Hindi stories writers for kids // मौहल्ले में चोरी

प्यारे बच्चो – आज हम आपके लिए hindi stories writers की एक मशहूर कहानी ले कर हाजिर हुए हैं, बच्चो मैं आशा करता हूँ  hindi stories writers की कहानियाँ आपको बहुत पसंद आयेगी | 

मौहल्ले में चोरी 

हुत समय पहले की बात है , हुआ ये कि मौहल्ले में चोरियों की भरमार हो रही थी। कोई रात ऐसी न जाती जब किसी का भाण्डा बर्तन गायब न होता। कपड़े चोरी हो जाते। जब पुलिस इस मामले में बिल्कुल असमर्थ रही तो मुहल्ले की निगरानी में पहरेदारों की एक पार्टी बनाई गई, जिसमें मौहल्ले के जवानों और स्वस्थ बूढ़ों को रखा गया। इनका काम रात भर मौहल्ले में पहरा देना था। जाड़े के दिन थे। चाचा धूप में खाट बिछाये लेटे ऊंध रहे थे कि इनको खबर ये मिली कि बूढ़ा और कमजोर समझ कर उन्हें पहरेदारों में नहीं रखा जाएगा । ये कड़बड़ा कर उठे और उछल कर ज्यों ही चारपाई से बाहर आना चाहा कि पाँव  की ऊँगली  फँसी  और ये मुँह  के बल चाची पर गिर पड़े जो दूसरी चारपाई पर बैठी सब्जी काट रही थी। ” हाय  अल्लाह!” कह कर चाची ने चाचा को धक्का दिया और चारपाई से परे जा खड़ी हुई। वह काँपती  हुई बोली, “ये लेटे-लेटे क्या हो गया तुमको?”

“नाक कट गई और क्या हुआ।” चाचा वैसे ही औंधे पड़े हुए बोले। “आना तो इधर अपनी नाक देख लू। चाची उनकी तरफ बढ़ती हुई बोली,” “ये मोटी नाक लेटे-लेटे कैसे कट गई, चाकू से खेल रहे थे क्या?” और चाची ने नीचे से हाथ डालकर ज्यों ही नाक टटोली ये हड़बड़ा कर उठ बैठे। “ यहाँ  क्या देखती हो?” चाचा ने गम भरे लहजे में कहा, “देखना है तो जाकर रजिस्टर में देखो, जहाँ  मेरे पूरे कुबे की नाक कटी पड़ी है। क्या
इससे भी ज्यादा कोई बात हो सकती है।” चाचा पढ़े लिखे तो जरा नहीं थे। लेकिन अंग्रेजी भाषा से उन्हें बड़ी मौहब्बत थी। इसके कुछ शब्द उन्होंने सुन कर रट लिये थे। आवश्यकता पड़ने पर ये उन्हें प्रयोग करने में बड़ा गर्व अनुभव करते थे। इनका कहना था, बात कितनी भी कड़ी क्यों न हो, मगर अंग्रेजी के बिना बात में कड़ाई नहीं आती। “कैसे नाक कट गई?” चाची ने सवाल किया ही था कि ये गुस्से में फटी चप्पल घसीटते मुखिया के दरवाजे पर जा पधारे। तुलसीराम जी, जो मोहल्ले के हैड और तिजोरी वाले थे चाचा से बड़े तपाक से मिले और कष्ट उठाने का कारण पूछा।

चाचा तो गर्म थे ही, बड़ी गर्मी से बोले, “देखो तुलसी राम जी हैड, ये बड़ी बैड बात है, क्या समझकर हमें औरत समझ लिया था?” “क्यों आखिर क्या बात हुई जी?” तुलसीराम बड़ी नर्मी से बोले, “ये आपको कैसे शक हो गया कि हम आपको औरत समझते हैं?” “आपने एक लिस्ट बनाई है, मैन लोगों की। पहरा देने के लिए।” चाचा बोले। “आपने मुझसे क्यों नहीं पूछा? क्या हम कोई बैगर हैं? हमारे घर पैसा नहीं है या हमारे घर चोरी नहीं हो सकती?” “अजी क्यों नहीं हो सकती।” तुलसीराम जी बोले। “अजी हम पहरा देंगे। हम किसी का एहसान क्यों लें। क्या हम किसी से कम हैं।” “नहीं जी कम तो नहीं हैं।” तुलसीराम जी बोले, “लेकिन बूढ़े हो गये हैं। हमने बूढ़ों का नाम नहीं लिखा।” “देखो जी तुलसीराम हैड जी! आप बैड बातें न कीजिए।” चाचा का पारा और भी चढ़ गया, “बूढ़े होंगे आप, हम तो ओल्ड मैन हैं। हम तो पहरा देंगे। आज ही से देंगे, और डंके की चोट पर देंगे।” चाचा वहां से इस तरह अकड़ते हुए चले कि शरीर का कोई हिस्सा अपने स्थान पर नहीं रह गया था। घर में घुसते ही छाती
फुलाकर बोले, “  कांकर (conquer)  कर  के आ रहा हूं।” ” कंकड़  खाकर आ रहे हो? घर में रोटी नहीं थी क्या? या किसी ने जर्बदस्ती मुँह  में
कंकड़  भर दिया?” चाची ने पछा। “नहीं भाई जीत कर आ रहा हूँ”, “मेरी ड्यूटी  शाम से लगेगी।” “चाची ने चश्मा लगाकर उन्हें सर से
पाँव  तक देखा और पछा, ” घर  की खाट अच्छी नहीं लगती क्या? मुये बूढ़े हो गये हो। नौजवानों की नकल करने चले हो। किसी चोर उचक्के ने एक लठ जमाई तो जिन्दगी भर लंगड़ाते फिरोगे।

चाचा ने सुनी अनसुनी करते हुए कहा, – “हम तो चले रात की तैयारी करने।” चाचा ने बाहर से निकलते ही एक-एक गली के एक-एक कूचे का चक्कर लगाने लगे। वह यह देख रहे थे कि चोर किस गली से घर में जल्दी घुस सकते हैं। अभी शाम के चार बजे थे कि चाचा घर में घुसे और जल्दी में जो मिला खाने लगे। फिर कुर्ता पहना। फिर एक बार मुआयना करने निकल पड़े और फिर साढ़े आठ बजे घर में घुसे और पौने नौ बजे
निकल पड़े। चाची ने कहा, “कुछ खा तो लो, क्या भूखे पेट ही पहरा दोगे?” चाचा बिना कुछ बोले घर से निकल पड़े। ठीक दस बजे रात को चाचा ने पहरा देना शुरू किया। एक फटा बांस कहीं से उठा लाये थे, उसी को सड़क पर पटक-पटक कर लगे चिल्लाने,  ” सोते जागते रहो , अरे नहीं  नहीं | सोते-सोते रहो, आज चाचा की ड्यूटी है। “अभी हर घर में जगहर थी, मगर चाचा पूरी तरह ड्यूटी पर लगे थे।

ग्यारह बजते ही चाचा को भूख लगी। जब उन्होंने घर का दरवाजा खटखटाया तो कोई जवाब नहीं मिला। बिना कुछ खाये चाचा वापस ड्यूटी पर आ गए | रात ज्यों ज्यों बीतती गई पहरेदारों की आँखों  में नींद सताने लगी, लेकिन चाचा की आँखों  में नींद का निशान भी नहीं था। नींद आती भी तो कैसे, पेट की आग चैन ही नहीं लेने देती थी। एक हाथ से पेट थामे और दूसरे हाथ से फटा बांस खटखटाते वह उस गली में पहुँचे , जहाँ  उनके ध्यान में चोरों का सबसे बड़ा खतरा था। ज्यों ज्यों चाचा आधी गली पहुँचते गए कि उन्हें दूर से जूतों की आवाज आती सुनाई दी, जैसे कोई गली में घुस रहा हो। आवाज एक नहीं कई जूतों की थी। इतना सुनते ही चाचा काँपने लगे और डर भरी नज़रों से उस ओर देखा और काँपती  हुई आवाज में ‘जय ! महाबली’ कहा और वहीं दौड़ो-दौड़ो चोर! चोर!” पांव रखकर भागने लगे।

 “रुक जा! नहीं तो गोली मार देंगे।” एक आवाज पीछे से आई और चाचा दोनों आंखें बन्द करके जमीन पर बैठ गए। ‘चलो एक तो हाथ आया।’ एक आवाज़ कान में आई। ‘चलो पिटाई करो दूसरों का भी नाम बता देगा।’ चाचा ने सोचा शायद ये पूरे पहरेदारों का नाम जानना चाहते हैं और वह जल्दी-जल्दी सबका नाम याद करने लगे, लेकिन एक भी नाम याद न आया। दो आदमियों ने चाचा के दोनों हाथ पकड़ कर उन्हें झटके से उठाकर खड़ा कर दिया। और चाचा ने आंखें खोली तो देखा कि ये चोर नहीं पुलिस वाले हैं जो कि राउण्ड पर थे।
के स स…साहब,” चाचा ने मुँह  खोला, “मैं च-च चोर नहीं, प-प…पहरेदार हूँ।” “तुमसे बड़ा कोई पहलवान नहीं था इस मोहल्ले में, ” कांस्टेबिल ने सवाल किया, “तुम चोरों को क्या पकड़ोगे चोर ही तुमको उठा ले जाएंगे।”

इसका जवाब चाचा देना तो चाहते थे लेकिन गला इतना सूख चुका था कि एक भी शब्द जबान ने न निकला। पुलिस वाले हँसते हुए चले गए, लेकिन चाचा ने चला न जा रहा था। किसी तरह गली पार करके पार्क में पहुँचे और वहीं घास पर लम्बे लेट गए। घास पर लेटते ही चाचा की आँख  बन्द तो हो गई, लेकिन सोते में वह बार-बार चौंककर बहुत ही डरावनी आवाज में चिल्लाने लगते, “दौड़ो-दौड़ो, चोर! चोर!” रामलीला का जमाना था। पूरा मोहल्ला रामलीला देखने चला जाता था। केवल पहरेदार पूरी तरह चौकन्ने रह कर ड्यूटी देते रहते थे।
यह भरत मिलाप और रावण के जलाये जाने के एक रात पहले की बात है। चाचा की बारी थी। वह खूब खा पीकर ड्यूटी पर आये थे। पहरा देने के साथ-साथ चाचा – लम्बी-लम्बी उबासियां भी लिये जा रहे थे। इस रात चाचा चोरों से ज्यादा गलियों में घूरने पर चौकन्ने हो रहे थे। खड़-खड़ बांस
बजाते हुए सिर्फ गलियों के अंदर सड़क पर ही से झाँक  देते थे और देखते ही जल्दी से खिसक जाते थे। चाँद की बारह-तरह तारीख थी। चारों
तरफ चाँदनी  बिखरी हुई थी। चाचा ज्यों ही रामलीला ग्राउन्ड के निकट पहुँचे तो उन्हें मैदान में कोई सफेद सी चीज नज़र आई, जो
पूरी तरह खड़ी हुई उनकी नज़रों में मोहल्ले की तरफ ताक रही थी। “चोर है बिल्कुल अकेला, मौके की ताक में मोहल्ले की तरफ ताक रहा है। ऐ
भगवान ! अगर पकड़ लिया  तो नाम हो जाये, लेकिन अगर दे मारे तो..? तो क्या होगा। नाटक तो पास ही हो रहा है शोर सुनते ही पूरा मोहल्ला टूट पड़ेगा। ऐ भगवान! ऐ काली माई, हे रावण महाराज! मदद करना।’ यही सोचते और दिल ही दिल में हनुमान चालीसा पढ़ते चाचा दबे पाँव  चोर की तरफ चल पड़े। चाचा को यू भी कम दिखाई देता था। मोटे शीशेका चश्मा लगाते थे। दिन में बड़ी चीज छोटी नजर आती थी, फिर ये तो रात का समय था। चोर बिल्कुल निश्चित खड़ा था । वह धीरे-धीरे चलकर उसके करीब पहुँचे ।

करीब पहुंचते ही। जै बजरंग बली! का नारा मारा और अपना पूरा बोझ चोर पर डाल दिया चोर बिना कुछ मुँह के बल औंधा जमीन पर गिर गया और चाचा उस पर चढ़ कर पूरी ताकत से चिल्लाने, “चोर पकड़ा! चोर पकड़ा! दौड़ो-दौड़ो। ज्यों ही चाचा की डर भरी आवाज तमाशाइयों कि कान में पड़ी, सब नाटक-वाटक छोड़ मैदान की तरफ दौड़ पड़ें। देखा तो चाचा रावण के पुतले पर सवार उसकी एक-एक कमाची तोड़ डाले थे।
“अरे चाचा ! ऐ चाचा, ये चोर नहीं रावण का पुतला है। पूरी मेहनत का सत्यामास मार दिया। “बड़ी देर के बाद चाचा को होश आया तो उचक कर खड़े हो गए और एक-एक की तरफ भौचक्के से देखने लगे।

जिस आदमी ने हफ्तों मेहनत करके रावण का ये पुतला बनाया था वही रावण का पाठ भी कर रहा था। मारे गुस्से से वह अपना गदा हिलाता हुआ चाचा की तरफ झपटा। ऐ निरीह बृद्ध बूढ़े बालक !” वह नाटकीय स्वर में बोला, “ये तूने क्या किया ” और फिर उसने ज्यों ही कागज के बने गदा
को घुमाकर चाचा की खोपड़ी पर रसीद करना चाहा, उसके दोनों पाँव  पकड़ लिये और उसके मुँह की तरफ सर उठा कर बोले, “महात्मा ! नरेश ! क्षमा कीजिये ये आपका बालक कोई बैड हरकत नहीं कर रहा था केवल प्रैक्टिस कर रहा था, ताकि इसी तरह एक दिन असली चोर को पकड़ सके। बल दीजिये महाराज अपना बल दीजिये।”और चाचा उसके पैरों में गिर गए।

प्यारे बच्चो – मुझे पूरी उम्मीद हैं की आपको hindi stories writers कहानी अच्छी लगी होंगी और आप इस hindi stories writers कहानी का भरपूर मनोरंजन किये होंगे | 

Read more stories

Short story in hindi // कमाल का कारनामा 

let`s read a short story in hindi कमाल  का कारनामा  नव वर्ष की पूजा के लिए मंडप सजा हुआ था। पूजा होने में अभी देरी थी। घोष, दास और देव एक कोने में खडे आपस में खसर-पुसर कर रहे थे। देव कुछ गुस्से में अपनी सुरीली आवाज़ में गाता हुआ बोला, “अरे अपना बैनेर्जी ओबी …

Short story in hindi // कमाल का कारनामा  Read More »

0 comments
short story in hindi for kids

Short Story in Hindi for Kids // लालच का परिणाम 

प्यारे बच्चो- आज हम आपके लिए Short Story in Hindi for Kids ले कर आएं हैं जो आप सभी बच्चो को बहुत पसंद आएगी   लालच का परिणाम  बहुत पुरानी बात है एक बुढ़िया एक झोंपडी में रहती थी। एक दिन सवेरे-सवेरे ही एक साधु  उसकी झोपड़ी के सामने  आ कर खड़ा हो गया और बोला- …

Short Story in Hindi for Kids // लालच का परिणाम  Read More »

Hindi me kahani // hindi kahaniya story

let`s start reading hindi me kahani fot kids  कंजूस आदमी  कई साल पहले की बात है एक आदमी रहता था । वह बहुत कंजूस था। एक बार जब वह जंगल से गुज़रा, तो उसने खजूर का पेड़ देखा , जिसमे बहुत सारे मीठे मीठे खजूर लटक रहे थे | उसके मुह्ह में पानी आ गया …

Hindi me kahani // hindi kahaniya story Read More »

1 comment

Leave a Comment

Your email address will not be published.