Desi stories hindi for kids // भलाई का फल 

प्यारे बच्चो- आज हम आपके लिए desi stories hindi ले कर आये हैं जो आपको बेहद पसंद आएगी , दरअसल ये desi stories hindi कहानी एक छोटे से गाँव की है | 

भलाई का फल 

गाँव की तीन औरतें तालाब पर पानी लेने गईं। तीनों के पास तीन बड़े-बड़े घड़े थे। पानी लाना उनका रोज का नियम था।उस दिन तालाब में पानी बहुत कम था। रेशमा और सलमा ने पानी पहले ही भर लिया। रुखसाना का घड़ा किसी तरह भर पाया।वे पानी लेकर लौटने लगी, तो रास्ते में आम का पेड़ आया। तभी पेड़ से एक आवाज आई-“क्या कोई मुझे पानी पिलाएगा?”रेशमा और सलमा झल्लाने लगीं। उन्होंने कहा-“हमारा पानी हमारे बच्चों के लिए है। अपनी प्यास बुझाने के लिए बादलों का रास्ता देखो।”पर रुखसाना ने कहा-“बादल न जाने कब आए और बरसे,मैं अपना पानी इसे पिला देती हूँ।” उसने घड़े का पानी पेड़ के तने में डाल दिया। खुशी से आम की डालियां झूम उठीं।

रुखसाना दोबारा पानी लेने चली गई। तालाब में पानी बेहद कम था। काफी समय बीतने पर रुखसाना का घड़ा भर पाया। तीनों फिर से साथ-साथ घर की ओर बढ़ने लगीं।गाँव की तीन औरतें तालाब पर पानी लेने गईं। तीनों के पास तीन बड़े-बड़े घड़े थे। पानी लाना उनका रोज का नियम था। उस दिन तालाब में पानी बहुत कम था। रेशमा और सलमा ने पानी पहले ही भर लिया। रुखसाना का घड़ा किसी तरह भर पाया। वे पानी लेकर लौटने लगी, तो रास्ते में आम का पेड़ आया। तभी पेड़ से एक आवाज आई-“क्या कोई मुझे पानी पिलाएगा?”रेशमा और सलमा झल्लाने लगीं। उन्होंने कहा-“हमारा पानी
हमारे बच्चों के लिए है। अपनी प्यास बुझाने के लिए बादलों का रास्ता देखो।”पर रुखसाना ने कहा-“बादल न जाने कब आए और बरसे।

पहले आम का पेड़ आया। पेड़ ने कहा-“बहन, तुमने मेरी प्यास बुझाई है। लो,अपने बच्चों के लिए फल लेती जाओ ।”और तभी कई आम नीचे गिर पड़े। रुखसाना ने आम अपने आंचल में बांधे और आगे बढ़ गई। अंत में जामुन का पेड़ आया। जामुन ने कहा-“मेरी अच्छी बहन, आंचल में जगह बची हो, तो कुछ जामुन भी लेती जाओ।”कुछ जामुन नीचे आ गिरे, तो रुखसाना ने उन्हें भी किसी तरह अपने आंचल में लपेट लिया। वह घर आ गई।

___ बच्चों ने इतने सारे फल देखे, तो वे खुशी से झूम उठे। मगर जब उन्होंने घड़ा देखा तो पूछा-“मां, तुम पानी क्यों नहीं लाई? क्या हम फल खाकर प्यासे ही रहेंगे?”मां ने सारी बातें बता दी। बच्चों ने मां को दिलासा दिया। कहा-“मां, घबराओ मत, ये फल ही हमें पानी लाकर देंगे।”तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। रुखसाना के बड़े बेटे ने देखा कि रेशमा और सलमा वहां खड़ी हैं। उन्होंने कहा-“बेटा, घर में कुछ खाने का हो, तो मां से पूछकर दे दो। हमारे बच्चे भूखे हैं।” बड़े बेटे ने कहा-“पहले आधा घड़ा पानी लाओ, तब मैं आपको थोड़े फल दूँगा।”रेशमा और सलमा फटाफट आधा-आधा घड़ा पानी ले आईं। लड़के ने पानी लेकर उन्हें कुछ फल दे दिए। दोनों उसे दुआएं देकर लौट गईं।

बच्चों ने माँ से कहा- ”माँ , अब हमारे पास फल भी हैं और पीने के लिए पानी भी। आओ, हम लोग फल खाएं।”तभी दरवाजे पर फिर कोई आवाज आई। इस बार वहां एक फकीर बाबा खड़े थे। फकीर ने कहा-“मैं भूखा और प्यासा हूँ। क्या कुछ मिलेगा?”बच्चे दौड़कर फल और पानी ले आए। फकीर फल खाकर और पानी पीकर बड़े खुश हुए। उन्होंने दुआ देते हुए कहा-“तुम्हारा रहम कभी बेकार नहीं जाएगा। तम सभी हमेशा आबाद रहोगे।”फकीर बाबा  के  चले जाने के बाद माँ  और बच्चे बचे हुए फल खाने लगे और पानी पीने लगे। उन्हें इन चीजों में एक गजब का स्वाद मालूम हो रहा था।

प्यारे बच्चो- ये कहानी desi stories hindi आपको कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ,हमे आपके फीडबैक का इंतजार रहता है | 

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