Stories in hindi funny for kids // सनकी साहब

प्यारे बच्चो-  आज हम आपके लिए stories in hindi funny ले कर आए हैं जिसे पढ़ कर सभी बच्चे हँस-हँस कर लोट्पोट हो जाएगे | बच्चो stories in hindi funny ये कहानी एक सनकी इंसान की है | 

सनकी साहब 

क  सनकी साहब थे, इन पंक्तियों के लेखक की तरह वह सनकी हमें ही न समझ लीजियेगा । हमें तो सिर्फ ऊटपटांग कहानियाँ  लिखने की ही सनक है । पर यह जो किस्सा सुना रहा हूँ कोई कहानी नहीं, सच्चा किस्सा है । एक दिन हम आजाद हिन्द होटल में बैठे थे । एक साहब आये और हमारे सामने वाली कुर्सी पर जम गए । अपनी शर्ट के बटन खोलकर फूँक  मारकर पसीना सुखाने लगे । जब पसीना सूख गया तो उन्हें याद आया कि कण्ठ भी सूख रहा है, इसलिये वह पूरी ताकत से चिल्लाये – ” वेटर  (Waiter)  ठण्डा पानी लाओ एकदम गरमा गरम ।”वेटर फौरन ही उन्हें ख्याल आया कि मैं गलत बोल रहा हूँ, इसलिये संशोधित वाक्य के साथ पुनः बोले – “बर्फ डाल कर एकदम ठण्डा पानी लाओ ।”  यंत्रवत पानी का गिलास मेज पर पटक कर चला गया । पानी पीने के बाद उन्होंने एक लंबी डकार ली जैसे बहुत कुछ खा लिया हो ।  वेटर आर्डर लेने के लिये दुबारा आया । उन्होंने पूछा – “क्या-क्या तैयार है ?” वेटर अपने खास लहजे में फटाफट कहने लगा – “रूखी चपाती, चुपड़ी चपाती, परांठे, आलू का साग, गोभी का साग, मटर, चावल, कढ़ी, सूप, दही, हलुआ, पापड़, वगैरा वगैरा ।”
वेटर को खाने के नाम के बाद ‘वगैरा’ कहने की बुरी आदत थी। ‘वगैरा-वगैरा ।” सनकी ने शब्दों  पर बल डालकर कहा ।
“जी हाँ, वगैरा वगैरा ।” वेटर ने मजाक-मजाक में कह दिया ।
अब क्या था, सनकी साहब, वगैरा-वगैरा को पकड़कर बैठ गये । ‘एक प्लेट वगैरा लाओ । हम आज वगैरा ही खाएंगे। ऐसी डिश हमने आज तक न देखी सुनी । “देखी सुनी तो मैंने भी नहीं हुजूर ।” “अभी-अभी कह रहे थे।” “वह तो मेरी आदत है साहब ।।

अपन लोग तो यूं ही कह देते है वगैरा मैं छोटी-मोटी चीजें आ जाती है, अब आप फरमाइये, क्या लाऊँ ।”
“मेरा भेजा।” सनकी बिगड़कर बोला ।
__साहब वो तो खाली ही लगता “क्या कहा ?”
“आपको पता नहीं, मैने क्या कहा ?”
“नहीं ।”
“तो समझ लीजिये मैंने कुछ भी नहीं कहा ।

अच्छा अब फरमाइये आपके लिये क्या लाऊं । “कह दिया न, वगैरा वगैरा लाओ ।”

“वह तो नहीं है ।”नहीं है? कैसे नहीं है ? क्यों नहीं है? कब से नहीं है?
कहाँ है तुम्हारा सेठ ?”
 जोर का हल्ला सुनकर होटल का मालिक पंजवानी खुद ही सनकी साहब की मेज के पास आ गया । “क्या बात है साहब, क्यों शोर मचा रहे हैं? घर से झगड़ कर आए है क्या ?”
“मैं घर से नहीं,रेलवे स्टेशन से आ रहा हूँ।” सनकी ने कहा-“तुम्हारा यह वेटर  कितना बदतमीज है आपने कभी इस बात का अन्दाजा लगाया है ?
 “क्या बदतमीजी की इसने ?” पंजवानी ने पूछा ।

इस वेटर ने सनकी के मुँह पर टेप की तरह हाथ रखकर सेठ को समझाना शुरू किया । सेठ अपन नि रोज-रोज की तरह यूँ खाली खोली
वगैरा वगैरा बोला । ये सा’ब अकड़कर अमचर हो रे ला है कि वगैरा वगैरा लाओ ।”
 “वगैरा वगैरा ।” पंजवानी बड़बड़ाया । फिर उसे सारी बात समझ में आ गई । उसने सनकी का कंधा थपथपाते हुए कहा – गरम न होइये जनाब । हम किसी ग्राहक को नाउम्मीद नहीं लौटाया करते । आपको वगैरा  वगैरा चाहिये ।
वह मिलेगा । लेकिन इसके लिये आपको तीन सौ  रुपये एडवांस देने होंगे । यह हमारा दस्तूर है।”
सनकी को सनक सवार थी । सनक सनक में तीन सौ रुपये निकाल कर दे दिये । रुपये जेब में खोंसते हुए  पंचवानी किचन में गया और कुछ हिदायतें देकर पुनः काउण्टर पर चला आया ।

इधर सनकी सोचने लगा। वगैरा वगैरा का आर्डर दे तो दिया है। पता नहीं, ये लोग क्या चीज लाकर रख दें। यहाँ किसी से जान-पहचान भी नहीं है।अगर बात झगड़े तक पहुँची तो वह कैसे निपेटगा? अच्छा होता इस जिद को रेलवे के लोगेज रूम में जमा करवाकर आता । लगभग आधे घण्टे बाद एक डिश वगैरा वगैरा को ग्राहक की मेज पर रख दी गई। सनकी ग्राहक ने प्लेट जो देखी तो उसे उबकाई आ गई। थर्रा के आँखें मूंद ली । उस प्लेट में गोभी, आलू, दालों, चावलों, पूड़ियो आदि के टुकड़े मिले हुए थे। बस यूँ समझ लीजिए जूठा डालने की टोकरी में जैसा होता है वैसा ही उस प्लेट में रखा था । वास्तव में सारा पकवान जूठन ही था । 

आधे घण्टे में ग्राहक अपनी-अपनी प्लेटों में जो जूठा छोड़ गए थे उसे कुत्तों के सामने डालने की बजाय सनकी के सामने रख दिया गया था ।
सनकी गला फाड़कर चिल्लाया – “यह क्या बेहूदगी है? इसे हटाओ यहाँ से ग्राहक के साथ क्या ऐसा ही मजाक किया जाता है?

सेठ पंजवानी दौड़कर सनकी के पास पहुँचा और बोला ‘ “महाश्य जी, चिल्लाये नहीं, आपने जिस चीज की फरमाइश की थी वही तो आपको
दी गई है। इससे बेहतर चीज आपको कहीं  नहीं मिलेगी ।”
“मुझे नहीं खाना यह सब पैसे लौटाओ मेरे ।” सनकी क्रोध में उबल पड़ा ।

“लिए हुए पैसे लौटाने का हमारे यहाँ रिवाज नहीं है।” पंजवानी ने समझाया । “कैसे नहीं लौटाते हो पैसे ?
मैं  एक-एक की घण्टी बजा दूंगा।” “और हम अभी घण्टा बजा देंगे । महाशय होटल में दंगा मचाने के जुर्म में अभी पुलिस के हवाले किये देते हैं।”
पुलिस का नाम सुनकर सनकी को पसीना आ गया । सनक हवा हो गई । वह कुर्सी पर पहलू बदलने लगा ।
पंजवानी ने समझाते हुए कहा । श्रीमान जी, आपका वगैरा वगैरा रखा है खा लीजिये ।”
“मैंने कह दिया, नहीं खाना मुझे ।” सनकी बोला ।
“फिर आप क्या करेंगे ?” पूछा गया । साहब उठकर रवाना हो गए । यह सोचते हुए कि अच्छा हुआ वगेरा वगैरा नहीं खाया और
सौ रुपये की बचत हो गई । वगैरा वगैरा खाने के बाद डॉक्टर के पास जाना ही पड़ता । चलो सस्ते में छूटे |

प्यारे बच्चो- आप सभी को stories in hindi funny कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताइयेगा , हम हर दिन आपके लिए stories in hindi funny ले कर हाज़िर होते हैं | 

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