Bacho ki kahaniyan | बच्चो की कहानियाँ | नदिया के पार 

प्यारे बच्चो, आज मैं आपके लिए bacho ki kahaniyan ले कर आया हूँ और मैं आशा करता हूँ की bacho ki kahaniyan आप सभी को बहुत पसंद आएगी। 

नदिया के पार

ज सुबह गोलू गधा खूटे से बंधी रस्सी खोलकर जंगल में भाग आया था। जंगल का हरा-भरा वातावरण उसे बेहद पसंद आ रहा था। वह सोच रहा था- यहाँ न तो काम की चिंता है और न ही खाने की फिक्र।’ घास खाने के बाद गोलू जमीन पर धूल से खेलने लगा। तभी उसने एक नन्हे खरगोश को अपनी तरफ आते देखा। “मेरा नाम सोनू है, तुम जंगल में नए आए हो क्या?”-खरगोश ने आकर पूछा।

“हाँ, आज ही आया हूँ ।”- गोलू बोला। “चलो, मैं तुम्हें जंगल की सैर करवाता हूँ ।”-सोनू ने गोलू से कहा। दोनों सैर करने निकल पड़े।
थोड़ी दूर जाने पर उन्हें एक भालू पेड़ के नीचे खड़ा मिला।

‘अरे भालू चाचा, आप यहाँक्या कर रहे हैं?”-सोनू ने उससे पूछा। “मुझे शहद का घड़ा घर ले जाना है। अच्छा हुआ, तुम आ गए। जरा अपने दोस्त
से कहो कि मेरा यह घड़ा घर तक पहुँचवा दे। मैं तुम्हें भी शहद दूँगा ।”-भालू ने कहा। इससे पहले सोनू कुछ कहता, गोलू बोल उठा-“माफ करना चाचा, पर मैं यहाँ जंगल में कोई काम करने नहीं आया हूँ।”यह कहकर गोलू आगे बढ़ गया।

आगे बढ़े, तो पीछे से किसी ने पुकारा- “सोनू बेटा, कहाँ जा रहे हो?” सोनू ने घूमकर देखा और बोला-“अरे बिल्ली मौसी, आप! यह मेरा नया दोस्त है। मैं इसे जंगल की सैर करवा रहा हूँ ।” “सोनू बेटा, जरा अपने दोस्त से कहो कि वह मेरी टोकरी घर तक पहुँचा दे। मैं तुम दोनों को खीर दूंगी।”-बिल्ली बोली। “मुझे नहीं चाहिए आपकी खीर। मैं यहाँ  जंगल में कोई काम करने नहीं आया हूँ।”

कहकर गोलू आगे बढ़ गया। सोनू को अच्छा नहीं लगा। पर वह कुछ बोला नहीं। नदी के किनारे पहुंचकर उन्होंने देखा कि एक बंदरिया अपने बच्चे के साथ नदी पार करने की कोशिश कर रही है। पर नदी की गहराई के कारण असफल हो रही थी। “क्या बात है दीदी, कोई परेशानी है
क्या?”-गोलू ने बंदरिया से पूछा।

“भैया, मैं अपने बेटे बिटू को डाक्टर को दिखाने नदी के पार लाई थी। पर अब पानी बढ़ गया है, इसलिए मैं नदी पार नहीं कर पा रही हूँ । बंदरिया ने जवाब दिया। “बस, इतनी सी बात! आप बेटे के साथ मेरे ऊपर सवार हो जाइए, मैं आपको नदी के पार छोड़ आता हूँ।”-गोलू बोला।

गोलू की बात सुनकर बंदरिया अपने बेटे के साथ गोलू के ऊपर सवार हो गई। “मैं अभी आया।”-गोलू सोनू से बोला और उन्हें लेकर चल पड़ा।
गोलू ने उन्हें सकुशल नदी के दूसरी ओर पहुँचा दिया। बंदरिया ने गोलू को बार-बार धन्यवाद दिया। फिर वह अपने बेटे के साथ चली गई। गोलू भी नदी पार करके वापस सोनू के पास लौट आया।

सोनू ने पूछा-“गोलू, मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि जब भालू चाचा और बिल्ली मौसी ने आपसे मदद मांगी, तो आपने इनकार कर दिया। जबकि इसके बदले में वे शहद व खीर देने को तैयार थे। और यहाँ आप उस अनजान बंदरिया की मदद करने के लिए अपने आप तैयार हो गए, ऐसा “सोनू भैया, उन दोनों को हमारी मदद की कोई जरूरत नहीं थी, पर इनको थी।”- गोलू ने जवाब दिया। “क्या मतलब?’-सोनू ने पूछा।

“देखो, सोनू! भालू चाचा का मटका इतना भारी नहीं था कि उसे वह खुद न उठा सकें। इसी तरह बिल्ली मौसी की टोकरी भी अधिक भारी नहीं थी। इसलिए मैंने उन्हें भी इनकार कर दिया, जबकि इसके बदले में भालू चाचा शहद और बिल्ली मौसी खीर देने का लालच दे रहे थे। इसके विपरीत इस बंदरिया को वास्तव में नदी पार करने के लिए मदद की आवश्यकता थी, इसलिए मैंने इनकी मदद कर दी।”-गोलू ने जवाब दिया।
सोनू ने मुसकराते हुए सिर हिलाया। उसकी समझ में सब आ गया था।

प्यारे बच्चो , आप सभी को bacho ki kahaniyan कैसी लगी हमे जरूर बताइयेगा ,ताकि हम आपके लिए इसी तरह की मज़ेदार कहानियाँ ले कर आ सके – धन्यवाद 

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