Kahani Love Story | Love Story Hindi | Love Story

हेलो फ्रेंड्स आज मैं आपके लिए एक अनोखी kahani love story ले कर आया हूँ और मैं आशा करता हूँ आपको ये kahani love story बहुत पसंद आएगी

मुहब्बत की तौहीन होगी 

बैरिस्टर हैदर अली ने लम्बी चौड़ी महल नुमा कोठी, एकाऊन्ट नम्बर पाँच हजार सात सौ इक्यावन के बैंक की दस्तखत की हुई खाली चैक बुक और एक बन्द लिफ़ाफ़ा पकड़ाया तो उसे लगा कि एक एक करके सातों आसमान उस पर आ गिरे हैं। वह हवा में लटकी है। सर पर तना आसमान न रहे, पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक जाए तो ऐसा ही होता है। मर्द के मज़बूत सहारे की वजह से औरत सोसाइटी में सर उठाकर चलती है। बेयकीनी तो औरत को खुद की ही नज़रों में गिरा देती है। यह यक़ीन ही उसे हौसला देता है कि वह तूफ़ानों का रुख मोड़ दे और जब अपनी नज़रों में इन्सान गिर जाए तो तनी हुई गर्दन के साथ दूसरों का सामना नहीं कर सकता।

जावेद तुमने इतना न सोचा कि मैंने तो सारी कश्तियां जला कर तुम्हारा साथ दिया था। शुरूसे औरत मर्द पर भरोसा करती आई है और आखिर तक करती रहेगी। उसकी डोर थमाकर इन्तिज़ार की सलीब पर लटका दिया जाए तो वह सारे दुख हंसी खुशी झेल जाएगी। लेकिन जिस तरह तुमने बेईमान  किया उस तरह तो बेईमान  मैं कभी न थी।” बेचारगी का एहसास उसे तेजी से था।

वह जो बहुत मज़बूत हौसले की मालिक थी, तड़प तड़प कर रो रही थी। अन्दर की टूट फूट ने उसे तोड़ कर रख दिया था। टूटी हुई आरजुओं का सोग वह किस तरह मनाए कोई पूछने वाला न था। कोई ऐसा फैला हुआ दामन न था जिसमें अपने आंसू पौंछती। कोई हाथ ऐसा न था जो सर पर होता तो बेचारगी और बेबसी का एहसास मिट जाता।

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लोहे जैसे मजबूत हाथ पैरों की मालिक थी। बहुत पढ़ी लिखी, ज़हीन, हाजिर जवाब, हंसोड़ और तरहदार । समाजी रुत्बा था, ऊँचा मान था, समाज में एक जगह थी और कुछ कर गुजरने का हौसला और जज्बा था। ग्रेजुएशन के बाद उसने जर्नलिज्म में एडमिशन ले लिया। क़लम उसका हथियार और जर्नलिज्म उसकी पसन्द थी। वह लफ्जों की जंग लड़ना  चाहती थी।

मर्द की सोसाइटी में औरत को मनवाना चाहती थी। वह सोसाइटी में औरत की बेबसी और मजबूरी पर कुढती और उनके छीने हुए हकूक को वापस दिलाने की आरजुमंद थी।
उसका कहना था- “हक मिलता नहीं, छीना जाता है। औरत वह मोहरा है जिसे मर्द मतलब की बिसात पर अपनी ख्वाहिश के मुताबिक़ चलाता है।

दुनिया के किसी भी हिस्से में चले जाएं औरत बेबस और मजबूर है। डवलप्ड मुल्कों ने उसे आजादी का ख्वाब दिखा कर कम्पीटीशन की दुनिया में ला खड़ा किया ऊंची सोसाइटी में मर्द की नंगी हवस भरी निगाहों की जद में है। वह कोमल और हस्सास है जिसके जिम्मे पीढ़ियों की ट्रेनिंग और कौमों की तकदीर है। वह खुद अपना मुक़द्दर न संवार सकी तो दूसरों की तकदीर क्या बदलेगी? निचले गरीब तबके में वह खेतों,खलिहानों में काम करती है, भट्टों पर मजदूरी करती है, घर को संभालती है फिर भी सबने उसका एक्सप्लायटेशन किया।

मर्द के हर रूप, हर रिश्ते ने अपना हक मनवाया और फर्जन पहचाना । वह दुनिया में आती है तो बेनामसी खामोशी और उदासी उसका स्वागत करती है और ऐसी ही तारीफ़ का उसे सारी उम्र सामना करना पड़ता है। बेमतलब आती है और बेचारगी और बेबसी से दिन गुजारती है।”

ऊंचे आइडियल और ऊंचे मकसद के लिए उसने जर्नलिजम का सलेक्शन किया। वह उस आर्गेनाइजेशन में रिपोर्टर के रूप में आई फिर स्टुडेन्टस और औरतों के पन्ने की इन्चार्ज बनी। उसने अपनी सलाहियतों को मनवाया, काबलियतों का सिक्का बिठाया और सब एडीटर बन गई।

उसने साबित कर दिया था औरत सलाहियतों में मर्द से किसी भी तरह कम नहीं है। उसके आर्टिकल्स और रिपोर्टे तूफ़ान खड़ा कर देती थीं क्योंकि वह दिल से लिखती थी जिसका असर ज़रूर ही होता है। उसके क़लम में जान थी, लफ़्ज़ों के हुनर से आगाह थी, दलीलों के हथियार से लैस और बात कहने की आर्ट में पूरी तरह माहिर और होशियार। इसीलिए उसने अपने को मनवा लिया था।

उस दिन वह गैर मुल्की एम्बेसेडर के फंक्शन में थी। ऐसे फंक्शन जिनमें सोसाइटी का हर तब्का शामिल हो । ऐसी महफ़िलों में ढके छुपे लफ्जों में कितने सस्पेंस मिल जाते हैं। आफ़ दि रिकार्ड कितनी खबरें होती हैं,जानकारी से वाकफ़ियत और हालात से बाखबरी हो जाती
कितनी अच्छी गेदरिंग थी। उसे सब कुछ याद था। बीता हुआ हर लम्हा याद था। उसके साथी वसीम ने इन्ट्रोडयूस कराया- “यह मुल्क के मशहूर इन्डस्ट्रयलिस्ट और जानी पहचानी सियासी और समाजी शख्सियत मिस्टर जावेद हैं और आप…।”

जावेद ने हाथ उठाकर रुक जाने का इशारा दिया- “इनके बारे में कुछ बताने की जरूरत नहीं। हमने इनको बहुत पढ़, सुन रखा है। मिलने की ख्वाहिश थी सो आज पूर हो गई। मैडम माहिम अली! जैसा नाम वैसे गुन । ऐसी चान्द जिन्होंने घर, समाज और क़ौम को नाउम्मीदी के अन्धेरों से निकाल कर चार सू रौशनी और नूर बिखेरा है। तहरीरों के हवाले से कितनी बातें होती हैं।” उसे बहुत अच्छा लगा।

एक लिखाड़ी के लिए यह बहुत खुशी और गुरूर की बात होती है कि किसी ने उसे पढ़ा,याद रखा और उस पर अपना विचार पेश किया। दो और दो चार के चक्कर में फंसा और सियासी खेल में उलझा यह बन्दा कितना अच्छा लिट्रेरीटेस्ट रखता है । देसी ही नहीं पूरी दुनिया के लिट्रेचर पर उसकी नज़र थी, जानकारी का एनसाइक्लोपीडिया।यह तो दिल वाला ही नहीं सरापा दिल है। प्रेक्टिकल ज़िन्दगी में उस बन्दे ने दिलो दिमाग को कैसे बेलेन्स कर रखा है। जबान पर कमान्ड और लफ्जों के चुनाव में मोहतात । सिविलाइज्ड और सुलझा हुआ पॉलिश्ड बन्दा उस पर रौब डाल गया। उसे लगा कि वह काफ़ी हरदिल अज़ीज़ और इम्प्रेसिव पर्सनाल्टी है ।

हर एक से खुशी के साथ मिला, बातचीत के हुनर से आगाह और दूसरों को इम्प्रेस कर देने के आर्ट से आशना। अच्छा ज़हन, खूब इम्प्रैस करता था। हाजिर जवाबी और हंसोड़पन उसे पसन्द था। बहुत से लोग मिले जिनमें कोई न कोई काबलियत ज़रूर थी। उसे ऐसे लोगों से मिलने की तमन्ना थी जिनसे इन्सान कुछ न कुछ सीखता है। लेकिन बहुत से गुन एक ही जिस्म में इक्टठे देखकर वह खुशी से फूलीन समाई। उस पहली ही मुलाकात से शनासाई का दर खुल गया।

दूसरे दिन उसका फोन आया। वह जो बहुत लिए दिए रहती थी, न उसे फुर्सत थी न वक्त था, उसे उसका इन्तिज़ार रहने लगा। उसकी गुफ्तगू खूबसूरत थी। वह बोलता जाए, बोलता जाए और वह खामोशी से सुनती जाए। यह कैसी सेन्द लगाई थी जावेद ने कैसी नकब ।

Kahani love story based on real-life story…

माहिल अली हारती चली गई। किसी के आगे ढेर हो जाना भी कितना अच्छा लगता है, कैसा वार कर गया था वह। उसे वह वक्त याद आ रहा था, अल्हड़ और बेफ़िक्री का वक्त जब उसने इन्टरपास की और थर्ड ईयर में दाखिले के लिए सब्जेक्टस चुनने का मसअला था। आप्शनल सब्जेक्ट के रूप में उसने इंगलिश लिट्रेचर और पालिटिक्स को आंखें बन्द करके ले लिया लेकिन जब अरबी, फारसी सलेक्ट करने की बात आई तो वह फैसला नहीं कर पा रही थी कि क्या ले। फिर उसने दोनों सब्जेक्टस के दो तीन पीरियड अटेन्ड करने का प्रोग्राम बनाया ।

अरबी ज़बानी कुनि शरीफ की हद तक आती थी और जब फारसी की क्लास में गई तोउसने मिसेज अनवर से कर दिया- “मैडम! मैं पर्शियन लेना चाहती हूँ मगर मैंने कभी इसे पढ़ा नहीं सिर्फ थोड़ी सी जानकारी जरूर है।” मैडम हंसकर बोलीं- “सारी फारसी तो तुम्हें आती है। अब क्या मुश्किल है ? ” उसे मिसेज अनवर अच्छी लगीं और इस तरह फारसी के सलेक्शन का मरहला तय पा गया। मिसेज अनवर के पीरियड का सबको बेकरारी से इन्तिज़ार होता ।

वह शैखसादी की गुलिस्तां बोस्तां पढ़ातीं । हिकायतें कितनी दिलचस्प और सबक सिखानेवाली थीं। फ़ारसी में कितनी मिठास है। मिसेज़ अनवर के पढ़ाने का अन्दाज, गपशप, बहस, मुबाहिसे में पीरियड खत्म होने का एहसास ही न होता। वह क्लास को साथ लेकर चलतीं और यह दिलचस्पी आखिरी वक्त तक बरकरार रहती। गुलो बुलबुल, आशिको माशूक और मुहब्बतो महबूब की बहस हो रही थी। मिसेज़ अनवर ने हंसकर पूछा- “पहल आशिक की तरफ़ से होती है या माशूक की तरफ़ से ?”

टॉपिक काफी दिलचस्प था। पूरी क्लास भरपूर इन्ट्रेस्ट ले रही थी। हरएक अपनी सोच और बिसात के हिसाब से जवाब दे रहा था। आधी क्लास का जवाब सही था मगर क्यों और कैसे के मरहले पर बात अटक रही थी। और फिर मिसेज़ अनवर ने बताया कि पहल माशूक की तरफ़ से होती है।

मुहब्बत की कशिश उसे आशिक बनाती है । इश्क में पहल कौन करता है, क्यूपिड का तीर किधर से आता है,वार पहले कौन करता है? मगर जद में जो भी आता है होशो हवास खो देता है। घाटे भले की फ़िक्र नहीं रहती। इस राह में हार जीत की बात नहीं रहती। जज्बे की ताकत का उसे अब एहसास हुआ था। एक लम्हे में सदियों का फासला तय हो जाता है ।

एक पल हज़ार बरसों का हो जाता है। न मानने पर आओ तो सदियां यूं ही गुजर जाएं ओर हंसने पर आओ तो बेखबरी में लुट जाओ । मगर कैसी अनोखी और पाकीज़ा हार होती है, सरशार कर देने वाली हार। वह फंक्शन से लौटी तो पूरी रात नीन्द आंखों से गायब रही। जिन्दगी में खुशियां भी आयीं, कामयाबियाँ भी मिलीं मगर ऐसी बेखुदी कभी नहीं हुई। वह दो आंखों के हिसा  (घिराव) में थी। पहचान देती और बोलती आंखें।

वह दूसरों से बातें करता रहा । हर एक से मिला, मगर ऐसा लगा कि दो आंखें सिर्फ उसी से कुछ कह रही हैं । ऐसी बात जो आंखों से सीधी दिल में उतर जाती है । अनहोनी होनी हो गई। अनकही कही बन गई । लफ्ज गूँगे  मगर एहसासात बोलते थे। फिर यह सिलसिला चल निकला । फौन, पैगाम, तार, वह जहां कहीं होता दुनिया के किसी भी हिस्से में, बिजनिस मीटिंग में, कितना ही बिज़ी होता उससे बाखबर रहता। मुलाकातें,सलाम, पैगाम, यह सिलसिला लम्बा खिंचता चला गया।

वह जो घर वालों से कोई बात नछुपाती थी बचपन से पापा की लाडली थी, दिन भर की कहानी, सहेलियों की बातों, अपनी टीचर्ज, पढ़ाई, हर बात को मजे ले लेकर सुनाती और पापा भी सब बातें बड़ी दिलचस्पी से सुनते थे। बाप बेटी का रिश्ता न था। जबरदस्त अन्डर स्टेन्डिंग थी। वह उस पर अन्धा यकीन करते और वह इस पैमाने पर हमेशा पूरी उतरी।

हर बात, हर मामले में उनसे मशवरा लेती। उसे याद था कि पापा ने बरसों पहले कहा था- “खानदानी शराफ़त को हमेशा याद रखना । मुझे तुम पर भरोसा है । इस यकीन के साथ कि तुम इस भरोसे को कभी ठेस न पहुंचाओगी।” यही भरोसा उसे हौसला देता, कामयाब रखता। पापा बिन कहे बात समझ जाते । वह उस मुकाम पर थीजहां बात ख़ानदानी वकार और इज्जत की न थी।

अब तो समाज में उसकी अपनी एक हैसियत थी । उसका नाम इज्जत से लिया जाता। ऊंचा मान अपनी पहचान, वह कान्फिडेंट भी थी और इज्जतदार भी। अपने साथियों में कामयाब और बलन्द । उसका नाम था और इर्द गिर्द शौहरत का हाला था। वह जो दूसरों का मजाक उड़ाती थी, समझाती, नसीहतें करती, किस वक्त के बड़े बोल की पकड़ में आ गई । शायद यह जज्बे इसी तरह इन्सान को अक्ल से बेगाना कर देते हैं। मुहब्बत ज़रूरत को नहीं समझती। मुहब्बत निडर बना देती है और यह जज्बा इन्सान को कुछ कर गुजरने का हौसला देता है।

इस बेखबरी में उसने जावेद के साथ कितनी ही मन्जिलें तय कर डालीं। कितने फ़ासले तय कर डाले और जब खबर हुई तो उसे पता लगा कि जावेद के बिना जिन्दगी गुजारना मुश्किल होगी। उसने लम्हे लम्हे का हिसाब लगाया। तीन साल गुज़र गए। पीछे मुड़ेगी तो पत्थर की हो जाएगी । कैसा जादू था, उस कैद पर लाखों आज़ादियां कुर्बान । अब तो शिकारी की कैद से रिहाई पाएगी तो मर जाएगी। हर इन्सान इम्पोर्टेंस चाहता है। चाहे और चाहे जाने का जज्बा नेचुरल है। वह पल पल उससे आगाह था, लम्हा लम्हा उससे बाखबर ।

वह बेपरवा लड़का न था और न ही जवानी दीवानी वाला मुआमला था। वह चालीस के लपेटे में था। एक बीवी का शौहर और तीन बच्चों का बाप । उसने बताया था कि उसकी शादी अरेन्ज्ड मैरिज थी। बाहर से एम. बी. करके आया तो चचा की लड़की से जो बी.ए. की स्टूडेंट थी, शादी हो गई। बाप और चचा का सांझा कारोबार था और यह सांझा खाता उसी तरह चल रहा था। बाप के मर जाने पर जायदाद की तकसीम नहीं हुई थी। दोनों खानदान आपस में घुले मिले हुए थे और इस मिलन की मिसालें दी जाती थीं । ज्वाइन्ट फैमिली सिस्टम, इस ज़माने में जब रिश्ते नाते ढीले पड़ गए हैं बहुत कामयाब था। अगर मर्द समझदार और बेलेन्स करने वाला हो, औरत को मर्द पर भरोसा हो कि उसके हुकूक ख़त्म नहीं होंगे, उसके बच्चे नज़र अन्दाज़ नहीं किए जाएंगे तो वह मर्द की खुशी के लिए सब कुछ निसार कर देती है। और यह गुण उस फैमिली की औरतों में था।

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इस ताल मेल को और मजबूत करने के लिए जावेद और मरियम की शादी कर दी गई। जावेद ने बुजुर्गों के फैसले को नसीब का लिखा समझ कर सर झुका दिया । खूब गुज़र रही थी। वह बाप और चचा के कारोबार में शरीक था। अन्दर बेनाम सा वैक्यूम था जो पारे की तरह बेचैन और बेकरार रूह का मालिक था, हरदम एक्टिव । वह तेज़ी से तरक्की की मन्जिलें तय करने का आरजुमंद था। ऐसी जीवन साथी का ख्वाहिश  जो सारे ख्वाबों, ख्यालों और सोचों में उसके साथ साथ हो, हर काम में शरीक हो।

Kahani love story based on real-life story…

मरियम के साथ ज़हनी अन्डरस्टेन्डिंगन थी जो क़दम ब क़दम उसके साथ चले, कन्धे से कन्धा भिड़ाकर आगे बढ़े। अंग्रेज़ी कहावत है हर महान आदमी के पीछे एक औरत होती है। वह कह रहा था- “मैंने तुम जैसी औरत के साथ रहने के सपने देखे थे। अगर तुम न मिलतीं तो मैं समझता सब कुछ नज़र का धोका है। आइडियल तो बनाए जाते हैं, दिल में होने के हैं,जहन में स्पेस बनाए जाते हैं मगर प्रेक्टिकल ज़िन्दगी में यह सब कुछ नहीं होता। हां, तुमसे  मिलने के बाद पता चला यह सच है।”

माहिम सोच रही थी “हम औरतें भी कितनी मूर्ख होती हैं। रेत के घरोन्दों से बहल जाती हैं। इस हद तक मतलबी हो जाती हैं कि अपनी ही जैसी औरत के हक़ पर धावा बोल देती हैं । उसे ही कुसूरवार ठहराती हैं । वह बेकसर होकर भी कुसूरवार हो जाती हैं । और वह जल्म करने वाला बेकुसूर हो जाता है। पल पल बदल जाने वाला तमामतर हमदर्दियों को अपने लिए समेटना चाहता है। हां मर्द जिसने मुकाबले और कम्पीटीशन की दुनिया का सामना करना है, ऐसी दर्दमंद औरत का साथ चाहिए कि जब थका हारा घर पहुंचे तो सारी थकन अपने हाथों पर ले ले।

उसे नया हौसला, जोश दे ताकि वह मुकाबले के लिए तैयार रहे । मर्द ही दुनिया को जीतता है।” उसने के समाज को देखा, जर्नलिज्म के मैदान में वह औरत के हुकूक की जंग लड़ने निकली और एक मर्द ने अपने हक़ और मजलूमी का फरैरा उसके हाथ में थमा दिया। उसे भी ऐसे ही मर्द की तलाश थी जो चार कदम उससे आगे चले। जिसके पीछे चलते हुए उसे तसल्ली हो कि कोई उसका रखवाला है।

उसे सिक्युरिटी देगा, उसके हक़ खत्म नहीं होने देगा जिसका नाम उसे इज्जतदार बनाएगा। जिसकी पहचान उसे गुरूर का एहसास कराएगी।

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वह अपनी ज़ात के हवाले और पहचान की जगह किसी और नाम की पनाह चाहती थी। और जब मामला घर तक पहुंचा तो मानो तूफान आ गया। उसमें किस चीज़ की कमी थी ? खूबसूरत, ज़हीन, अच्छी पढ़ी लिखी, बड़ा ओहदा, रुपया पैसा, बाप का ऊंचा स्टेटस भाइयों की समाज में इज्जत,वह सब कुछ मौजूद था और रिश्तों की भी क्या कमी थी । खानदान में एक से एक और तलबगार ।

वह किसी के लिए मानकर ही न दे रही थी। खानदान से बाहर मिलने जुलने वाले और जान पहचान के इस खानदान से रिश्ता जोड़ने के ख्वाहिशमंद थे । घर में सब एक दूसरे को कुसूरवार ठहरा रहे थे। “पापा ने उसे ढील दे रखी थी।” बहनों ने शिकवा किया।

अम्मी  ने हर एक पर कड़ी नज़र रखी मगर उसको खुला छोड़ दिया। भाइयों के इतिहाई प्यार ने उसे सर चढ़ा रखा था। सबने उसे समझाने की कोशिश की। वह जो सारी ज़िन्दगी बहुत नाजों से अपनी डिमान्ड मनवाती आई थी उसकी हर ख्वाहिश बिन कहे बाबा पूरी कर देते थे, उसे भरोसा था कि अब भी उसकी बात को सब मान लेंगे। मगर यहां तो एक तूफ़ान था जो थमने का नाम ही नहीं ले रहा था। एक ‘ना’ थी जो `हाँ ‘ में नहीं बदल रही थी।

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“लोग क्या कहेंगे? रिश्तेदार ताने देंगे।” सबका ख्याल था कुछ वक्त की और मौहलत दो, इसकी फ़िक्र न करो। वक्त के साथ चढ़ती नदी उतर जाएगी। मगर यह नदी तो उतरने का नाम ही नहीं ले रही थी।

वह भी जिद की पक्की और बात की धनी थी। भाभियों ने समझाया- “तुम अनोखी, निराली और कुछ अजीब लड़की हो । इस वक्त “जिद में हो,तम एक बंटे हुए मर्द के साथ जिन्दगी नगुजार सकोगी।सुनहरे सपने बुनना और बात है और सपनों से ज़िन्दगी नहीं संवरती । हक़ीक़त कड़वी होती है ।

इस मुश्किल में कड़ा सफ़र न कर सकोगी। कड़वी हक़ीक़त क़दम कदम पर ताना मारेगी। सौतन के साथ तपते रेगिस्तान में चलना तुम्हें बहुत महंगा पड़ेगा। लोगों की चुभती नज़रों का सामना न कर सकोगी। मुहब्बत में बंटवारा तुम्हें तोड़ फ़ोड़कर रख देगा और फिर त्याग, कुर्बानी वफा, और चाहत जैसे कोमल लफ्ज शादीशुदा जिन्दगी से निकल जाएगे और हसद, जलन और तड़प रह जाएगी। तुम इस तरह बिखरोगी कि खुद को समेट न सकोगी। महबूबा और बीवी में बड़ा फर्क है। और यह हकीकत जब तुम पर पत्थर मारेगी तो सह न सकोगी।”

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__सारी दलीलें बेकार रहीं, हर लॉजिक फेल हो गयी। हर मुहब्बत, हर रिश्ता हार गया। कायनात में सिर्फ वही वह रह गया। मुहब्बत और कुर्बानी साथ साथ चलते हैं। किसी ने ताज और तख्त लुटाया, किसी ने नातों रिश्तों को छोड़ा और किसी ने खंजर  मार कर ही अपना काम तमाम कर लिया।

कोई नाकाम हुआ तो रेगिस्तानों में घूमता फिरता रहा। उसमें कश्तियां जला देने का हौसला था। “जावेद ! तुम ज़िन्दगी की राह में संग संग चलो तो कोई पछतावा न सताएगा। तुम्हारा हाथ थाम कर जिन्दगी में आने वाले तूफान का रुख मोड़ने का हौसला रखती हूं।” “तुम मिल गयीं तो कोई दूरी न सताएगी, कोई पछतावा नहीं होगा। ” उसे जावेद पर पूरा भरोसा था जिसने आकाश से तारे तोड़ने की कसम खाई हो या नहीं, उसके लिए पूरे खानदान से टकरा गया। मरियम बिखर गई- “मुझे तलाक दोगे तो दूसरी शादी करना।

डैडी दीवार बन गए- “मैं सारी ज़िन्दगी बच्चों की शक्ल नहीं देखने दूंगा।” अम्मी बिफरी शेरनी बनी गरज रही थीं- “खानदान बिखर कर रह जाएगा। एक बार टूटे रिश्ते कभी जुड़ नहीं सकेंगे। दिल के शीशे में एक बार बाल आ जाए तो कभी नहीं जाता। खानदान जिसके इत्तिफ़ाक़ और मेल की मिसालें दी जाती हैं वह लोगों में तमाशा बन जाएगा। जावेद ! इस घर को तमाश न बनाओ।”

वह मरियम को छोड़ना नहीं चाहता था मगर माहिम  कोहासिल करना भी उसकी आरज़ू  थी। बच्चे उसे कायनात में सबसे ज्यादा प्यारे थे मगर वह तकमील चाहता था। खानदान का इत्तिफाक वह भी चाहता था मगर अपनी ज़ात को बिखेरना नहीं चाहता था। मरियम खानदान में वापस आ गई। डैडी ने उसे अपने खानदान से निकाल बाहर किया। सबका ख्याल था कि इस तरह वह पलट आएगा,नशा उतर जाएगा।

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_ उसे अपने बाजुओं की ताक़त पर यकीन था और दुनिया से टक्कर लेने का हौसला। कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। वह तो उसके लिए सब कुछ लुटाने को तैयार था। वह कैसे कदम पीछे रखता जो उसके लिए दुनिया से लड़ने निकला था।

_ वह उससे कह रहा था- “अगर तुमने साथ दिया तो दुनिया से टकरा जाऊंगा। अगर तुमने कदम पीछे हटाया तो मैं कहीं का नहीं रहूँगा। तुम्ही मेरा हौसला हो और मेरी ताकत हो।” इसीलिए तो कहते हैं मुहब्बत अन्धी होती है। मुहब्बत अन्धी ही नहीं होती, गूंगी और बहरी भी होती है। जो देखना चाहता है उसके अलावा कुछ नज़र नहीं आता। जो सुनना चाहता है उसके अलावा उसे कुछ सुनाई नहीं देता। और फिर घर वालों ने उसकी ज़िद और हटधर्मी के आगे सर झुका दिया मगर बहुत ही खामोशी और मजबूरी के साथ । बहुत ही बेदिली के साथ इस फ़र्ज़ को निभाया।

जावेद कुछ दोस्तों के साथ आया और खामोशी के साथ वह उसकी ज़िन्दगी में आगई। न उसके नाम की मेहन्दी लगी, न सखियों ने ढोलक बजाई, न गीत गाए, न शोर न हंगामा। इस खानदान की शादियां तो बड़े धूम धड़ाके से होती थीं। पैसा पानी की तरह बहता था। नाक ऊंची रखने का ख़ानदान का यही अन्दाज़ था। उसके लिए भी बहुत से अरमान थे। लोग क्या कहेंगे, बातें सुनने का हौसला न था। उसने सब कुछ सह लिया, होन्टों को सी लिया। इसमें सारा कुसूर उसका अपना था। काश! घरवाले ही मेरी ख्वाहिश समझकर झुक जाते।

Keep Reading This Kahani love story written by ;- Haaris Hassan

उन दोनों ने अपने आप को मनवाया था और देखते देखते ही कारोबार दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की करता गया। हर रोज़ ईद होती थी। किसी की हौसला अफजाई आगे बढ़ने में मदद देती है और कभी दूसरों को नीचा दिखाने में मदद देती है औरकभी दूसरों को नीचा दिखाने के लिए ताक़त आती है। यही वलवला, जोश और उमंग थी जो पारे की तरह मौजूद थी। माहिम को जावेद के साथ ने ज्यादा कान्फ़िडेंट बना दिया। वह जर्नलिज्म के मैदान में धूम मचाए हुए थी। अब समाज में ज्यादा इज्जतदार थी मगर जाने किसकी नज़र लग गई।

जावेद के घर वालों ने जब देखा कि वह हारा नहीं तो उससे रिश्ता जोड़ने की कोशिशें होने लगीं। इन्सान अपनी अस्ल से ज्यादा देर अलग नहीं रह सकता। दुनिया में सिर्फ एक मुहब्बत ही नहीं। मुहब्बत तो बहुत से लोगों, तअल्लुक और रिश्तों से होती है। एक इन्सान के गिर्द ही पूरी कायनात नहीं होती।

इन्सान की मुहब्बतें तो बहुत से रिश्तों में बिखरी पड़ी हैं। उसमें से कोई एक भी न हो तो ज़िन्दगी में कमी और अधूरापन रह जाता है। तकमील सबके साथ है। उसे भी उन सारे रिश्तों की याद सताने लगी जिनके साथ जुड़ा हुआ था। माँ – बाप  की मुहब्बतें उसे तड़पा जातीं। मरियम में कितने बहुत से गुण थे, उसे एक एक करके याद आते। सच है जो चीज़ हमारी ग्रिप में हो उसकी कोई कीमत नहीं होती।

जब वह हाथ से निकल जाती है तो कीमत का एहसास होता ,बच्चों की याद उसे रुला देती। औलाद को इसीलिए इम्तिहान कहा गया है। सारा जोश, वलवला और उमंग उसके साथ है वरना वह अधूरा और इन्कम्पलीट ही रहेगा। हवा में लटका हुआ जिसके पांव जमीनसे उखड़े रहेंगे। वक्त ने बहुत से घावों पर फाहा रख दिया । बहुत से घाव ठीक हो गए। समझौता करने का ख्याल आ गया, वक्त की ज़रूरत यही थी। उसके पास पैसा था और पैसा बहुत कुछ संभाल सकता है। उसने मरियम के लिए अलग घर लिया। माहिम कोलगा सच्चाइयां उस पर पत्थर मार रही हैं। एक एक लफ्ज़ उसके कानों में गूंजता । वह होश उड़ाने को काफी था।

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“मुहब्बत बंटवारा गवारा नहीं करती। सौतन से जलन और हसद औरत का पैदाइशी हक़ है । बंटे हुए मर्द के साथ ज़िन्दगी गुज़ारना कितना मुश्किल है। हरदम घड़का, बेनाम सा डर।” कितने बहुत से खदशे और डर उसे डसते। कितने वसवसे उसे तंग करते । अच्छा ख्याल ज़हन में आता ही नहीं था। कुर्बानी और वफ़ा किताबों में लिखे खूबसूरत अल्फाज़ हैं। शादीशुदा ज़िन्दगी में अपने मीनिंग खो देते हैं।

वह तो पूरी तरह उसे पसन्द करती थी। शेयर करना कितना मुश्किल है। खूबसूरत लफ्ज मुहब्बत में डूबे हुए जुमले, जादू कर देने वाले अल्फाज़ उसे खुश न करते। जैसे यह सब दोहराए जा रहे हों, बटते हुए हों। उसे ऐसा लगता यह मर्द तो कभी उसका नहीं था। घर में रोजाना लड़ाई रहने लगी। बात बेबात झगड़ा, डिफेन्सिस, बदगुमानी तन्ज के तीर चलते। वह मान सम्मान कहां गया ?

बेसुकूनी सी बेसुकूनी थी। उसकी जहानत, हाजिर जवाबी, हंसोड़पन जिसको वह पसन्द करता था अब उसकी जबानदराज़ी बन गई।
और उस दिनतो कयामतही आगई जब जावेद ने उसे ताना दिया- “तुम पर भरोसा कर लू जिसने मां-बाप, बहन भाइयों की भी परवा न की।”उसे लगा उस पर कयामत टूट पड़ी है।

वह तो यह नश्तर चुभो कर चला गया था मगर उसकी आंखों से सैलाब बह रहा था। उसे तन-मन की सुध न थी। अन्दर बाहर आग का दहकता हुआ अलाव था। जनवरी की बर्फीली सर्दी में वह जल रही थी। ठन्डे बर्फ पानी के कितने ही गिलास उसने अपने अन्दर उन्डेले मगर गर्मी थी कि कम नहीं हो रही थी।

लगातार तीन दिन औरतीनरातें उसनेबेपानी की मछली की तरह गुज़ार दी। यह तीन दिन न थे, तीन सदियां थीं जो उस पर से गुज़र गयीं। मेरा ख्याल तो यह था जावेद तुम मेरे एहसान तले दबे रहोगे। मैंने तुम्हारे अलावा किसी को सोचा तक नहीं और जब मुआमला सलेक्शन का आया तो मैंने पूरी दुनिया में तुम्हारा चुनाव किया । तुम्हारी कीमत पर मैंने किसी को कबूल नहीं किया कि तुम मेरी कुर्बानी की कद्र करोगे और मैं ज़िन्दगी भर तुम पर नाज़ करती रहूंगी। लेकिन तुम मर्द भी क्या होते हो।

___उसे लगा जैसे अब उस बन्दे के साथ एक पल गुज़ारना भी मुहब्बत की तौहीन होगी। वह बेएतबार होकर उसका साथ न दे सकेगी और फिर वह अपने वकील के जरीये उससे अलग हो गई। जावेद अदालत में नहीं जाना चाहता था मगर किसी का हक़ भी नहीं मारना चाहता था इसलिए बैरिस्टर हैदर अली के जरीये लम्बी चौड़ी कोठी, बैंक बेलेन्स और तलाक मिल गई। मर्द की मुहब्बत और सखावत ने उसके हुकूक
उसके घर पहुंचा दिए थे। वह जो औरतों के हकों के लिए बाहर निकली थी उसने अपना हक पा लिया था या छीन लिया था। वह पाताल में धंसती जा रही थी नीचे और नीचे।

दोस्तों! आपको ये kahani love story कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ताकि हम आपके लिए इसी तरह की kahani love story ले आ सके – धन्यवाद 

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