Child stories in hindi // जासूस की कहानी 

प्यारे बच्चो, आज हम आपके लिए child stories in hindi ले कर आये हैं और मुझे पूरी उम्मीद है की आप सभी को child stories in hindi बहुत पसंद आएगी |

जासूस की कहानी

घनवन के ठीक बीचोबीच एक पीपल का पेड़ था. एक दिन उस की डाल पर एक बोर्ड लगा, उस पर लिखा था,‘जासूस उल्लू, कम खर्च में हर परेशानी दूर करने की शतप्रतिशत गारंटी, उस बोर्ड के ठीक नीचे दरवाजा था| दरवाजे के अंदर उस के ठीक सामने चमचमाती मेज थी | उस मेज के पीछे घूमने वाली कुरसीथी और कुरसी पर बैठा था जासूस उल्लू | 

उल्लू 15 दिन पहले ही सुंदरवन के मशहूर जासूस गिद्ध से सालभर जासूसी सीख कर लौटा था. और अब उस ने सघनवन में अपना दफ्तर खोला था. लेकिन पिछले 10 दिनों में एक भी ग्राहक उस के दफ्तर में नहीं आया. वह अपनी गोलगोल आंखों से सामने से जाने वाले रास्ते को बारबार देखता था. दूरबीन जैसी तेज नजर वाली आंखें उदास थीं क्योंकि कोई ग्राहक नजर नहीं आता था. सघनवन के सभी जानवर उल्लू को नौसिखिया समझते थे. वे जासूस उल्लू के दिमाग के बजाय अपने दिमाग पर ज्यादा भरोसा करते थे|

 

– अपने दफ्तर में बैठा उल्लू सड़क की ओर उदास आंखों से देख रहा था. दूर एक जगह भीड़ देख कर उसे हैरानी हुई, तभी उसे एक बतख अपने दफ्तर की ओर आती हुई दिखाई दी. उस की चोंच जल्दीजल्दी खुल रही थी और बंद हो रही थी. इस से उल्लू समझ गया कि बतख बेचैन है..बत्तख फुदकती हुई उल्लू के दफ्तर की ओर बढ़ रही थी. उल्लू संभल कर अपनी कुरसी पर डट गया. वह कान खड़े कर के घंटी बजने का इंतजार करने लगा, तभी दरवाजे की घंटी बजी. उल्लू ने उठ कर दरवाजा खोला. फिर उस ने बतख को अपने सामने वाली कुरसी पर बैठने को कहा.बतख ने हड़बड़ी में कहा, “देखिए, मेरा राजा बेटा आज सुबह से लापता है. मैं ने उसे बहुत ढूंढ़ा, लेकिन कुछ पता नहीं
चल सका. मैं ने उस के गुम होने की रिपोर्ट थाने में भी दर्ज करा दी है. पुलिस वालों ने भी बहुत हाथपैर मारे, लेकिन मेरे राजा बेटे को नहीं ढूंढ़ पाए. अगर आप उसे ढूंढ़ सकते हों तो बोलिए और अभी मेरे साथ चलिए. हां, फीस की फिक्र मत कीजिएगा. आप को फीस मुंहमांगी मिलेगी पर मेरे बेटे के मिलने के बाद.”जासूस उल्लू ने बिना देर किए अपना बैग उठाया और फौरन बतख के साथ चल पड़ा|

 

रास्ता पार करतेकरते बतख ने बताया कि उस का बेटा घर के पीछे वाले बगीचे में खेलने गया था. तब से उस का पता नहीं है. बगीचे में पहुंच कर जासूस उल्लू ने वहां की झाड़ियों को गौर से देखा. उस ने पाया कि उन के बीचोबीच एक गहरा गड्ढा है. बतख ने बताया कि यहां उस के दादा के जमाने में एक कुआं था. कुएं का पानी सूख जाने से अब वह बिलकुल बेकार हो गया है. उल्लू ने अपने कान ठीक गड्ढे पर लगा दिए. थोड़ी देर बाद उसे एक बच्चे के रोने की बहुत ही धीमी आवाज सुनाई दी.

 

– अब उल्लू सीधा खड़ा हो गया. वह बतख से बोला, “आप का राजा बेटा इस कुएं में गिर गया है. ठहरो, मैं अभी उसे निकालने की तरकीब सोचता हूं.” – इतना कह कर उल्लू ने अपना बैग खोला और एक लंबी रस्सी निकाल कर उसे कुएं में लटकाने लगा. _ “जासूस साहब, राजा बेटा इतना छोटा है कि रस्सी पकड़ कर चढ़ नहीं सकेगा,” बतख बोली|

जासूस उल्लू ने कुछ देर सोचा. फिर वह लपक कर बतख के बाथरूम में घुस गया और पानी से भरी बालटी ले कर लौटा. वह बालटी कुएं में उलटने ही वाला था कि बतख ने अपनी चोंच से बालटी खींच ली. “कैसे जासूस हैं आप. बालटी का पानी कुएं में डालोगे तो मेरे बेटे के ऊपर इतनी ऊंचाई से पानी की धार गिरेगी. इस से उसे चोट लगेगी. वह मर भी सकता है,” बतख ने नाराजगी से कहा. जासूस उल्लू फिर सोच में पड़ गया. तभी उस की नजर बतख के घर में लगे नल और वहीं पर पड़ा लंबे पाइप पर पड़ी.वह दौड़ कर पाइप ले आया. उस ने पाइप का एक सिरा कुएं में लटकाया. फिर दूसरे सिरे को नल में फिट कर के नल चालू कर दिया.

 

बतख के घर में एक बहुत बड़ी टंकी थी. नल के जरिए उस का पानी धीरेधीरे कुएं में जाने लगा. इस से कुआं भरने लगा. बतख को उल्लू की यह तरकीब पसंद आई| – आधे घंटे के बाद कुआं लबालब भर गया. फिर राजा बेटा तैरता हुआ ऊपर आ गया. ऊपर आते ही राजा अपनी मम्मी से लिपट गया. बतख खुश हो गई. वहां मौजूद सभी जानवरों ने जासूस उल्लू की बहुत तारीफ की. उल्लू को धन्यवाद देते हुए बतख ने पूछा, “जासूस साहब, आप की फीस कितनी हुई?” “सिर्फ 5सौ रुपए,” उल्लू ने कहा,फिर बतख ने खुशीखुशी जासूस उल्लू को 5सौ रुपए का एक नोट थमा दिया | 

प्यारे बच्चो, आप सभी को child stories in hindi कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ताकि हम आपके लिए इसी तरह की मज़ेदार कहानी ले कर आ सके | 

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