Hindi writer story // कंजूस औरत की चालाकी

प्यारे बच्चो- आज हम आपके लिए hindi writer story ले कर आये हैं जो आप सभी बच्चो को बहुत पसंद आयेगी और मुझे पूरी उम्मीद है आप hindi writer story को पढ़ते हुए भरपूर मनोरजंन करेंगे | 

कंजूस औरत की चालाकी 

स कॉलोनी में सब्जी बेचने वालों के दिन आराम से कट रहे थे। अच्छी बिक्री हो जाती थी। सब्जी मंडी से सब्जी खरीदी और ठेले में रख कर  कॉलोनी का चक्कर लगा लिया। इसमें सौ रुपए से लेकर दो सौ रुपए तक बन जाते थे । खरी आमदनी थी। पाँच रुपए किलो की सब्जी दस
के भाव बेच दो। जो झिक झिक करे उसे आठ दे दो और सौ ग्राम की डंडी मार दो मामला बराबर । अक्सर महिलाएं  ही सब्जी खरीदने आती। महिलाएं  भाव ताव करती ही है । इसलिए उनका इलाज कम तौलने के सिवा कुछ नहीं था। इसलिए सब्जी वाले सुखी थे। लेकिन अचानक ही एक नई महिला उस कॉलोनी में आ गई । उसके आने से सबसे ज्यादा हलचल सब्जी वालों में मची थी। खरीदारी में सुधा नाम की उस महिला ने
सभी कंजूस महिलाओं के रिकार्ड तोड़ दिए थे। महिलाएं को सुधा कंजूस कहतीं और सब्जी वाले चालाक । सुधा ने एक दिन एक सब्जी वाले से
एक किलो बड़े बड़े आलू तुलवाए। आलू तौलने के बाद वह बोली, “भैया, जरा इन्हें गिनो।” सब्जी वाला बोला, “जी, ग्यारह आलू वह बोली, “इसके दस हिस्से कर दो बराबर और बताओ एक हिस्से में यानी सौ ग्राम में कितने आलू चढ़े ।” सब्जी वाले ने कहा, “सीधा हिसाब है जी, एक आलू हटा दो । सौ ग्राम का आलू पड़ गया ।” महिला ने सब्जी वाले को नौ आलू देते हुए कहा, “ये नौ सौ ग्राम आलू हैं, इन्हें रख लो। मुझे सौ ग्राम ही चाहिए यह कह कर उसने एक फालतू आलू सहित दो आलू अपने पास रख लिए। सब्जी वाला कहता रह गया कि दो आलू दो सौ ग्राम के हुए, किंतु वह नहीं मानी। सौ ग्राम के पैसे देकर चली गई। एक दिन सुधा ने एक सब्जी वाले से पूछा, “भैया, टमाटर कैसे दिए ? “चार रुपए पाव ।” “भैया किलो का भाव वताओ।” “पंद्रह का भाव लग जाएगा।” “ढाई किलो कितने के दोगे ?” “तीस पर लग जाएंगे।” “ठीक है, गई किलो तोल दो। लेकिन
सारे खराब दाने निकाल कर एक तरफ रख देना।” सब्जी वाला खराब टमाटर एक तरफ रखता गया । खराब में भी ज्यादातर खाने लायक थे, लेकिन उसने सुधा की संतुष्टि के लिए करीब आधा किलो टमाटर छांट कर किनारे कर दिए। ढाई किलो टमाटर तोल कर उसने एक थैले में रख
दिए । तब  सुधा ने पुछा, “यह बताओ, इन सड़े टमाटरों को तुम फिर से अपनी ढेरी  में तो नहीं डाल दोगे” सब्जी वाला तो यही करता, लेकिन उसने सुधा से यू ही कह दिया, “अरे नही बहन जी। इन्हें मैं फेंक दूंगा।” सुधा ने अपने हाथ से एक थैली उठाई और उसमें छांटे हुए सारे टमाटर डाल कर बोली , “भैया, मुझे यकीन नहीं है कि तुम फेंक दोगे । मैं खुद फेकूँगी  । इसलिए अपने साथ ले जा रही हूं।” सब्जी वाला हक्का-बक्का , कुछ देर तो वह सुधा का मुंह देखता रह गया। फिर अचानक आवाज लगाई. “लेकिन अपने ढाई किलो टमाटर तो लेती जाइए।” सुधा ने पलट कर कहा, “बहुत महगे लगा रहे हो भैया । मुझे नहीं लेने ।” इन सारी घटनाओं को मद्देनजर रखते हुए सब्जी वाले सुधा  को पहचानने लगे थे। वे लोग सुबह सुबह यही प्रार्थना करते थे कि उनकी सुधा से मुठभेड़ न हो । यदि किसी को पहले ग्राहक के रूप में सुधा आती हुई दिखाई दे जाए तो ठेला लेकर दोड़ पड़ते। एक तरफ से सब्जी वाले उससे काफी आंतकित थे | सब्जी वाले दूसरी महिलाओं को सुधा का किस्सा  बताते रहते । महिलाएं खुद भी उसे खरीदारी करते हुए देख चुकी थी। कुल  मिलाकर लोगों ने उसे कंजूस कहना शुरु कर दिया या । इस बात से सुधा कुछ परेशान भी थी। वह अपनी छवि सुधारना चाहती थी। लेकिन प्रश्न यह था कि छवि सुघरे कैसे? एक दिन उसने कालोनी की कुछ प्रमुख महिलाओं के पास जाने की ठानी । ये प्रमुख महिलाएं ऐसी थीं, जो या तो ज्यादा घरों में आती जाती थी या जो रुतबे वाली थी और लोग जिनकी बात पर यकीन करते थे। ऐसी कुल पांच महिलाओं को उसने चुना। अब वह उन पांच महिलाओं के पास पहुंच गई । उन्हें एक एक कर दाक्त पर बुला लिया। अगले दिन जब पांचों आश्चर्य में डूबी सुधा के घर पहुंची तो देखा उसके घर में दाक्त की कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। वे सभी आपस में कानाफूसी करने लगी देखा, हम लोगों ने सही सोचा । यह मुँह  और मसूर की दाल । सुधा जैसी कंजूस औरत भला किसी को क्या दावत देगी तभी सुधा ने कहा, “चलो हम लोग बाहर चल कर कुछ खाएं।” सुधा के इस प्रस्ताव से सभी महिलाएं और भी ज्यादा आश्चर्य में डूब गई। लेकिन वे लोग उसके साथ चल पड़ी। सुधा ने अपने साथ एक बड़ा थैला भी रख लिया। महिलाओं ने मैले के विषय में पूछा तो उसने कह दिया कि सामान खरीदना है। सभी महिलाएं एक बड़ी मिठाई की दुकान पर पहुंची। दुकान के बाहर खड़े होकर लोग मिठाइयां आदि खा रहे थे। अंदर लोग मिठाई पैक करवा रहे थे। सुधा ने सबको बाहर खड़ा किया और खद दुकानदार के पास गई। उसे चैला दिखाती हुई बोली, “भाई साहब, इसमें कितने किलो मिठाई
आ जाएगी ?” “पंद्रह किलो तो आ जानी चाहिए।” “अका तो गुलाब जामुन कैसे दिए ?” “सत्तर रुपए किलो।” “ठीक है एक कागज पर नोट कर
लें-पांच किलो गुलाब जामुन। …. और पांच गुलाब जामुन बाहर भेज-टेस्ट करने के लिए। वे पांचों मेरी सहेलियों है।” “ठीक है जी। और बोलिए।”
“बूंदी के लड्डू कैसे दिए ?”  “पचास रुपए किलो 1″ “इसे भी पांच किलो नोट करिए और पांच लड्डू बाहर भेजिए।” “बर्फी-काजू वाली ?” “नब्बे रुपए किलो ।” “चार किलो नोट कीजिए और पांच पीस बाहर भेज दीजिए। इस तरह उसने आठ अदद नोट कराई जो अड़तीस किलो बैठी । उधर सहेलियां हैरान थीं। खाते खाते थक गई थीं। तभी एक सहेली ने आवाज तब सुधा ने दुकानदार से कहा, “मेरा थैला  तो छोटा पड़ गया ।”
दुकानदार बोला, “हम पॉलेथीन के थैलो में रख देते है।” सुधा बोली, “ऐसा कीजिए आप मेरा पता नोट कीजिए । उसके बाद में घर जाकर आपको
फोन करती हूं। आप सारी मिठाइयां घर भिजवा दीजिए । हो सकता है पति से पूछ कर आर्डर बढ़वाना पड़ जाए । उसके बाद सुधा ने एक फर्जी पता बताया और दुकानदार का कार्ड ले लिया। फिर पर्स खोला और बोली, ” यदि  आपको मेरे पर विस्वास नहीं है तो कुछ  रूपये एडवांस ले लो वरना सारे पैसे घर पर दे दूंगी।” दुकानदार ‘ही-ही करने लगा। वह झट बोली, ” मुझे  ऐसा लग रहा है की आपको मेरे  पर विश्वास  नहीं है।
बताइए कितने पैसे दूं?” “नहीं, ऐसी बात नहीं है।” “तो अच्छा बात है, मैं जा  रही हूं । फोन करुंगी।”
– बाहर खड़ी सहेलियां बहुत खुश थीं। उन्होंने पूरी कालोनी में प्रचार करना शुरु कर दिया कि सुधा तो बड़ी दिलवाली है । वह कंजूस कतई नहीं । यह बात भी बहुत जल्दी फैली और सुधा की छवि सुधर गई।
उधर वह दुकानदार बहुत ही गुस्से में_ था । उसे उन महिलाओं की तलाश थी जो स्वाद चखने के नाम पर भरपेट मिठाई खा गई और लौट कर नहीं आई । खास तौर से उसे सुधा की तलाश थी जिसकी लच्छेदार बातों में आकर उसने मिठाई पैक तक करवा दी थी । सुधा यह बात जानती थी
इसलिए वह उस दुकान का रुख नहीं कर रही  थी। लेकिन बाकी पांचों सहेलियां इस सबसे बेखबर, एक दिन उस दुकान के पास से निकल पड़ीं। देखते ही दुकानदार का नौकर चीखा, “मालिक, वही ठग औरतें जा रही है।”उन महिलाओं ने पलट कर देखा तो पाया कि सब उन्हीं की और देख रहे हैं। तभी मिठाई की दुकान का मालिक उनके पीछे दौड़ा और पास पहुँच  कर बोला, “कहिए, आज किसे चूना लगा कर आ रही हैं ?” “शटअप ! व्हाट डू यू मीन ? तुम कहना क्या चाहते हो?” “सुनों ओय ठगनियो, अंग्रेजी में बोलने से शराफत का सर्टिफिकेट नहीं मिल जाता । उस रोज तुम पाँचो उतनी मिठाई खा गई और तुम्हारी उस छठी ठगनी ने पैसे देना तो दूर अड़तीस किलो मिठाई पैक करवा कर रखवा दी। हमें जो परेशानी हुई वह अलग ।” अब उनकी समझ में बात आने लगी। दुकानदार से पूरी कहानी सुनी तो हैरान रह गई। खैर, उस दिन के पैसे भी उन्होंने दिए और दुकानदार के साथ मिल कर एक योजना भी बना डाली। उसी दिन वे पांचों सुधा के पास पहुंची। बोली, “सुधा, उस दिन की दावत तो अच्छी रही। आज हम तुम्हें दावत देती हैं, चलो।” सुधा ना नुकर करती रही पर वे उसे ले ही गई । सीधे उसी दुकान में पहुंची और दुकानदार से कहा, “ये लीजिए, अब बात कीजिए  ।” सुधा मामला समझ गई । सहेलियों से बोली, “तुम लोग बाहर बैठो। मैं इनसे बात करती हूं।” वे बाहर गई तो दुकानदार बोला, “पैसे तो तुम्हारी सहेलियों ने दे दिए। तुमसे पैसे नहीं लूंगा, , बल्कि पुलिस को बुलाऊंगा।”सुधा ने कहा, “हां, मिलाइए नंबर । तुम नहीं बुलाते तो मैं बुलाऊंगी । तुम लोग मुझे नहीं जानते कि मैं कौन हूं। ये लोग जानबूझ कर अनजान बनी रहीं, ताकि तुम्हें पकड़वाया जा सके । इन सहेलियों ने तुम्हारी सारी बातें टेप कर ली हैं कि मिठाई तुम्हारी थी और तुमने उसके पैसे मागे।” “मिठाई तो हमारी ही थी ।”-वह बोला । सुधा ने कहा, “यहीं तो तुम मार खा गए । उस मिठाई को खाने के बाद ये पांचों अस्पताल पहुंच गई थीं। तभी हमने आर्डर कैन्सिल  किया। हमारे पास कोई सबूत नहीं था कि मिठाई तुमसे ली। सबूत जुटाने के लिए इन्होंने अनजान बनने का नाटक किया । पर अब तुम मारे गए।” – यह सुनते ही दुकानदार गिड़गिड़ाने लगा । सुधा बोली, “ठीक है, पहले उन लोगों से माफी मांग कर उनके पैसे लौटाओ और एक एक प्लेट रसमलाई उन्हें खिलाओ। पर ध्यान रहे-बासी न हो।” और जब यह चमत्कार देखा तो पांचों फिर हैरान रह गई।

प्यारे बच्चो- मुझे पूरा विश्वास है की आपको ये hindi writer story बहुत पसंद आई होगी,हमारी भी यही कोशिश हैं की हम आपके लिए ऐसी hindi writer story ले कर आऊँ जो मनोरंजन से भरी रहे | 

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