Story in hindi for child || हिन्दी कहानी || चिक्की कैसे सुधरा

प्यारे बच्चो , आज मैं आपके लिए story in hindi for child ले कर आया हूँ। दरअस्ल ये कहानी एक छोटे बच्चे की है जिसे देर तक सोने की आदत थी। 

चिक्की कैसे सुधरा 

चिक्की के लिए सुबह उठना सबसे मुश्किल काम था। उसकी मम्मी रात में उसे कितनी भी जल्दी सुला देती, वह सवेरे स्कूल जाने में हमेशा देर कर देता। चिक्की की स्कल-बस सवेरे आठ बजकर बीस मिनिट पर उसे लेने आती थी। चिक्की पौने आठ तक बिस्तर पर पड़ा अंगड़ाइयाँ  लेता रहता।

नौकर आकर कहता, “बाबा…बाबा…उठो! चिक्की आँख मींचकर रजाई सिर पर खींच लेता।

 

 

मम्मी कहती, “चिक्की बेटा,देर हो रही है।” चिक्की कहता, “ॐ ॐ…” और फिर सो जाता। बड़ी जीजी, छोटी जीजी सब जोर लगातीं, पर चिक्की राजा पौने आठ के पहले आँखें न खोलता और फिर सारा घर चिक्की की तैयारी में लग जाता।

 

 

बड़ी जीजी जल्दी जल्दी उसका बस्ता तैयार करतीं, पर जीजीको क्या पता कि चिक्की को आज कौन सी किताब ले जानी है। स्कूल में टीचर कहती अंग्रेजी की रीडर निकालो। चिक्की अपना बस्ता खोलता, तो उसमें हिन्दी की किताब मिलती। चिक्की रोज स्कूलमें तय करता कि अब से वह अपना बस्ता खूद तैयार करेगा, पर सुबह जब निदिया रानी उसकी आँखें मींचती, तो चिक्की सब भूल जाता। फिर तो यह हालत होती कि चिक्की को दौड़कर बस पकड़नी पड़ती।

 

 

एक तरफ डैडी डाँटते , दूसरी तरफ जीजी जल्दी मचातीं। कभी दूध पीना रह जाता, कभी टोस्ट खाना । देर से उठने के कारण चिक्की को स्कूल में, पढ़ाई के समय जमुहाई आ जाती । वह मुँह पर हाथ रखता, पर टीचर देख लेती और चिक्की को सजा मिलती। चिक्की को यह सब बुरा लगता पर वह अपनी आदत छोड़ नहीं सकता था। सोना उसे बहुत पसंद था। उसने भगवानसे प्रार्थना की-है भगवान, जल्दी से छुटियाँ आए , तो मैं रात दिन सोऊँगा ! एक बार मेरी नींद पूरी हो जाएगी, तब मैं अपने आप सुबह जल्दी उठने लगूँगा ।’

 

 

बड़े दिन की छुटियाँ  हुई। स्कूल में सब बच्चों ने अपने अपने प्रोग्राम बना रखें थे। चिक्की ने भी छुट्टी के पहले ही दिन घर में सबसे कह दिया,”सबेरै मुझे कोई न उठाए। मैं दो दिन तक सोऊँगा ।”बड़ी जीजी ने कुछ कहने के लिए मुँह खोला, पर मम्मी ने. एक तरकीब सोच ली थी, उन्होंने

इशारे से उसे मना कर दिया। घर में सभी से मम्मी ने कह दिया, “चिक्की को कोई न उठाए, वह दो दिन तक सोएगा ! चिक्की बहुत खुश । रात को वह खुशी के कारण उछलता रहा। सवेरे जब उसकी आँख खुली, कमरे में धूप ही धूप भरी हुई थी। उसकी दोनों जीजी नहा चुकी थीं और पढ़ रही थीं। उसने मुँह  बनाया, ऊं…” और फिर सो गया।

 

 

काफी देर बाद चिक्की की नींद टूटी, तो उसे बहुत जोर से लगी। उसने आवाज लगाई, “मम्मी!” मम्मी नहीं आई। उसने आवाज लगाई,”जीजी !”

जीजी नहीं आई। वह चिल्लाया, “सुंदर सिंह ! नौकर भी नहीं आया। चिक्की झुंझलाता झुंझलाता बिस्तर से उठा। उसने देखा, खाने के कमरे में सब लोग खाना खा रहे हैं। उसे देखकर मम्मी एकदम उठकर आई, चिक्की, तुम्हें दो दिन तक सोना है, चलो, तुम्हें बिस्तर तक पहुँचा दूँ ।” चिक्की खिसियाया हुआ वापस बिस्तर में छिप गया।

 

 

वह रजाई के अंदर पड़ा हुआ था और भगवान से मना रहा था-‘हे भगवान ! ज्यादा नहीं तो मुझे किसी तरह एक टोस्ट ही दे दो !’ थोड़ा समय और गुजरा। चिम्की ने मुँह  उघाड़ कर देखा, घरके सब लोग चाय पी रहे हैं। मम्मी ने शायद कुछ स्पेशल चीज बनाई थी और दोनों जीजी बड़ी शान से खा रही थीं। चिक्की ने अपने होंठों पर जीभ फेरी और उसका मन सब जोर से चिल्लाने को हुआ। चाय पीने के बाद जीजी उसके कमरे से गुजरी, तो चिक्कीने पुकारा, “जीजी ! “जीजी ने कहा, “श…..श ! तुम्हें सोते रहना चिक्की परेशान हो गया। उसे इस समय बिस्तर बुरा लग रहा था।

 

 

वह भगवान से मना रहा था, ‘हे भगवान, ज्यादा नहीं तो किसी तरह मुझे एक रोटी ही दे दो। चिक्की के लिए बिस्तर में एक एक मिनिट काटना मुश्किल हो रहा था। भूखके मारे उसकी जान निकल रही थी। उसे अपने दांत भी बासी लग रहे थे, क्योंकि उसने दातुन नहीं की थी। उसके कमरे में कोई नहीं आ रहा था। खिड़की में से उसे बाहर बच्चोंके खेलनेकी आवाज आई और उसका बहुत मन हुआ कि वह बाहर जाकर खेले, पर उसे तो बिस्तरपर ही रहना था।

 

 

शामको दफ्तर से डैडी आए।घरके सब लोग फिर खाने के कमरे में बैठे। उस कमरे से हँसने -बोलने की तेज आवाजें आ रही थीं। चिक्की बिस्तर से उठा और धीरे से उस कमरे में घुसा । वह मम्मी की कुर्सी के बिल्कुल पास खड़ा हो गया, “मम्मी, मुझे माफ कर दो, अब में कभी देर से नहीं उठेगा।’ मम्मी ने उसके दोनों गालों को चूम लिया और जीजी ने  उसके मुँह  में रसगुल्ला भर दिया।

प्यारे बच्चो , आप सभी को story in hindi for child कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ताकि हम आपके लिए इसी तरह story in hindi for child ले कर आ सके – धन्यवाद 

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