस वक्त…।”

“मिस मेगी! क्या तुम कल मेरे साथ घूमने चलोगी?” अगर लाउंज में पड़ी कुर्सियां भी नाचने लगतीं तो मुझे इतनी हैरत न होती जितनी उसकी बात सुनकर हुई। मेरे कुछ कहने से पहले ही वह बोलपड़ा- “मैं जानता हूं तुम्हें मेरी यह दावत अजीब लगेगी। मैं तुम्हारे लिए बिल्कुल अजनबी हूं। लेकिन खैर अभी तुमने जो कुछ भी मेरी खातिर किया है उसका शुक्रिया मैं इसी तरह अदा कर सकता हूं और…” “ठीक है हम लन्च के बाद रवाना हो जाएंगे।” “तुम्हारी मर्जी।” वह इतना कहकर चला गया। मैं जो खुद को किसी अल्मारी में रखी हुई बोसीदा किताब समझती रही थी जिसे पढ़ना तो दूर कोई छूना भी पसन्द नहीं करता था, मेरा ख्याल कितना गलत था।

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_ अगले दिन मौसम बहुत खूबसूरत था। हम कार में रवाना हो गए। वह बड़ी एहतियात से ड्राइव कर रहा था। रास्ते में हमारे बीच खामोशी रही। हमने लिप्टन पहुंचकर चाय पी और उसे अपने बारे में बताने लगी । वह ऐसा शख्स था जिससे मैं बिना घबराहट के बातें कर सकती थी
और जो जानता था मैं उसके राज़ की हिफाज़त करूंगी। वह कितना अच्छा दोस्त साबित हो सकता था।

वापसी में भी हमारा सफ़र ख़ामोशी से कटा। उसने फिर कल मुझसे साथ चलने की बात कही, मैं इन्कार न कर सकी। फिर हम रोज जाने लगे। धीरे धीरे मैं अपने इस अजीबो गरीब साथी के बारे में बहुत कुछ जान गई। वह एक पेचीदा शख्स था। कभी  तो हम पुराने दोस्तों की तरह बिल्कुल बेतकल्लुफ़ी से बातें करते । वह मुझे अपने कारोबार, जायदाद और दोस्तों के बारे में बताता। लेकिन बातें करते करते अचानक उसका रवैया सर्द हो जाता और मैं सख्त उलझन का शिकार हो जाती। मेरे दिल में उदासी तैरने लगती।हमारे बीच हमेशा एक फासला रहता।
वह दुनियाँ  के अमीर लोगों की बातें करता लेकिन उनमें से कोई उसके क़रीबनथा। अपनी रेडियों का जिक्र करता जो सारी दुनियाँ  में थीं मगर खाली पड़ी रहती थीं।

एक बार उसने यूनान के एक अरबपति का जिक्र किया जिसका घर घर चर्चा था और जिसकी दौलत का कोई हिसाब न था। मैंने उससे उस अरबपति की बेटी के बारे में पूछा जो अपने हुस्न  और रूमान पसन्द तबीअत की वजह से मशहूर थी। लेकिन उसने तेज़ लहजे में बात बदल दी। मैं परीशान सी हो गई। उस दिन हम वादी में घूम रहे थे । गर्मी का मौसम था। मैं एक हलका फुल्का लिबास पहने थी। वह भी जेकेट उतारे हुए था। “मेगी!” वह बोला- “मुझे तुम्हारा शुक्रिया अदा करना है। तुमने एक फैसला करने में मेरी मदद की है और मैं जानता हूं कि अब मैं खुश रहूंगा। मुझेतन्हाई चाहिए थी इसीलिए मैं यहां आया था।

मुझे कुछ बातों पर सोचना था। तुमने एक फैसला करने में मेरी मदद की मैंने चुप्पी साध ली। वह बोला- “अब मुझे मालूम हो गया है कि मैं किसी से शादी करना चाहता हूं।” उसका लहजा नर्म और शाइस्ता था। यह कल की बात थी। मैं समझ रही थी मैं एक राख का ढेर हूं लेकिन इस राख में चिन्गारियां दबी हैं मुझे मालूम न था। मुझे अपना सारावजूद इश्क की आग में फुकता हुआ लग रहा था। ऐसा तो मैने जवानी में भी महसूस नहीं किया था।

क्या मुझे जेम्स से मुहब्बत हो गई है। क्या वह भी मुझे चाहता है। क्या मुझे उससे मुहब्बत करनी चाहिए ? वह बेशक अमीरतरीन शख्स था लेकिन मैं तो उस खामोश खामोश से आदमी को जानती थी जो मेरे होटल के कमरा नम्बर पांच में ठहरा था। मैं रात भर उसके बारे में सोचती रही। सुबह के वक्त मेरी आंख लग गई। अलार्म की आवाज़ पर मुझे उठना पड़ा। मुझे नाश्ता तैयार करना था। मैं तेजी से नीचे आई।

“कमरा नम्बर पांच का मेहमान आज जा रहा है। जार्ज ने मुझसे कहा- “वह अपने कमरे में ही नाश्ता करेगा और उसने साढे नौ बजे टैक्सी तलब की है।” मैं तेजी से उसके कमरे में पहुंच गई। मुझे देखकर वह बोला- “जब मैं किसी नतीजे पर पहुंच जाता हूं तो फौरन हरकत में आ जाता हूं। पिछली रात मैंने तुम्हें बताया था कि मैं एक फैसले पर पहुंच चुका हूं।”

तुम  शादी की बात कर रहे थे।” मैं हकलाई। न जाने मेरे लहजे में क्या था कि वह चौंक पड़ा- “कहीं तुम यह तो नहीं समझ बैठी हो कि मैं तुमसे शादी कर रहा हूं। मैंने तुमसे यह कब कहा था।” उसका लहजा रूखा था। “नहीं.. नहीं यह तो नहीं कहा था।” मेरा सर घूमने लगा। “मुझे अफ़सोस है मुझे तुमसे इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए थी। मुझे मुआफ कर दो।” “मैं उससे नफरत करतीहं।”मैंने सोचा लेकिन मैं जानती थी कि मैं उससे नफरत नहीं कर सकती।

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_ “मैंने तुम्हें उस यूनानी अरबपति के बारे में बताया था।” वह बोला- “हम दोनों एक समझौते पर अमल कर रहे थे। इस समझौते
पर अमल करके मैं अपनी दौलत कई गुना बढ़ा सकता था। हमारा प्लानपूरा था लेकिन उसमें एक रुकावट थी।” उसने रुक रुक कर गहरी सांस ली। फिर बोला- “वह अरबपति चाहता था कि दौलत उसी के घर में रहे। वह चाहता था मैं उसकी बेटीतानिया से शादी करलूं । शादी के बगैर वह समझौता पूरा नहीं हो सकता था। फिर एक और लड़की बीच में कूद पड़ी।” वह बोला। “एक और लड़की ?” मैंने हैरत से कहा।

“हां हमारे बीच बहुत गर्मा गर्म बहस हुई। उस लड़की ने मुझसे कहा कि मैं दौलत की खातिर खुद को तबाह कर रहा हूं, खुद को बेच रहा हूं और मुझे उस अरबपति की लड़की से कोई मुहब्बत नहीं है। मैं इतना अन्धा हो गया हूँ कि मुझे सामने की चीज़ नज़र नहीं आ रही। इस बहस के बाद मैं इस मामले  पर गौर करने यहां आ गया। मुझे तन्हाई की ज़रूरत थी। इस मामले में सोचने के लिए मैंने कल रात उस लड़की को फोन किया था। उसने मेरी पेशकश कबूलकरली है। में अपनी सेकेट्री से शादी कर रहा हूं। यह रहीउसकी तस्वीर।” उसने एक तस्वीर मेरी तरफ बढ़ा दी। मैंने वह तस्वीर नहीं देखी। मारे गुस्से के मेरा खून खौल रहा था।

___“यह पिछले पन्द्रह साल से मेरी सेकेट्री है। मुझे उसकी बातों की सच्चाई को महसूस करने में वक्त लगा।” मैंने तस्वीर देखी। वह मेरी हम उम्र लगती थी लेकिन उसकी आंखें बेहद हसीन थीं। मुझे वह पसन्द आई। जेम्स ने सही फैसला किया था।

 “मैं किसी वक्त उससे तुम्हें मिलवाऊंगा। मुझे उम्मीद है तुम दोनों दोस्त बन जाओगी जैसे हम दोनों एक दूसरे के दोस्त हैं।” उसने मेरा हाथ थामकर थपथपाया- “अच्छे दोस्त मुश्किल से मिलते हैं। तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया।”

मैं अब भी उसी होटल में हूं लेकिन अब मेरी जिन्दगी में बहुत बड़ा फ़र्क आ गया है। अब मेरा एक दोस्त है बहुत अमीर और बहुत ताकतवर जिसे मैं एक खामोश और तन्हाई पसन्द शख्स के रूप में पहचानती हूं। जिसकी एक प्यारी सी बीवी है जो मेरी हमउम्र है। वह मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन गई है और मुझे उसकी दोस्ती पर नाज है।

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