Science behind Sweating Meaning in Hindi

Hello My dear students, Today I’m going to teach you about sweating and we will know some other points like;- Sweating meaning, Sweating meaning for all disease, and Sweating advantages and disadvantages.

Why do we Sweat?

Generally, you must have noticed that we sweat when we are in the hot summer or doing more physical work. Have you ever wondered why we sweat? Sweating in the summer season or working hard is natural and sweating is also healthy for the body. Actually, sweating is a natural mechanism to control the temperature of the human body.

आमतौर पर आपने देखा होगा कि अधिक गर्मियों में अथवा अधिक शारीरिक परिश्रम करने पर हमें पसीना आ जाता है। क्या अपने कभी सोचा है कि हमें पसीना क्यों आता है? गर्मियों के मौसम में अथवा अधिक मेहनत करने पर पसीना आना स्वाभाविक है और पसीना आना शरीर के लिए सेहतमंद भी है। दरअसल, पसीना आना मानव शरीर का तापमान नियंत्रित रखने की एक प्राकृतिक व्यवस्था है।

The science behind Sweating Meaning

Perhaps you would know that the normal temperature of our body is 98.6 degrees Fahrenheit. For some reason, when the temperature of the atmosphere becomes high, the heat starts entering the body, due to which the sweat glands located just below the skin become active and sweat starts coming out from the skin.

शायद आप जानते होंगे कि हमारे शरीर का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है। किसी कारण से जब वायुमंडल का ताप अधिक हो जाता है तो ऊष्मा शरीर में प्रवेश करने लगती है जिससे त्वचा के ठीक नीचे स्थित स्वेद ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं और त्वचा रंध्रों से हो कर पसीना बाहर आने लगता है।

This sweat evaporates and lowers body temperature to normal. In this way, our body temperature is controlled by sweating. You should know that there are about 2.5 million sweat glands in our body. Actually, these glands serve as air conditioning.

यह पसीना वाष्पीकृत होने से शरीर का ताप कम होकर फिर सामान्य हो जाता है। इस तरह पसीना आने से हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। आपको पता होना चाहिए कि हमारे शरीर में लगभग 25 लाख स्वेद ग्रंथियां होती हैं। दरअसल, ये ग्रंथियां एयर कंडीशनिंग का काम करती हैं।

When the heat rises a lot, whether it is due to external reasons or due to food, then sweat drops start coming out of these glands to cool the body. When sweat dries in the air, coolness arises and our body temperature decreases. The process of sweating is related not only to external factors but also to internal factors.

जब गर्मी बहुत बढ़ जाती है, चाहे वह बाहरी कारणों से हो अथवा खान-पान की वजह से, तो शरीर को ठंडा करने के लिए इन ग्रंथियों से पसीने की बूंदें निकलना शुरू हो जाती हैं। जब पसीना हवा में सूखता है तो ठंडक पैदा होती है और हमारे शरीर का तापमान कम हो जाता है। पसीना आने की प्रक्रिया का संबंध केवल बाहरी नहीं, आंतरिक कारकों से भी होता है।

Sweating meaning for all disease

Sweating comes out of the skin in anxiety, fear, and stress, etc. Apart from this, the sweat glands in the body become active due to hormonal changes in the body at the onset of puberty. Some people sweat a lot on their own. Although excessive sweating is not a disease, sometimes it can be due to disturbances in the gland, stress, hormonal changes, eating more spicy food, eating more medicine, hot weather, and obesity, etc. The condition of excessive sweating is also called hyperhidrosis.

चिंता, डर व तनाव आदि में भी त्वचा से पसीना निकलता है। इसके अलावा यौवनावस्था आरंभ होने पर शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण शरीर में पसीने वाली ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं। कुछ लोगों को स्वतः ही बहुत पसीना आता रहता है। वैसे बहुत ज्यादा पसीना आना कोई बीमारी तो नहीं है, परंतु कई बार ऐसा स्वेद ग्रंथियों में गड़बड़ी, तनाव, हार्मोनल बदलाव, अधिक मसालेदार भोजन करने, अधिक दवा खाने, गरम मौसम और मोटापे आदि के कारण हो सकता है। बहुत अधिक पसीना आने की स्थिति को हाइपरहाइड्रोसिस भी कहा जाता है।

Hyperhydrosis is a common disorder associated with the nervous system. Excessive sweating in the palms and soles is called palmoplantar hyperhidrosis. Its symptoms start appearing in childhood itself. In hyperhidrosis, the process of freezing the body becomes hyperactive. This causes four to five times more sweat than normal. Warmer weather, more physical exertion, emotional problems, hormonal lavage, menopause, diabetes, hyperthyroid, obesity, nicotine, caffeine, and eating fried and spicy foods, etc. also add to the problem of hyperhidrosis. But people who sweat too much may have problems like dehydration or lack of salt.

हाइपरहाइड्रोसिस नर्वस सिस्टम से जुड़ा यह एक सामान्य डिसॉर्डर है। हथेलियों और तलवों में अधिक पसीना आने को पालमोप्लोंटर हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। इसके लक्षण बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं। हाइपरहाइड्रोसिस में शरीर को ठंडक देने की प्रक्रिया अति सक्रिय हो जाती है। इस कारण सामान्य से चार से पांच गुना अधिक पसीना आता है। गर्म मौसम, अधिक शारीरिक श्रम, भावनात्मक समस्याओं, हार्मोनल लाव, मेनोपॉज, डायबिटीज, हाइपरथायरॉइड, मोटापा, निकोटीन, कैफीन व तले और मसालेदार भोजन का सेवन करना आदि भी हाइपरहाइड्रोसिस की समस्या को और बढ़ावा देता है। लेकिन जिन लोगों को बहुत अधिक पसीना आता है उन्हें डीहाइड्रेशन या नमक की कमी जैसी परेशानी हो सकती है।

You must have noticed that during the rainy days there is more sweating. Can you think why this happens? Actually, on rainy days the air is saturated with water vapor and does not have the ability to absorb any more water vapor from nearby objects. That is why we sweat due to heat, but it is not able to evaporate from our skin and we get sweaty during the rainy summer.

आपने देखा होगा कि बरसात के दिनों में अधिक पसीना आता है। क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसा क्यों होता है? दरअसल, बरसात के दिनों में वायु जल वाष्प से संतृप्त होती है और इसमें आस-पास की वस्तुओं से और अधिक जल वाष्प ग्रहण करने की क्षमता नहीं होती। इसलिए गर्मी के कारण पसीना आता तो है परंतु यह हमारी त्वचा से वाष्पीकृत नहीं हो पाता और बरसात वाली गर्मी में हम पसीने में तर रहते हैं।

This often happens to everyone. But people suffering from hyperhidrosis tend to sweat more than normal people because the sweat glands become more active in them. This causes excessive sweating. About 7 to 8 percent of Indians suffer from excessive sweating. When sweat comes out of the body, when it comes in contact with bacteria, it also comes from the body.

ऐसा प्रायः सभी के साथ होता है। लेकिन हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित व्यक्तियों में सामान्य लोगों से अधिक पसीना आता है, क्योंकि उनमें पसीने की ग्रंथियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं। इसके कारण ज्यादा पसीना आने लगता है। तकरीबन 7 से 8 प्रतिशत भारतीय अधिक पसीना आने की समस्या से पीड़ित हैं। जब शरीर से निकलने वाला पसीना जब बैक्टीरिया के संपर्क में आता है तो शरीर से दुर्गध भी आती है।

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